भारत दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में शामिल है. लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने और नीतियां बनाने के बावजूद हवा साफ नहीं हो पा रही है. दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में PM2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सीमा से कई गुना ज्यादा बना हुआ है. Photo: India Today
नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) अब प्रदूषण का हॉटस्पॉट बन चुका है. स्विस कंपनी IQAir की विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 के अनुसार भारत दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश है. उत्तर प्रदेश का लोनी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जहां PM2.5 का स्तर 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया. Photo: PTI
इसके बाद बिर्निहाट और दिल्ली (99.6) का नंबर है. NCR के कई शहर - गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में शामिल हैं. दिल्ली अभी भी दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी शहरों में शुमार है. Photo: PTI
गाड़ियों का धुआं, कारखानों का प्रदूषण, निर्माण स्थलों की धूल और फसल जलाने का धुआं - ये सभी मिलकर हवा को जहरीला बना रहे हैं. सर्दियों में टेम्परेचर इन्वर्सन होने से प्रदूषक जमीन के पास फंस जाते हैं. दिसंबर 2025 में दिल्ली में PM2.5 का स्तर 44% बढ़ गया, जबकि आसपास के शहरों में 62% तक की बढ़ोतरी हुई. Photo: PTI
सरकार ने 2019 में नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम शुरू किया था, जिसका टारगेट 2026 तक प्रदूषण को 40% कम करना था. लेकिन फंड का इस्तेमाल सही दिशा में नहीं हो रहा है. कुल फंड का 67% से ज्यादा सड़क की धूल कम करने पर खर्च किया जा रहा है. बायोमास जलाने पर सिर्फ 11.47%, गाड़ियों के पॉल्यूशन पर 13.71% और इंडस्ट्रियल प्रदूषण पर 0.8% फंड गया है. सबसे खतरनाक PM2.5 के बजाय PM10 पर ध्यान दिया जा रहा है. Photo: PTI
दिल्ली को NCAP के तहत 80.65 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन फरवरी 2026 तक सिर्फ 15.74 करोड़ (19.35%) ही खर्च हुए. यानी ज्यादातर पैसा बिना इस्तेमाल के पड़ा रहा. कई अन्य शहरों में भी फंड का उपयोग बहुत कम हुआ है. कुछ शहरों ने 80-100% फंड खर्च कर दिया, लेकिन प्रदूषण नहीं घटा. Photo: PTI
IQAir World Air Quality Report 2025 ranks India as the sixth most polluted country globally, with Delhi continuing to be among the most polluted capital cities in the world.
— Down To Earth (@down2earthindia) March 31, 2026
Jyoti Kumari explains why India’s pollution crisis persists despite funds and policies… pic.twitter.com/y8CEl2UCh8
वहीं कुछ शहरों ने कम फंड इस्तेमाल करके भी अच्छे नतीजे दिखाए. इससे साफ है कि समस्या फंड की कमी नहीं, बल्कि सही योजना और क्रियान्वयन की है. नीतियां अच्छी हैं, लेकिन उन्हें जमीन पर लागू करने में बड़ी कमी है. केंद्र, राज्य और शहरों के बीच समन्वय नहीं है. Photo: PTI
प्रदूषण पूरे क्षेत्र का मुद्दा है, लेकिन हर शहर अलग काम कर रहा है. सर्दियों में फसल जलाना, दिल्ली में वाहन और निर्माण- ये सभी स्रोत एक-दूसरे से जुड़े हैं, लेकिन समाधान अलग-अलग हैं. NCAP के तहत अब तक 18,307 किलोमीटर सड़कें पक्की की गई हैं. 11,880 किलोमीटर सड़कें रोज मैकेनिकल स्वीपर से साफ की जा रही हैं. Photo: PTI
5,378 एकड़ से ज्यादा हरे क्षेत्र बढ़ाए गए हैं. 3926 इलेक्ट्रिक बसें और 759 EV चार्जिंग स्टेशन लगाए गए हैं. कचरा प्रबंधन भी सुधरा है. दिल्ली में भी कुछ काम हुए हैं, लेकिन ये प्रयास सर्दियों के प्रदूषण को रोकने में नाकाफी साबित हो रहे हैं. Photo: PTI
भारत में प्रदूषण की समस्या जागरूकता, नीति या फंड की कमी से नहीं है. असली समस्या कमजोर कार्रवाई, खराब योजना और समन्वय की कमी है. अब जरूरत है कि PM2.5 पर ज्यादा ध्यान दिया जाए. असली प्रदूषण सोर्स पर फोकस किया जाए. फंड का सही और समय पर उपयोग हो. नियमों का सख्ती से पालन हो. Photo: PTI