अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच एकमात्र टेस्ट मैच का चौथा दिन (गुरुवार) को खराब मौसम और बारिश के कारण रद्द कर दिया गया है. ग्रेटर नोएडा के शहीद विजय सिंह पथिक खेल परिसर में मौजूद स्टेडियम में खेल के पहले तीन दिन गीले आउटफील्ड के कारण एक भी गेंद फेंके बिना रद्द कर दिए गए, जिससे वेन्यू की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए. मौसम को देखते हुए मैच अधिकारियों ने गुरुवार को भी किसी भी तरह के खेल की संभावना को खारिज कर दिया है.
क्रिकइंफो की रिपोर्ट में बताया गया- बारिश ने एक बार फिर अफगानिस्तान-न्यूजीलैंड के बीच एकमात्र टेस्ट मैच के चौथे दिन अड़ंगा डाला. इस कारण मैच होना असंभव है. अब शुक्रवार सुबह एक बार फिर मैदान का निरीक्षण किया जाएगा इसके बाद आगे का फैसला किया जाएगा. अगर शुक्रवार को भी मैच में खेल संभव नहीं हो पाया तो लगभग 2500 टेस्ट मैचों के इतिहास में आठवां टेस्ट मैच होगा जो अब तक एक भी गेंद फेंके बिना रद्द हो जाएगा.
गुरुवार को अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड का बयान भी मैच को लेकर आया. इसमें कहा गया- अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड की टीमों के बीच एकमात्र टेस्ट मैच का चौथा दिन भी लगातार बारिश के कारण नहीं खेला जाएगा. अब कल सुबह 8:00 बजे खेल शुरू करने का निर्णय स्टेडियम के निरीक्षण के बाद होगा.
मैच खत्म होने के बाद रेफरी की रिपोर्ट का इंतजार
अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच लगातार टेस्ट मैच शुरू नहीं होने के बाद ग्रेटर नोएडा के शहीद विजय सिंह पथिक खेल परिसर के भविष्य का फैसला काफी हद तक मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा. स्टेडियम में इस तरह की खामियों का ठीकरा अकसर भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) पर फोड़ा जाता है लेकिन इस बार गड़बड़ी की पूरी जिम्मेदारी मेजबान अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड की है.
बीसीसीआई ने अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड को विकल्प के तौर पर बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम और कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम की पेशकश की थी, लेकिन अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों के इस स्थल से परिचित होने और कम खर्च जैसे मुद्दों को तरजीह देते हुए इस स्थल का चयन किया. अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) का मानना था कि दिल्ली और काबुल (तुलनात्मक रूप से) से ग्रेटर नोएडा की निकटता के कारण इसको चुना गया.
इस टेस्ट मैच में बीसीसीआई की कोई भूमिका नहीं है. यह वेन्यू पूरी तरह से अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड की पसंद थी और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मुहैया करानी थी.सूत्रों की मानें तो बीसीसीआई ने 2019 (विजय हजारे ट्रॉफी) के बाद से यहां अपने किसी भी घरेलू मुकाबले की मेजबानी नहीं की है. यहां की निम्न स्तरीय परिस्थितियों को देखते हुए निकट या दूर के भविष्य में किसी मैच की मेजबानी की संभावना ना के बराबर है.
ग्राउंड में नहीं हैं हैं इंटरनेशनल लेवल की सुविधाएं...
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्थल के लिए मानक प्रोटोकॉल का पालन करेगा, जहां मैच रेफरी की रिपोर्ट आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा. अब तक इस टेस्ट मैच में एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी. श्रीनाथ को मैदान की गीली आउटफील्ड का आकलन करना होगा, जहां जल निकासी अन्य अंतरराष्ट्रीय स्थलों की तरह नहीं है. आउटफील्ड बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त कवर के साथ मैदान से पानी सोखने के लिए सुपर सॉपर का भी स्टेडियम में अभाव है. पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित ग्राउंड स्टाफ की कमी ने इस स्थल की समस्याओं को और बढ़ा दी है.
नवंबर 2023 में लागू हुई आईसीसी ‘पिच और आउटफील्ड मॉनिटरिंग प्रक्रिया’ के अनुसार, ‘प्रत्येक मैच के बाद, मैच रेफरी (इस मामले में श्रीनाथ) पिच और आउटफील्ड रिपोर्ट से जुड़े फॉर्म को आईसीसी के सीनियर क्रिकेट संचालक के प्रबंधक को भेजेगा. ‘पिच और आउटफील्ड रिपोर्ट फॉर्म’ में मैच रेफरी के साथ अंपायरों और दोनों टीमों के कप्तानों के कमेंट भी शामिल होते हैं. ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यूजीलैंड के कप्तान टिम साउदी ने किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं.
इस रिपोर्ट के मिलने के 14 दिन के अंदर आईसीसी सीनियर क्रिकेट संचालक के प्रबंधक इसे मेजबान बोर्ड को भेजकर स्टेडियम पर लगाए गए डिमेरिट अंकों की जानकारी देते हैं. आईसीसी अनुच्छेद के अनुसार, ‘मैच रेफरी के पास अगर पिच और/या आउटफील्ड को असंतोषजनक या अनफिट रेटिंग देने का कारण है, तो मेजबान स्थल पर पिचों की रेटिंग के दिशा निर्देशों के अनुसार डिमेरिट अंक दिए जायेंगे.’ ये डिमेरिट अंक पांच साल तक प्रभावी रहते हैं.

टेंट हाउस से पंखा मंगाया, कवर भी किराए पर आए...
गीले आउटफील्ड के कारण पूरा दिन धुल जाने के बाद, ग्राउंड स्टाफ ने मिड-ऑन के पास दो से तीन फीट की खुदाई की. उन्होंने प्रभावित क्षेत्र पर सूखी मिट्टी और कृत्रिम घास लगाने की कोशिश की, लेकिन यह तैयार नहीं था. हद तो यह रही कि पूरा आउटफील्ड इंटरनेशनल क्रिकेट के लिए उपयुक्त नहीं दिख रहा है क्योंकि यह कीचड़ से भरा हुआ है. आजतक को जो जानकारी है, उसके मुताबिक- ग्राउंड स्टाफ में 20-25 सदस्य हैं और 15 आउटसोर्स हैं. मैदान में पांच सुपर सोपर हैं जिनमें दो ऑटोमैटिक और तीन मैनुअल हैं. यहां तक कि कवर और पंखा भी टेंट हाउस से किराए पर लिया गया था.
मैदानकर्मियों ने मैदान को सुखाने के लिए टेबल फैन का इस्तेमाल किया. आधुनिक सुविधाओं की कमी मैदान के बाहर तक फैली हुई थी जिससे पिच के बाहर के संचालन पर असर पड़ा. पीने के पानी की कमी, बिजली की आपूर्ति और महिला शौचालय तक की कमी दिखी.
WTC का हिस्सा नहीं है ग्रेटर नोएडा टेस्ट मैच...
हालांकि यह टेस्ट वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह आईसीसी से संबद्ध है. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा चलाए जा रहे इस स्टेडियम ने 2016 में गुलाबी गेंद के दलीप ट्रॉफी मैच की मेजबानी की थी. हालांकि कॉरपोरेट मैचों के दौरान मैच फिक्सिंग के कारण सितंबर 2017 में बीसीसीआई ने इसे प्रतिबंधित कर दिया था. तब से यहां बीसीसीआई से संबद्ध कोई भी मैच आयोजित नहीं किया गया है. स्टेडियम पहले अफगानिस्तान के लिए घरेलू मैदान के रूप में काम कर चुका है. हालांकि यह स्टेडियम उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के अंतर्गत नहीं आता है.