यूपी में प्रतीकों की राजनीति पर प्रहार है. फिर परंपरा और तुष्टिकरण के बीच टकराव है...और फिर सत्ता की सीढ़ियों पर संघर्ष है. यूपी की सियासत में टोटी अब नल का पुर्जा नहीं...नैरेटिव का नश्तर बन चुकी है. और राम मंदिर...सिर्फ श्रद्धा का केंद्र नहीं...सियासी शक्ति का शिखर बन चुका है. कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार के आरोप जैसे मुद्दे भी सिर चढ़कर बोल रहे हैं. इन्हीं मुद्दों पर सीएम योगी और अखिलेश यादव में क्लेश बढ़ गया है. 2027 के लिए 2017 के मुद्दे तराशे जा रहे हैं. देखें दंगल.