Hindu Dharam: सनातन परंपरा और पौराणिक ग्रंथों, विशेषकर श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण में चार युगों का वर्णन मिलता है, जिनमें कलयुग को सबसे अंतिम और संक्रमण काल माना गया है. हजारों साल पहले ऋषि-मुनियों ने कलयुग के चरम पर पहुंचने को लेकर कई ऐसी चौंकाने वाली भविष्यवाणियां की थीं, जो आज के आधुनिक समाज, गिरते नैतिक मूल्यों और बदलती जीवनशैली में बिल्कुल सटीक बैठती दिखती हैं.
ग्रंथों के अनुसार, कलयुग केवल समय का चक्र नहीं है, बल्कि यह मानवीय चेतना, धर्म और प्रकृति के पतन का दौर है. वहीं इन भविष्यवाणियों के लिए भविष्य मालिका आजकल काफी चर्चा में बनी हुई है, जो कि करीब 500 साल पहले संत अच्युतानंद दास ने लिखी थी. बताया जाता है कि उन्होंने भविष्य पर लगभग 300 से ज्यादा ग्रंथ तैयार किए थे, जिन्हें अच्युतानंद मालिका भी कहा जाता है. ये अलग-अलग किताबें ओडिशा के जगन्नाथ पुरी से जुड़े मंदिरों, मठों और संतों के पास सुरक्षित मानी जाती हैं.
इन ग्रंथों में दुनिया के भविष्य को लेकर कई चरणों का जिक्र मिलता है. उनके अनुसार सबसे पहले कलयुग का अंत होगा, उसके बाद एक बड़े विनाश का समय आएगा, और अंत में एक नए युग की शुरुआत होगी. तो आइए जानते हैं भविष्यमालिका में दर्ज उन प्रमुख भविष्यवाणियों के बारे में, जो आज हमारे सामने हकीकत बनकर खड़ी हैं.
क्या होगा कलयुग के अंत में?
भविष्यमालिका में बताया गया है कि समय के साथ धरती पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. जैसे-जैसे कलयुग अपने अंत की ओर बढ़ेगा, वैसे-वैसे प्रकृति में बदलाव और आपदाएं बढ़ सकती हैं. कहीं बाढ़ तो कहीं अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण पुराने शहर और गांव दोबारा सामने आने की बातें भी कही गई हैं.
इन भविष्यवाणियों में यह भी संकेत मिलता है कि कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थान जैसे केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और अमरनाथ जैसे तीर्थ धीरे-धीरे लुप्त हो सकते हैं. इसे एक बड़े परिवर्तन या विनाश का संकेत माना गया है, जो कलयुग के अंत की ओर इशारा करता है.
कहा जाता है कि जब अधर्म बढ़ेगा और प्रकृति असंतुलित होगी, तब कई प्राचीन मंदिर और देवस्थान या तो खत्म हो जाएंगे या अस्तित्व के खतरे में आ जाएंगे. इसके पीछे धरती का बढ़ता तापमान और प्राकृतिक परिवर्तन को कारण बताया गया है.
आगे चलकर एक बड़े युद्ध का भी जिक्र मिलता है, जिसे धर्म और अधर्म के बीच होने वाला संघर्ष बताया गया है. मान्यता है कि इस समय भगवान कल्कि प्रकट होंगे और धर्म की स्थापना करेंगे. उनके साथ वे लोग भी होंगे, जो पहले के युगों में अधूरे कार्य छोड़ चुके हैं.
इन सब घटनाओं से पहले धरती पर कुछ ऐसे संकेत दिखाई देने की बात कही गई है, जिनमें पुराने समय के चिन्ह और बहुत प्राचीन अवशेष सामने आ सकते हैं. यह समय एक बड़े बदलाव और नए युग की शुरुआत का संकेत माना जाता है.
बढ़ जाएगा अधर्म
ढोंगी और पाखंडी गुरुओं का बोलबाला
भविष्यमालिका में साफ लिखा है कि कलयुग में ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ेगा जो शास्त्रों का ज्ञान न होने पर भी खुद को बड़ा ज्ञानी या संत घोषित कर देंगे. वे केवल धन कमाने और मान-सम्मान पाने के लिए धर्म का चोगा ओढ़ेंगे. आज आए दिन ऐसे फर्जी और खुद को भगवान बताने वाले बाबाओं के मामले सामने आते हैं, जो लोगों की आस्था का फायदा उठाकर उन्हें ठगते हैं और अधर्म फैलाते हैं.
अन्न की कमी और शुद्धता का खत्म होना
कलयुग के चरम पर पहुंचने पर भूमि से अनाज पैदा होना बहुत कम हो जाएगा. जो अन्न या फल उगेगा भी, उसमें न तो स्वाद रहेगा और न ही पोषण. गायें दूध देना बंद या बहुत कम कर देंगी. आज केमिकल फर्टिलाइजर्स, पेस्टिसाइड्स और मिलावट के कारण भोजन की शुद्धता खत्म हो चुकी है. जमीन की उपजाऊ शक्ति घट रही है और शुद्ध खान-पान एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है.
शासक वर्ग द्वारा जनता का शोषण
कलयुग के राजा (शासक) जनता की रक्षा करने वाले नहीं, बल्कि उन पर भारी टैक्स (कर) लगाकर उनका शोषण करने वाले होंगे. सत्ता में बैठे लोग प्रजा के कल्याण की जगह अपनी तिजोरियां भरने में लगे रहेंगे. दुनिया के कई देशों में राजनीतिक भ्रष्टाचार, जनता पर महंगाई का बोझ और नेताओं का आम जनता की समस्याओं से दूर होना इसी बात का संकेत है.
हालांकि, कलयुग को सबसे अंधकारमय युग कहा गया है, लेकिन शास्त्रों में इसका एक सकारात्मक पहलू भी बताया गया है. महर्षि व्यास के अनुसार, 'जो पुण्य सतयुग में कठिन तपस्या और त्रेता-द्वापर में बड़े-बड़े यज्ञों से मिलता था, वह कलयुग में केवल सच्चे मन से नाम सुमिरन (ईश्वर का नाम लेने) और सत्कर्म करने से ही प्राप्त हो जाता है. यानी इस कठिन दौर में भी इंसान के पास खुद को बचाने का रास्ता मौजूद है.'