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धर्म की ख़बरें

Dussehra 2026: देश में दशहरे का जश्न, पर इस गांव में महिषासुर का शोक मना रहे लोग

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दशहरे पर जब हर जगह भक्ति, हर्ष और उल्लास का माहौल है, तब झारखंड के लातेहार में रहने वाली असुर जनजाति के लोग शोक मनाते हैं. इनका कहना है कि महिषासुर महिलाओं पर हथियार नहीं उठाते थे. इसलिए देवी दुर्गा को आगे कर उनको छल से मारा गया था. इस गांव में रावण को पूर्वज मानकर उसकी पूजा भी की जाती है.

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लातेहार जिले में असुर जनजाति का दो दिवसीय शोक पर्व शुरू हो गया है. इस समुदाय के लोगों ने बताया कि वे महिषासुर को अपना पूर्वज और जमीन का राजा मानते हैं. इसलिए दुर्गा पूजा में शामिल न होकर शोक मनाते हैं.

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इस गांव के लोग खुद को भैंसासुर का वंशज मानते हैं. इसलिए इन्हें असुर या असुर समुदाय का कहा जाता है. दुर्गा पूजा के दिन नवमी तिथि को भैंसासुर को मारा जाता है. इसके बाद ये लोग नवमी और दशमी तिथि को शोक मनाते हैं.

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इस समुदाय के लोगों का कहना है कि शोक बिल्कुल वैसे ही मनाया जाता है, जैसे कोई आदमी मर गया हो. विसर्जन के बाद ही यह शोक खत्म होता है. इस समुदाय के लोग विसर्जन में भी शामिल नहीं होते हैं. इस दौरान खान-पान में परहेज करते हैं. छोटे बच्चे थोड़ा-बहुत खा लेते हैं, लेकिन बड़े लोग मांस-मछली नहीं खाते हैं.

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शोक दिवस के समय ये लोग सादा भोजन ही करते हैं. फिर विजयदशमी के बाद ही इनका खान-पान शुरू होता है. इनका कहना है कि यह हमारे कुल, समुदाय में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और आज हम आज भी इस परंपरा को निभा रहे हैं.

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