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कुंडली का शंख योग कितना शुभ? चुनौती का सामना करने से नहीं डरते ऐसे लोग

जब जन्म कुंडली में पंचम और षष्ठ भाव के स्वामी परस्पर केंद्र संबंध में हों या एक साथ केन्द्र या त्रिकोण में बैठे हो और साथ में लग्नेश बलवान हो, तब शंख योग का निर्माण होता है. लेकिन सिर्फ शंख योग का बनना ही पर्याप्त नहीं माना जाता है. यदि योग बनाने वाले ग्रह नीच राशि में हों, पाप ग्रहों से पीड़ित हों या अत्यधिक कमजोर हों, तो इसके फल कम हो सकते हैं.

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यह कोई राजयोग नहीं है, लेकिन जीवन की चुनौतियों पर जीत हासिल कराने वाला योग है. (Photo: ITG)
यह कोई राजयोग नहीं है, लेकिन जीवन की चुनौतियों पर जीत हासिल कराने वाला योग है. (Photo: ITG)

यदि आपकी कुण्डली में शंख योग है तो आप चुनौतियों और परेशानियों से डरने के बजाय उनका सामना करने वाले व्यक्ति हैं. जीवन में चुनौती तो हर व्यक्ति के जीवन में आती हैं. लेकिन अपने बुद्धि विवेक से हर चुनौती का सामना ही नहीं बल्कि उन पर विजय प्राप्त करने वाला भी होता है. यह कोई राजयोग नहीं है, लेकिन जीवन की चुनौतियों पर जीत हासिल कराने वाला योग है. राज योग या धन योग की तरह शंख योग को एक महत्वपूर्ण और शुभ योग माना जाता है. यह योग व्यक्ति को सम्मान, विद्वत्ता, नैतिकता और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करने वाला माना गया है. 

शंख योग कैसे बनता है?
जब जन्म कुंडली में पंचम और षष्ठ भाव के स्वामी परस्पर केंद्र संबंध में हों या एक साथ केन्द्र या त्रिकोण में बैठे हो और साथ में लग्नेश बलवान हो, तब शंख योग का निर्माण होता है. दूसरी स्थिति में लग्नेश और दशम भाव का स्वामी चर राशि यानि मेष, कर्क, तुला या मकर राशि में हो और नवम भाव का स्वामी बलवान हो तो भी शंख योग का निर्माण होता है. दोनों की स्थिति में लग्नेश का बलवान होना आवश्यक है. यानि आपके लग्न का स्वामी किसी भी पाप प्रभाव या नीच राशि में न हो. 

शंख योग के प्रमुख प्रभाव
उच्च शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करने की क्षमता.
धार्मिक एवं नैतिक मूल्यों के प्रति झुकाव.
समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा.
प्रशासनिक या प्रबंधन संबंधी कार्यों में सफलता.
मधुर वाणी और प्रभावशाली व्यक्तित्व.
आर्थिक स्थिरता तथा जीवन में क्रमिक प्रगति.
ऐसे व्यक्ति अक्सर न्यायप्रिय, अनुशासित और समाजहित के कार्यों में रुचि रखने वाले होते हैं.

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किन कारणों से कम हो सकता है शंख योग का प्रभाव?
केवल शंख योग का बनना ही पर्याप्त नहीं माना जाता है. यदि योग बनाने वाले ग्रह नीच राशि में हों, पाप ग्रहों से पीड़ित हों या अत्यधिक कमजोर हों, तो इसके फल कम हो सकते हैं. इसी प्रकार दशा-अंतर्दशा और गोचर का भी परिणामों पर प्रभाव पड़ता है. 

आधुनिक समय में कैसे उपयोगी है शंख योग
शंख योग को केवल धन या पद प्राप्ति से नहीं, बल्कि इसे व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक प्रभाव के संकेतक के रूप में भी देखते हैं. शिक्षा, प्रशासन, कानून, अध्यापन, शोध और सार्वजनिक जीवन से जुड़े क्षेत्रों में यह योग विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है. किसी भी योग का प्रभाव व्यक्ति के कर्म, शिक्षा, सामाजिक वातावरण और अवसरों के साथ मिलकर प्रकट होता है. इसलिए शंख योग को सफलता की गारंटी नहीं, बल्कि संभावनाओं का संकेत माना जाना चाहिए. यदि कुंडली में यह योग मजबूत हो और व्यक्ति निरंतर प्रयास करे, तो उसे जीवन में सम्मानजनक उपलब्धियां प्राप्त हो सकती हैं. यह ज्ञान, नैतिकता, सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक समझा जाता है. हालांकि इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन पूरी जन्म कुंडली, ग्रह बल, दशा और गोचर के समग्र अध्ययन के बाद ही किया जाना चाहिए.

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