बांग्लादेश की मेन्स क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया. मौजूदा वर्ल्ड चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया को वनडे सीरीज में हराकर बांग्लादेश ने वह कारनामा कर दिखाया, जिसका इंतजार उसे 23 सालों से था. 11 जून (गुरुवार) को मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम में मिली जीत के साथ बांग्लादेश ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोई द्विपक्षीय ओडीआई सीरीज अपने नाम कर ली.
बारिश से प्रभावित वनडे सीरीज के दूसरे मुकाबले में बांग्लादश को जीत के लिए डीएलएस नियम के तहत 41 ओवरों में 192 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने 36 गेंद बाकी रहते 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया. 2003 में पहली बार दोनों टीमें किसी वनडे द्विपक्षीय सीरीज में आमने-सामने आई थीं. तब से लेकर अब तक ऑस्ट्रेलिया ने लगभग हर बार बांग्लादेश पर अपना दबदबा कायम रखा.
2006 और 2011 के बांग्लादेश दौरे भी ऑस्ट्रेलिया ने बिना कोई मैच गंवाए खत्म किए थे. लेकिन 2026 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई. इस बार बांग्लादेश ने सिर्फ मुकाबला नहीं किया, बल्कि ऑस्ट्रेलिया को उसके ही अंदाज में जवाब दिया. तेज गेंदबाजी, आक्रामक रवैया और दबाव में शानदार प्रदर्शन- इन तीन चीजों ने सीरीज का रुख बदल दिया.
नाहिद राणा बने सीरीज जीत के सुपरस्टार
अगर इस ऐतिहासिक सीरीड जीत का कोई चेहरा चुना जाए तो वह नाहिद राणा होंगे. इस युवा तेज गेंदबाज ने अपनी रफ्तार और आक्रामक गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को बैकफुट पर धकेल दिया. पहले वनडे में उनकी शॉर्ट-पिच गेंदों ने कंगारू बल्लेबाजों को असहज कर दिया. ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज न तो खुलकर शॉट खेल पाए और ना ही रन गति बनाए रख सके. लंबे समय बाद किसी बांग्लादेशी तेज गेंदबाज ने विश्व क्रिकेट की दिग्गज टीम को इस तरह परेशान किया.
यह भी पढ़ें: बांग्लादेशी गेंदबाज की हरकत से तिलमिलाए कंगारू कप्तान जोश इंग्लिस, जमकर हुई बहस, VIDEO
एक दौर था जब बांग्लादेश की पहचान सिर्फ स्पिन गेंदबाजी से होती थी. लेकिन अब टीम की सबसे बड़ी ताकत उसकी तेज गेंदबाजी बनती जा रही है. तस्कीन अहमद, नाहिद राणा और मुस्ताफिजुर रहमान की तिकड़ी ने पूरी सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को सांस लेने का मौका नहीं दिया. रफ्तार, स्विंग और विविधता के दम पर उन्होंने साबित कर दिया कि बांग्लादेश अब सिर्फ घरेलू परिस्थितियों पर निर्भर रहने वाली टीम नहीं है.
यह भी पढ़ें: बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने रचा इतिहास, 21 साल बाद ऑस्ट्रेलिया को वनडे मुकाबले में रौंद डाला
गेंदबाजों के अलावा बल्लेबाजों ने भी शानदार जिम्मेदारी दिखाई. दूसरे वनडे में पूरी टीम ने मिलकर प्रदर्शन किया और किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर रहने के बजाय सामूहिक प्रयास से जीत हासिल की. यही वह बदलाव है, जो बांग्लादेश को एक खतरनाक टीम बनाता है. अब उनके पास मैच जिताने वाले खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि मैच खत्म करने वाली टीम भी है.
यह सच है कि ऑस्ट्रेलिया अपने कुछ स्टार खिलाड़ियों के बिना इस दौरे पर आई है. लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को हराना किसी भी परिस्थिति में आसान नहीं होता. बांग्लादेश ने सिर्फ सीरीज नहीं जीती, बल्कि दुनिया को यह संदेश दिया है कि अब उसे क्रिकेट की छोटी टीम समझने की गलती नहीं की जा सकती.