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Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति का क्या है पौराणिक महत्व? इसी दिन भीष्म पितामह ने त्यागी थी देह

Makar Sankranti 2022: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति काफी महत्व है. इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं. मान्यता है कि इसी दिन से वसंत ऋतु की भी शुरुआत होती है. वैसे मकर संक्रांति का महाभारत से भी गहरा संबंध है. भीष्म पितामह 58 दिनों तक बाणों की शैया पर रहे, लेकिन अपना शरीर नहीं त्यागा क्योंकि वे चाहते थे कि जिस दिन सूर्य उत्तरायण होगा तभी वे अपने प्राणों का त्याग करेंगे.

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भीष्म पितामह भीष्म पितामह
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 58 दिनों तक बाणों की शैया पर रहे भीष्म पितामह
  • पितामह ने किया था सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार
  • भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था

Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी को मनाई जाएगी. इस दिन सूर्य देव राशि परिवर्तन करके मकर राशि में गोचर करेंगे. ज्योतिष के अनुसार सूर्य का राशि परिवर्तन बहुत खास होता है. सूर्य को सभी राशियों का राजा माना जाता है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य के गोचर से जहां खरमास खत्म हो जाएगा, वहीं वसंत ऋतु के आगमन का भी संकेत मिलता है. मकर संक्रांति का अद्भुत जुड़ाव महाभारत काल से भी है.  58 दिनों तक बाणों की शैया पर रहने के बाद भीष्म पितामह ने अपने प्राणों का त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था. यहां पढ़ें पौराणिक कथा.

ये है कथा 
18 दिन तक चले महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह ने 10 दिन तक कौरवों की ओर से युद्ध लड़ा. रणभूमि में पितामह के युद्ध कौशल से पांडव व्याकुल थे. बाद में पांडवों ने शिखंडी की मदद से भीष्म को धनुष छोड़ने पर मजबूर किया और फिर अर्जुन ने एक के बाद एक कई बाण मारकर उन्हें धरती पर गिरा दिया. चूंकि भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था. इसलिए अर्जुन के बाणों से बुरी तरह चोट खाने के बावजूद वे जीवित रहे. भीष्म पितामह ने ये प्रण ले रखा था कि जब तक हस्तिनापुर सभी ओर से सुरक्षित नहीं हो जाता, वे प्राण नहीं देंगे. साथ ही पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तारायण होने का भी इंतेजार किया, क्योंकि इस दिन प्राण त्यागने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. 

भगवान श्रीकृष्ण ने बताया महत्व 
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी उत्तरायण का महत्व बताते हुए कहा है कि 6 माह के शुभ काल में जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और धरती प्रकाशमयी होती है, उस समय शरीर त्यागने वाले व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता है. ऐसे लोग सीधे ब्रह्म को प्राप्त होते हैं, यानी उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि भीष्म पितामह ने शरीर त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने तक का इंतजार किया.

मकर संक्रांति मुहूर्त (Makar Sankranti Shubh Muhurat)
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि मुहूर्त चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार मकर संक्रांति का पुण्यकाल मुहूर्त सूर्य के संक्रांति समय से 16 घटी पहले और 16 घटी बाद का पुण्यकाल होता है. इस बार पुण्यकाल 14 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से शुरू हो जाएगा, जो शाम को 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. इसमें स्नान, दान, जाप कर सकते हैं. वहीं स्थिर लग्न यानि समझें तो महापुण्य काल मुहूर्त 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. इसके बाद दोपहर 1 बजकर 32 मिनट से 3 बजकर 28 मिनट तक मुहूर्त रहेगा.


 

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