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पितृपक्ष में पितरों का श्राद्ध करने से मिलते हैं ये 6 लाभ

हिंदू धर्म की मान्याताओं के अनुसार यमराज जी का कहना है कि श्राद्ध करने से इंसान को एक नहीं बल्कि छह लाभ मिलते हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

मनुष्यों का जैसे आहार अन्न है, पशुओं का आहार तृण है, वैसे ही पितरों का आहार अन्न का सारतत्व (गंध और रस) है. अत: वे अन्न व जल का सारतत्व ही ग्रहण करते हैं. शेष जो स्थूल वस्तु है, वह यहीं रह जाती है. हिंदू धर्म की मान्याताओं के अनुसार यमराज जी का कहना है कि श्राद्ध करने से इंसान को एक नहीं बल्कि छह लाभ मिलते हैं.

श्राद्ध करने से मिलने वाले लाभ

- श्राद्ध कर्म से मनुष्य की आयु बढ़ती है.-पितरगण मनुष्य को पुत्र प्रदान कर वंश का विस्तार करते हैं.

- पितरगण मनुष्य को पुत्र प्रदान कर वंश का विस्तार करते हैं.

- परिवार में धन-धान्य का अंबार लगा देते हैं.

- श्राद्ध कर्म मनुष्य के शरीर में बल-पौरुष की वृद्धि करता है और यश व पुष्टि प्रदान करता है.

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- पितरगण स्वास्थ्य, बल, श्रेय, धन-धान्य आदि सभी सुख, स्वर्ग व मोक्ष प्रदान करते हैं.

- श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने वाले के परिवार में कोई क्लेश नहीं रहता, वरन वह समस्त जगत को तृप्त कर देता है.

पितृपक्ष में पूर्वजों को याद करके पूजा-पाठ के अलावा दान-धर्म किया जाता है. इन दिनों ग्रहों की शांति के लिए दान-पुण्य और पूजा पाठ किए जाते हैं, ताकि हम पर पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहे. इस बार पितृपक्ष 13 सितंबर से शुरू हुए थे जो कि 28 सितंबर तक चलेंगे. इस दौरान कुल 16 श्राद्ध किए जाने हैं. पितृपक्ष और पिंडदान के समय थोड़ी सी लापरवाही आपके पूरे दान-पुण्य पर पानी फेर सकती है. इसलिए पूजा-पाठ और दान-पुण्य के तरीकों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए.

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