मां बगलामुखी को शत्रु नाशिनी, स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री तथा तांत्रिक परंपरा की परम देवी के रूप में पूजित किया जाता है. उनकी आरती के माध्यम से साधक न केवल उनका स्मरण करता है, बल्कि श्रद्धा और भक्ति के साथ उन्हें हृदय से आमंत्रित करता है. यह साधना जीवन में व्याप्त भय, बाधा और नकारात्मकता को दूर करने की प्रार्थना का भी माध्यम बनती है.
जय जय श्री बगलामुखी माता,आरति करहुँ तुम्हारी ।
पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छबि न्यारी ॥
कर-कमलों में मुद्गर धारै,अस्तुति करहिं सकल नर-नारी ॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..
चम्पक माल गले लहरावे, सुर नर मुनि जय जयति उचारी ॥
त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब,भक्ति सदा तव है सुखकारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..
पालत हरत सृजत तुम जग को,सब जीवन की हो रखवारी ॥
मोह निशा में भ्रमत सकल जन,करहु हृदय महँ, तुम उजियारी ॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..
तिमिर नशावहु ज्ञान बढ़ावहु, अम्बे तुमही हो असुरारी ॥
सन्तन को सुख देत सदा ही, सब जन की तुम प्राण पियारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता..
तव चरणन जो ध्यान लगावै, ताको हो सब भव-भयहारी ॥
प्रेम सहित जो करहिं आरती, ते नर मोक्षधाम अधिकारी ॥
जय जय श्री बगलामुखी माता...
बगलामुखी की आरती, पढ़ै सुनै जो कोय ।
विनती कुलपति मिश्र की, सुख-सम्पति सब होय ॥
-------समाप्त-------