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दो महीने से हवा में जहर, घटते-बढ़ते रहे Grap के लेवल... आखिर पॉल्यूशन से जंग में कहां चूक रही दिल्ली?

दिल्ली में पिछले दो महीनों से हवा जहरीली बनी हुई है. AQI बार-बार 400-500 पार कर रहा है. वाहनों का धुआं. निर्माण की धूल. सर्दियों का इनवर्शन और पराली मुख्य कारण हैं. GRAP के नियम लागू होने के बावजूद सुधार नहीं है. बीजिंग व लंदन जैसे शहरों से सीखकर सख्त कानून, इलेक्ट्रिक वाहन और क्षेत्रीय सहयोग से प्रदूषण कम किया जा सकता है.

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दिल्ली का इंडिया गेट और कर्तव्य पथ दोनों स्मोग में घिरे हुए हैं. (Photo: PTI)
दिल्ली का इंडिया गेट और कर्तव्य पथ दोनों स्मोग में घिरे हुए हैं. (Photo: PTI)

दिल्ली और आसपास के इलाकों में पिछले दो महीनों से हवा जहरीली बनी हुई है. नवंबर से दिसंबर तक एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बार-बार 'सीवियर' (गंभीर) स्तर पर पहुंच रहा है. कभी थोड़ा सुधार होता है, तो कभी फिर बिगड़ जाता है. GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के नियम लागू होते हैं, फिर ढीले पड़ जाते हैं.

आखिर दिल्ली प्रदूषण की इस लड़ाई में कहां गलती कर रही है? और दुनिया के दूसरे शहरों से हम क्या सीख सकते हैं? आइए वैज्ञानिक तथ्यों और कारणों के साथ समझते हैं.

यह भी पढ़ें: धुंध, धुआं और खतरे में धड़कन... क्या दिल्ली-NCR अदृश्य महामारी की चपेट में है?

दिल्ली में प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं?

दिल्ली का प्रदूषण सिर्फ एक कारण से नहीं होता. कई स्रोत मिलकर हवा को जहरीला बनाते हैं. वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, मुख्य कारण ये हैं...

वाहनों का धुआं: दिल्ली में वाहनों की संख्या बहुत ज्यादा है. ये PM2.5 (2.5 माइक्रोन से छोटे कण) और NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड) छोड़ते हैं. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की रिपोर्ट कहती है कि सर्दियों में दैनिक प्रदूषण की बढ़ोतरी मुख्य रूप से ट्रैफिक से होती है. सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में प्रदूषण तेजी से बढ़ता है क्योंकि ठंडी हवा में ये गैसें फंस जाती हैं.

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Delhi Pollution Air Poison

पराली जलाना : पंजाब और हरियाणा में किसान धान की पराली जलाते हैं. इससे धुआं दिल्ली तक पहुंचता है. लेकिन इस साल बाढ़ की वजह से पराली जलाने की घटनाएं कम हुईं, फिर भी प्रदूषण नहीं घटा. अध्ययनों से पता चलता है कि नवंबर-दिसंबर में इसका योगदान 5-15% तक रहता है, लेकिन स्थानीय स्रोत ज्यादा जिम्मेदार हैं.

सर्दियों का मौसम और इनवर्शन: सर्दियों में तापमान गिरता है. हवा की गति कम हो जाती है और 'इनवर्शन लेयर' बन जाती है. इससे प्रदूषण वाले तत्व जमीन के पास फंस जाते हैं. वैज्ञानिक रूप से, ठंडी हवा नीचे और गर्म हवा ऊपर रहती है, जो प्रदूषण को फैलने नहीं देती. दिसंबर में AQI 400-500 तक पहुंचने का मुख्य कारण यही है.

अन्य स्रोत: निर्माण कार्य से धूल, इंडस्ट्री से धुआं, कचरा जलाना और कोयले/लकड़ी का इस्तेमाल. दिल्ली की भौगोलिक स्थिति (इंडो-गैंजेटिक प्लेन) भी प्रदूषण को ट्रैप करती है.

इस साल नवंबर में AQI 428 तक गया, दिसंबर में 13-15 तारीख को 450-500 के पार. 15 दिसंबर को कुछ जगहों पर AQI 600 से ऊपर दर्ज हुआ. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सीमा से 30 गुना ज्यादा PM2.5 दिल्ली की हवा में है, जो फेफड़ों में घुसकर बीमारियां पैदा करता है.

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GRAP क्यों काम नहीं कर रहा?

GRAP चार स्टेज में नियम लागू करता है...

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  • स्टेज 1: AQI 201-300 (धूल नियंत्रण, DG सेट पर रोक)
  • स्टेज 2: 301-400 (ऑफिस टाइमिंग बदलना)
  • स्टेज 3: 401-450 (कंस्ट्रक्शन बंद, पुराने वाहन रोक)
  • स्टेज 4: 450+ (ट्रक एंट्री बंद, स्कूल ऑनलाइन)

इस साल दिसंबर में स्टेज 3 और 4 लागू हुए, लेकिन प्रभाव कम. कारण...

  • GRAP रिएक्टिव है, यानी प्रदूषण बढ़ने के बाद नियम लगते हैं. लंबे समय की योजना नहीं.
  • लागू करने में कमी: नियम तोड़ने पर सजा कम, मॉनिटरिंग कमजोर.
  • सिर्फ सर्दियों पर फोकस, साल भर के स्रोतों पर कम ध्यान.
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि GRAP से अस्थायी राहत मिलती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं.

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दुनिया के दूसरे शहरों से क्या सीखें?

कई शहरों ने प्रदूषण पर काबू पाया. दिल्ली इनसे सीख सकती है...

  • बीजिंग (चीन): 2013 में बहुत प्रदूषित था. अब PM2.5 50% कम. कैसे? कोयले की जगह गैस, फैक्टरियां बंद/शिफ्ट, इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ाए, सख्त नियम और मॉनिटरिंग. राजनीतिक इच्छाशक्ति से तेज बदलाव.
  • लंदन (ब्रिटेन): 1952 के ग्रेट स्मॉग से सबक लिया. कोयला बैन, कंजेशन चार्ज (ट्रैफिक कम), पब्लिक ट्रांसपोर्ट बेहतर. अब हवा साफ.
  • लॉस एंजिल्स (अमेरिका): वाहनों से स्मॉग था. सख्त एमिशन स्टैंडर्ड, कैटेलिटिक कन्वर्टर अनिवार्य, इलेक्ट्रिक कारें.
  • मेक्सिको सिटी: पुराने वाहन स्क्रैप कर नए दिए, मेट्रो बढ़ाई, इंडस्ट्री पर नियंत्रण.
  • ये शहर बताते हैं कि जरूरत है: सख्त कानून, साल भर की योजना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ाना, क्षेत्रीय सहयोग (जैसे पंजाब-हरियाणा के साथ).

दिल्ली को GRAP से आगे सोचना होगा. इलेक्ट्रिक बसें बढ़ाना, पुराने वाहन हटाना, हरा-भरा करना और पड़ोसी राज्यों से मिलकर काम करना जरूरी. वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर सही कदम उठाए तो 5-10 साल में बड़ा सुधार जरूरी है. लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनता का सहयोग चाहिए.

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