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Garud Puran: घर में पूर्वजों की तस्वीर कहां लगानी चाहिए? क्या कहता है गरुड़ पुराण

Garud Puran Vastu Rules: गरुड़ पुराण के अनुसार मृत परिजनों की तस्वीरें घर में कहां लगानी चाहिए और कहां नहीं? जानिए मंदिर, किचन और सीढ़ियों के पास फोटो लगाने के गंभीर नुकसान और सही दिशा.

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पितरों की तस्वीर ये है सही दिशा (Photo: ITG)
पितरों की तस्वीर ये है सही दिशा (Photo: ITG)

Garud Puran: कहते हैं, कहानियां सिर्फ शब्दों में नहीं होतीं हैं, तस्वीरों में भी होती हैं. खासकर उन लोगों की तस्वीरें, जो अब हमारे बीच नहीं हैं. जब कोई अपना इस दुनिया से चला जाता है, तो उसके जाने के बाद घर में सबसे ज्यादा जो चीज नजर आती है, वह है उसकी तस्वीर. कपड़े अलमारी में रख दिए जाते हैं, गहने तिजोरी में चले जाते हैं. लेकिन तस्वीरें दीवारों पर टंगी रह जाती हैं. और यही तस्वीरें हर दिन उस व्यक्ति की मौजूदगी का एहसास कराती रहती हैं.

दीवार पर लगी एक तस्वीर केवल एक फोटो नहीं होती है, वह एक याद, एक भावना और एक रिश्ता होती है. इसलिए लोग अपने प्रियजनों के जाने के बाद उनकी तस्वीरें घर के अलग-अलग हिस्सों में लगाते हैं. उन्हें लगता है कि ऐसा करना सम्मान और प्रेम का प्रतीक है.

तस्वीरें लगाने की सबसे सही और शुभ दिशा?

पूर्वजों की तस्वीरें हमेशा घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा की दीवार पर लगानी चाहिए. जब आप तस्वीर को दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर लगाते हैं, तो देखते समय पूर्वज का मुख उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा की ओर होता है. शास्त्रों में उत्तर और पूर्व दिशा को देवताओं और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा माना गया है. इस तरह तस्वीर लगाने से पितरों की कृपा बनी रहती है और घर में सुख-शांति आती है.

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कहां नहीं लगानी चाहिए मृत परिजनों की तस्वीर?

मंदिर
गरुड़ पुराण के मुताबिक, मृत व्यक्ति आदरणीय जरूर होते हैं, लेकिन उन्हें देवी-देवताओं के समान स्थान नहीं दिया जाता है. इसलिए पितरों की तस्वीरों को मंदिर में या भगवान की तस्वीरों के साथ रखना मर्यादा के विरुद्ध माना गया है.

सीढ़ियों के पास
घर की सीढ़ियों के पास, हर कमरे या बैठक के कोनों में मृतजनों की तस्वीरें लगाना वातावरण को भारी बना सकता है. जब एक ही व्यक्ति की कई तस्वीरें अलग-अलग जगहों पर लगी होती हैं, तो वह बार-बार उसी दुखद स्मृति को ताजा करती हैं. खासकर उन जगहों पर, जहां हम रोज ज्यादा समय बिताते हैं, ऐसी तस्वीरें मन को अतीत से बाहर नहीं निकलने देतीं.

जीवित व्यक्तियों के साथ 
कभी भी जीवित लोगों की तस्वीरों के साथ मृत परिजनों की तस्वीर फ्रेम कराकर न लगाएं. ऐसा करने से जीवित व्यक्तियों की आयु और सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

घर के बीचों-बीच (ब्रह्मस्थान) 
घर के केंद्र या मध्य भाग में पूर्वजों की तस्वीरें कभी नहीं टांगनी चाहिए. इससे घर के सदस्यों के सम्मान में कमी आती है.

रसोईघर (Kitchen) 
किचन में पूर्वजों या मृत परिजनों की तस्वीरें लगाने से घर में कलह और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है.

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तस्वीरें लगाते समय ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम

1. तस्वीर को दीवार पर लटकाने के बजाय किसी स्टैंड या शेल्फ पर रखना अधिक बेहतर माना जाता है.
2. घर के मुख्य द्वार पर या ऐसी जगह जहां आते-जाते हर बाहरी व्यक्ति की सीधी नजर पड़े, वहां तस्वीर न लगाएं.
3. कभी भी ऐसी तस्वीर न लगाएं जिसमें पूर्वज उदास, बीमार या कष्ट में दिख रहे हों. हमेशा मुस्कुराती हुई तस्वीर लगाएं.

क्या करना चाहिए?

पितरों की तस्वीरें हमेशा सीमित संख्या में रखें.
उनकी तस्वीर को सम्मानजनक स्थान दें.

तस्वीर लगाना संतुलन का है सही मार्ग

सनातन परंपरा तस्वीरों को हटाने की नहीं, बल्कि उन्हें सही स्थान और मर्यादा के साथ रखने की बात करती है. शास्त्रों का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि भावनाओं को संतुलित करना है. कुछ तस्वीरें प्रेरणा बनती हैं. लेकिन जब वही तस्वीरें इंसान को बार-बार खोए हुए कल से बांधने लगें, तो श्रद्धा नहीं, ठहराव शुरू हो जाता है. तस्वीरों का काम यादों को सम्मान देना है, न कि घर को बीते हुए समय में कैद कर देना. इसलिए अपने पितरों को दिल में रखें, वो भी मर्यादा के साथ.

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