क्रिकेट इतिहास में कई रोमांचक मुकाबले हुए हैं, लेकिन कुछ मैच ऐसे भी रहे हैं जो खेल से ज्यादा अपने विवादों और अजीब हालात के लिए याद किए जाते हैं. ऐसा ही एक मुकाबला 22 मार्च 1992 को सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) में खेला गया, जो वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल था. उस मुकाबले ने क्रिकेट नियमों पर ही सवाल खड़े कर दिए.
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इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका के बीच खेले गए उस मुकाबले में सब कुछ शानदार फिनिश की ओर बढ़ रहा था. इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 45 ओवरों में 6 विकेट पर 252 रन बनाए. इंग्लिश टीम के लिए ग्राहम हिक ने बेहतरीन 83 रनों का योगदान दिया, जबकि डर्मोट रीव ने सिर्फ 14 गेंदों में नाबाद 25 रनों की तेज पारी खेलकर टीम को मजबूती दी.
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जवाब में साउथ अफ्रीका की टीम ने भी जबरदस्त टक्कर दी. भले ही कोई बल्लेबाज अर्धशतक नहीं बना सका, लेकिन टीम लगातार लक्ष्य की ओर बढ़ती रही. मैच डेथ ओवरों में पहुंच चुका था और रोमांच अपने चरम पर था. साउथ अफ्रीका को जीत के लिए 13 गेंदों में 22 रन चाहिए थे और हाथ में 4 विकेट थे. डेविड रिचर्डसन और ब्रायन मैकमिलन नॉटआउट बल्लेबाज थे.
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यह एक ऐसा समीकरण था, जिसे आसानी से हासिल किया जा सकता था. फैन्स को एक जबरदस्त फिनिश की उम्मीद थी, लेकिन तभी मौसम ने खेल बिगाड़ दिया. बारिश शुरू हुई और मैच रोकना पड़ा. खिलाड़ियों को मैदान से बाहर जाना पड़ा और स्टेडियम में मौजूद दर्शक बेचैनी से इंतजार करने लगे. करीब 10 मिनट बाद जब बारिश थमी और खेल दोबारा शुरू हुआ, तो सबको लगा कि मुकाबला वहीं से आगे बढ़ेगा. लेकिन स्कोरबोर्ड पर जो दिखा, उसने सब को चौंका दिया.
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अब साउथ अफ्रीका को 1 गेंद में 21 रन (स्कोरबोर्ड पर वैसे 22 रन दिखाए गए, जो गलत था) जीत के लिए बनाने थे. यानी कुछ ही मिनटों में 13 गेंदों में 22 रन का समीकरण बदलकर 1 गेंद में 21 रनों हो गया. यह किसी मजाक से कम नहीं था. इस स्थिति के पीछे उस समय लागू 'लोवेस्ट-स्कोरिंग-ओवर' रेन नियम था. इस नियम के तहत बारिश के बाद लक्ष्य तय करने के लिए पहले बैटिंग करने वाली टीम के सबसे कम रन वाले ओवरों को घटा दिया जाता था.
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नतीजा यह हुआ कि साउथ अफ्रीका के लिए अचानक लक्ष्य असंभव हो गया. साउथ अफ्रीका को मैच में 19 रनों से हार झेलनी पड़ी. इस पूरे विवाद में साउथ अफ्रीका की धीमी ओवर गति भी चर्चा में रही. टीम ने तय समय में केवल 45 ओवर ही पूरे किए थे, जिससे उसे अप्रत्यक्ष नुकसान हुआ. कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना था कि टीम की यही सुस्ती उसके लिए भारी पड़ गई और कहीं ना कहीं उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ा.
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इस अजीबोगरीब अंत के साथ इंग्लैंड ने मैच जीतकर फाइनल में जगह बना लिया. हालांकि, तीन दिन बाद फाइनल में इंग्लैंड को पाकिस्तान के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा. इमरान खान की कप्तानी में पाकिस्तान ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में हुए उस फाइनल को 22 रनों से जीता था.
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साउथ अफ्रीका-इंग्लैंड का वो मुकाबला आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे विवादित मैचों में गिना जाता है. इस घटना ने क्रिकेट के नियमों में बदलाव की जरूरत को उजागर किया और बाद में डीएलएस नियम लागू किए गए. लेकिन उस दिन सिडनी के मैदान पर एक शानदार मुकाबला नियमों और बारिश की भेंट चढ़ गया. साथ ही क्रिकेट इतिहास में हमेशा के लिए एक ‘अजीब किस्सा’ बनकर रह गया.
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