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काल-भैरव जी की आरती

काल-भैरव जी की आरती

भगवान काल भैरव की आरती भय और शत्रुओं से रक्षा करने वाली मानी जाती है. भैरव बाबा की सच्चे मन से आराधना करने पर जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं. मान्यता है कि अगर भक्त को मनोवांछित फल पाने की इच्छा हो तो उन्हें सच्चे मन से श्री काल भैरव की पूजा करने के बाद आरती करनी चाहिए.

काल-भैरव जी की आरती
काल-भैरव जी की आरती

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।

जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।
जय भैरव देवा

 

तुम्हीं पाप उद्धारक दु:ख सिंधु तारक।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।
जय भैरव देवा

 

वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी।
महीमा अमित तुम्हारी जय जय भयकारी।।
जय भैरव देवा

 

तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे।
चौमुख दीपक दर्शन दु:ख सगरे खोंवे।।
जय भैरव देवा

 

तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी।
कृपा करिये भैरव करिये नहीं देरी।।
जय भैरव देवा

 

पांव घुंघरु बाजत अरु डमरु डमकावत।
बटुकनाथ बन बालक जन मन हरषावत।।
जय भैरव देवा

 

बथुकनाथ की आरती जो कोई नर गावे।
कहें धरणी धर नर मनवांछित फल पावे।।

 

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।
जय भैरव देवा

 

-------समाप्त------

समाप्त

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