पार्ट 1: कैंपेन, मिले-जुले इमोशंस वाला
ये किसी की कल्पना में नहीं था. किसी ने भी नहीं, सिवाय डोनाल्ड ट्रंप के.
“उन्होंने मुझसे ये दो बार छीना है. दो बार! और जानते हो क्या, मैं कुछ सोच रहा हूं. सीरियस थिंकिंग. बेस्ट थिंकिंग. किसी ने इतना न सोचा होगा. और मैंने तय किया है कि अमेरिका मुझे डिज़र्व नहीं करता.” 2028 के वसंत में फ्लोरिडा की एक रैली में वो बोल रहे थे तो उनका चेहरा धूप में फैंटा की बोतल जैसा हो चुका था.
भीड़ हूट कर रही थी, और वो उनकी तरफ अंगुली से मंजूरीभरा इशारा.
“वे तीसरी बार मुझे राष्ट्रपति बनने रोक रहे हैं. संविधान की आड़ लेकर कह रहे हैं कि ऐसा नहीं हो सकता. एहसान फरामोश. मैं कहूंगा- बहुत घटिया”, वे कहकर थोड़ा रुके. तो भीड़ ने दोहराया दिया- “बहुत घटिया”. और फिर खामोशी छा गई.

“तो मैं वेनेजुएला जा रहा हूं. ग्रेट कंट्री. ब्यूटीफुल पीपुल. वे मुझे वहां प्यार करते हैं. जानते हो, मैं एक बार एक वेनेजुएलन से मिला था… जबरदस्त आदमी, बहुत हैंडसम… थोड़ा-सा मेरी तरह… उसने कहा, सर, कराकास में लोग आपकी पूजा करते हैं. सोने से पहले आपका नाम लेते हैं.”
तीन महीने बाद, वे कराकास में लैंड हुए. एक ऐसे विमान से जिस पर अभी भी ट्रंप टॉवर के स्टिकर लगे थे. बाकी सब मिलानिया ले जा चुकी थीं. घर, गोल्फ कोर्स, मोनोग्राम वाले तौलिये तक. एपस्टीन फाइल्स की गंदगी से छुटकारा पाने के लिए मिलानिया ने सारा मलबा ट्रंप की ओर धकेल दिया था. “हॉर्मुज़” डिजास्टर के बाद ट्रंप पहले ही राजनीतिक रूप से सबसे कमजोर हालत में थे.
तलाक चुपचाप हुआ. इतनी सफाई से कि सिर्फ एक बेहद मोटिवेटेड स्लोवेनियाई महिला का वकील ही ऐसा करवा सकता था. मार-ए-लागो अब मेलानिया का स्पा और वेलनेस रिट्रीट बन चुका था. वहां दिए जा रहे सिग्नेचर ट्रीटमेंट का नाम था- “द लिबरेशन”. 400 डॉलर में दी जा रही थी लंबी मसाज, बिना ट्रंप का जिक्र किए.
कुछ ही समय बाद स्टॉर्मी डेनियल्स वहां आ बसी. कहती है कि उसे हमेशा से वॉशिंगटन पसंद था. वो अब वेनेजुएला की फर्स्ट लेडी बनने जा रही थी.
पार्ट 2 : नए प्रेसिडेंट का स्वागत नहीं करोगे
2027 में वेनेजुएला के राजनीतिक हालात पूरी तरह से गड्मगड थे. चार गुट सत्ता की दावेदारी कर रहे थे. दो जनरलों के पास अपनी सेना थी, लेकिन सरकार नहीं. देश में एक सरकार थी जिसके पास सेना नहीं थी. और इन सबके बीच थी एक फोटोजेनिक विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो. जो वर्षों से तानाशाही के खिलाफ लड़ रही थी. सिर्फ नैतिक स्पष्टता और अद्भुत आत्मविश्वास के दम पर. जीत के बावजूद उन्हें इतनी बार सत्ता से वंचित रखा गया कि इंटरनेशनल कम्युनिटी के पास विरोध जताने के लिए शब्द ही खत्म हो गए.
इसी खोखले खालीपन के बीच ट्रंप आए. कैमरों की खातिर विमान की सीढ़ियों से हौले-हौले उतरे.
उनका दावा था कि तीन हफ्तों में स्पेनिश सीख चुके हैं.
“लैंग्वेजेज़ में मैं हमेशा से बेस्ट रहा हूं,” ट्रंप ने प्रेस से कहा. “मुझे वर्ड्स पता हैं. सबसे अच्छे वर्ड्स पता हैं. कई भाषाओं में. स्पेनिश इज़ ब्यूटीफुल. वेरी रोमांटिक लैंग्वेज. लगभग अंग्रेज़ी जितनी. जिसे मैं बहुत खूबसूरती से बोलता हूं.”
फिर उन्होंने भीड़ को संबोधित किया. उसी लैंग्वेज में, जिसे वे “फरफेक्ट, बिल्कुल एरर फ्री स्पेनिश” बता रहे थे:

किसी ने धीरे से ट्रंप को वो बताया जो उन्होंने अभी कहा: “आपने मुझे बहुत फेमस बना दिया है.”
वे बोले, “यही तो मेरा मतलब था, वे मुझे फेमस बना रहे हैं. बहुत मशहूर. मैं यहां चार मिनट से हूं.”
उन्हें वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई. एक ऐसे समारोह में जिसे वहां की सुप्रीम इलेक्टोरल काउंसिल ने पूरी तरह वैध बताया और दुनिया की बाकी सभी संस्थाओं ने पूरी तरह मज़ाक. उनकी कमर पर बांधा जाने वाला पट्टा छोटा पड़ गया. स्टाफ ने नाप गलत ले लिया था. फिर भी उन्होंने उसे पहना. थोड़ा टेढ़ा करके.
उनका शपथ भाषण दो घंटे चालीस मिनट चला. तीन भाषाओं में. और तीनों में कहीं भी पूरी तरह सही नहीं.
पार्ट 3: बंकर का फील्ड मार्शल
सिक्योरिटी को लेकर पहले ही दिन से उनके सिर पर जुनून सवार था.
ट्रंप ने कुछ सबक सीख लिए थे.
पहला: भीड़ पलट सकती है.
दूसरा: स्पेशल फोर्सेज सचमुच में होती हैं.
और तीसरा सबक: माहौल के लिहाज से कराकास, मार-ए-लागो नहीं है.
समाधान आए दो फोन कॉल के रूप में.
पहला फोन मार्को रोबियो को किया गया, जो अब क्यूबा के राष्ट्रपति थे. 2026 में आखिरी कास्त्रो समर्थक की मौत के बाद क्यूबा ने अपना असाधारण बदलाव देखा था. रूबियो अपने माता-पिता की जन्मभूमि वाले आइलैंड पर लौटे थे. प्रवासियों वाला इमोशन समेटे, अमेरिकी फंडिंग और एक ऐसी मुस्कान के साथ जो किसी साफ मौसम में फ्लोरिडा के तट से भी दिखाई दे जाए. क्यूबा अब टेक्निकली लोकतंत्र बन गया था. और रूबियो भी टेक्निकली उसके राष्ट्रपति था. और अब टेक्निकली क्यूबा के पास अब आर्मी थी अच्छी तरह ट्रेंड कमांडो वाली. जिन्हें बस काम की जरूरत थी.
ट्रंप ने कहा, “मार्को, मुझे तुम्हारे लोग चाहिए.”
“कितने?”
“सारे के सारे.”
रूबियो ने दो सौ भेजे. वे बिना किसी निशान वाले साधन से पहुंचे. और कराकास के प्रेसिडेंट पैलेस के चारों ओर ऐसा सुरक्षा घेरा बना दिया. जो किसी भी आकलन से व्हाइट हाउस के घेरे से भी ज्यादा मजबूत था. फायर के ओवरलैपिंग एंगल, सेंसर सिस्टम, तीन परतों वाला अलर्ट. सब चाकचौबंद.
लेकिन सबसे अंदर की सुरक्षा. सबसे भीतरी घेरे की जिम्मेदारी एक ऐसे आदमी को दी गई जो अलग से, बिना किसी शोर-शराबे के, इस्तांबुल से एक निजी फलाइट से पहुंचा था.
फील्ड मार्शल आसिम मुनीर.

पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख, जो एक तख्तापलट, दो अदालती मामलों, एक शर्मनाक जंग और ईरान में मध्यस्थता के दौर से गुजर चुके थे, और थोड़ा वक्त नजरबंदी भी झेल चुके थे. लेकिन, इन सब के बावजूद वे कमजोर नहीं, बल्कि प्रमोट हुए. राष्ट्रपति के आदेश से उन्हें आजीवन फील्ड मार्शल बना दिया गया था, हालांकि इतिहासकार अब भी बहस कर रहे थे कि यह आदेश किस राष्ट्रपति ने दिया था. अब वे उपलब्ध थे. जैसा कि उनके सहायक ने कहा, बतौर “सीनियर स्ट्रैटिजिक सिक्योरिटी कंसल्टेंसी” के रूप में.
ट्रंप ने उन्हें खुद फोन किया था.
“आसिम. बेबी. मेरे फेवरेट फील्ड मार्शल. तुम सबसे बेस्ट हो. तुम्हे पता है न कि तुम सबसे बेस्ट हो? सिक्योरिटी के बारे में तुमसे ज्यादा कोई नहीं जानता. पाकिस्तान, जबर्दस्त सिक्योरिटी हिस्ट्री. मैं हमेशा पाकिस्तान का बड़ा फैन रहा हूं, ह्यूज फैन. लोगों को ये पता नहीं है.”
मुनीर चुपचाप सुनते रहे. वह चुप रहने में माहिर थे. यह हुनर उन्होंने सेना में सीखा था. और यह एक ऐसी चीज थी जिसे उनसे कोई छीन नहीं सकता था.
“मैं आऊंगा,” उन्होंने कहा.
वो आए. उन्होंने पैलेस का जायजा लिया. 48 घंटों के भीतर उन्होंने पूरी सुरक्षा व्यवस्था को फिर से डिजाइन कर दिया. वे बारीकियों पर ध्यान दे रहे थे. एकदम प्रोफेशनल. चेहरे पर कोई भाव नहीं. स्टॉर्मी डेनियल्स से वे हर सुबह नाश्ते पर मिलते थे. लेकिन उनका रिश्ता ऐसा था जिसमें बिना कुछ कहे दोनों ने एक-दूसरे के अस्तित्व को नकार दिया हो.
ट्रंप उन्हें “अपना स्पेशल जनरल” कहते थे. मुनीर ने भी उन्हें कभी फील्ड मार्शल और जनरल के बीच के फर्क को लेकर करेक्ट नहीं किया. लेकिन अंदर ही अंदर, आसिम मुनीर एक बहुत लंबा गणित साध रहे थे.
पार्ट 4: टेड क्रूज़ का फोन कॉल
अब अमेरिका का नया राष्ट्रपति वो व्यक्ति था जिसने अपने जीवन के करीब दो दशक डोनाल्ड ट्रंप से हारते हुए बिताए थे. और आखिरकार, समय चक्र ने साथ दिया और वो ट्रंप की गैरमौजूदगी में जीत गया.
राष्ट्रपति टेड क्रूज.
उनकी दाढ़ी थी. जी हां, उन्होंने दाढ़ी रखी हुई थी. सलाहकारों ने तो कहा था कि दाढ़ी राष्ट्रपति को शोभा नहीं देती. टेड ने उन्हें शांत भाव से सुना. ये वो शख्स था जो दुनिया के सबसे मशहूर इंसान द्वारा सबके सामने Lyin’ Ted कहे जाने के बावजूद सर्वाइव कर गया हो. क्रूज जो 'झूठा टेड' कहने वाले कोई और नहीं, ट्रंप ही थे.
टेड ने सलाहकारों से कहा: दाढ़ी तो रहेगी.

वेनेजुएला में ट्रंप जो कर रहे थे, क्रूज़ को उससे नफरत थी. ऐसी नफरत तो उसी आदमी से होती है जिससे जुड़ी कुछ पर्सनल कड़वाहटें हों. ट्रंप के ड्रग कार्टेल से जुड़े होने को लेकर कानाफूसी तो CIA में पहले से चल ही रही थी. फिर ये सब एजेंसी की रिपोर्ट में भी दिखने लगा. CIA को पूरा यकीन था कि वेनेजुएला का सरकारी ढांचा बहुत तरीके से खोखला किया जा रहा था. कोकीन का मूवमेंट अमेरिका की दिशा में हो चुका है. बेहद ऑर्गेनाइज्ड चैनलों से. DEA के दो मुखबिर मारे जा चुके थे. तीसरा गायब था.
“वही इसे चला रहा है,” CIA निदेशक ने ओवल ऑफिस की मेज पर एक फाइल रखते हुए कहा. “हम ये साबित कर सकते हैं.”
क्रूज़ ने फाइल देखी. फिर खिड़की की ओर देखा. फिर दोबारा फाइल को देखा.
“हमें क्या चाहिए?”
“हमें अंदर से कोई चाहिए.”
मारिया कोरीना मचाडो को वॉशिंगटन समय के अनुसार रात 11 बजे एक सुरक्षित लाइन से फोन किया गया. उसने दूसरी रिंग पर फोन उठा लिया.
वह जाग रही थी. ऐसा लगता था कि वह सालों से जाग रही है. जो लोग उसे जानते थे, वे कहते थे कि लंबा स्ट्रगल ऐसा बना देता है. यह हर गैर-जरूरी चीज को राख कर देता है. जो बचता है, वह शुद्ध, और पूरी तरह पक्का होता है.
क्रूज़ ने कहा: “हम अंदर जा रहे हैं. मुझे तुम्हारी मदद चाहिए.”
एक पल का विराम.
“बताइए आपको क्या चाहिए,” उसने पूछा.
पार्ट 5: द वुमन फ्रॉम कराकास
मारिया कोरीना मचाडो का ट्रंप के साथ एक अतीत था. वैसा नहीं. दूसरा वाला. वह वाला जिसका निशान दिखता नहीं, लेकिन गहरा असर छोड़ जाता है. एकदम साफ-साफ. जैसे गीली सीमेंट पर जूते का निशान.
जब ट्रंप पहली बार वेनेजुएला आए थे, तो मारिया ने मिलने से इनकार कर दिया था. फिर वह उससे मिली क्योंकि वेनेजुएला को हर संभव मदद की जरूरत थी और वह उन लोगों में से नहीं थी जो निजी पसंद-नापसंद और राजनीतिक जरूरतों के बीच कन्फ्यूज हो. मुलाकात चालीस मिनट चली. तीस मिनट तक तो वह यही बताती रही कि उसने कब, कैसे, कितनी बार चुनाव जीते थे. बाकी दस मिनट उसने इकोनॉमिक रिफॉर्म के बारे में पूछा, जिस पर ट्रंप ने जवाब दिया: “मैंने बहुत सारी चीजें बनाई हैं. बहुत बड़ी चीजें. अगर तुम चाहो तो मैं यहां कुछ बना सकता हूं. शायद एक ट्रंप टॉवर. बिग, ब्यूटीफुल ट्रंप टॉवर.”
वह बिना हाथ मिलाए वहां से चली गई.
लेकिन आगे जाकर वह रुक गई. उसने देखा. सब दर्ज किया. उसके पास ड्रग नेटवर्क से जुड़ी एक फाइल थी. लोगों का मानना था कि उसे क्रून ने दिया था रिव्यू करने के लिए. जिसमें CIA की जुटाई जानकारियों से ज्यादा बातें थीं.

उसका एक रिश्ता आसिम मुनीर के साथ भी था.
वैसा नहीं. वही दूसरा वाला. जो मुसीबत के दौर में बनता है.
छह महीने पहले वेनेजुएला के एक जनरल ने तख्तापलट की कोशिश की थी. जो लगभग कामयाब ही हो गया था. अड़तालीस घंटे तक, मुनीर ने पैलेस की सिक्योरिटी को मचाडो के रोड नेटवर्क के साथ कोऑर्डिनेट किया, क्योंकि वही जानती थी कि कौन से इलाके के कमांडर वफादार हैं और कौन खरीदे जा चुके हैं. वे पूरी रात एन्क्रिप्टेड चैनलों पर बात करते रहे. उसके बारीक, सटीक सैन्य आकलन. उसकी जमीनी राजनीतिक पकड़. किसी तरह उन्होंने हालात संभाल लिए.
बाद में, मुनीर ने उसे एक छोटा सा मैसेज भेजा: “वेल डन.”
उसने वो मैसेज सहेजा हुआ था . अब बारी मचाडो के फोन करने की थी.
पार्ट 6 : फील्ड मार्शल की शतरंज
आसिम मुनीर को मारिया कोरीना मचाडो का फोन आया. मंगलवार दोपहर दो बजे. उसने पूरा सुना. और तीन सवाल पूछे. फिर कहा: “मैं इस पर सोचूंगा.”
वह छह घंटे तक सोचते रहे. सोचते-सोचते पैलेस के दो चक्कर कब लग गए, पता ही नहीं चला. डिनर भी अकेले किया. मुनीर के दिमाग में 2026 के शुरुआती महीनों में हुई घटनाएं रिकॉर्ड की तरह दर्ज थीं, वह सब अब रिवाइंड हो रहा था. सत्ता में रहते हुए अपमानजनक पहला साल गुजारा था. फिर ट्रंप प्रशासन ने दुनिया पर दबदबा कायम करने के लिए कैसे बेताब था. फिर उन्होंने पाकिस्तान पर एक जंगी अभियान में लॉजिस्टिकल सपोर्ट देने के लिए प्रेशर डाला. जिसे ऑफिशियली नाम दिया गया- ईरान के लिए “स्ट्रैटेजिक डिटरेंस ऑपरेशन”. हालांकि, बाद में उसे एक 'बेकाबू जंग' ही माना गया.
वह सब ग्यारह दिन चला था. हासिल कुछ नहीं हुआ. सिवाय एक पुल गिराए जाने, तीन सरकारों की शर्मिंदगी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख का करिअर बर्बाद होने के. उस आर्मी चीफ को एक अमेरिकी जनरल के साथ तस्वीर में देखा गया था. सब कुछ हाथ से निकल जाने के ठीक बारह घंटे पहले. उस जनरल को तो बाद में अमेरिकी प्रशासन ने चलता कर दिया था. और वो सेना प्रमुख कोई और नहीं, आसिम मुनीर थे.
“मैंने उसे बनाया है,” ट्रंप ने 2026 में एक इंटरव्यू में कहा था, शायद इस भ्रम में कि यह तारीफ है. “वह कुछ नहीं था. मैंने उसे ऊपर उठाया. मैंने उसे एक प्लेटफॉर्म दिया. बहुत एहसान फरामोश है, फ्रेंकली.”

मुनीर ने वह इंटरव्यू टीवी पर रावलपिंडी के एक ड्रॉइंग रूम में देखा था, जहां उस समय वे टेक्नीकली कहें तो नजरबंद थे. पाकिस्तान का एक नया आर्मी चीफ था. उन्हीं का चेला, जो जेल में कैद बीमार इमरान खान के समर्थकों के विरोध प्रदर्शनों के बाद मुनीर से आगे निकल चुका था. कुछ मिलिट्री मास्टर्स के साइलेंट सपोर्ट से. इमरान खान अब भी सबसे लोकप्रिय नेता थे. और वो अब भी जेल में थे. नतीजा ये हुआ कि सत्तारूढ़ परिवार नए जनरल की ओर थोड़ा झुक गया. जो मुनीर के असाधारण उभार से पहले से ही जलन से ग्रस्त था. वो उभार जिसका आधार पूरी तरह आर्टिफिशियल था. पहले भारत के साथ हुई झड़प में मिली “विजयी हार”, और फिर बिरादर इस्लामी मुल्क (शिया ही सही) को “दुष्ट ज़ायनिस्टों” के आदेश पर दबाने में संदिग्ध रोल.
खैर, मुनीर ने टीवी बंद कर दिया था.
वो मारिया कोरीना के ऑफर के बारे में सोच रहे थे. उन्होंने रावलपिंडी की उस रात के बारे में सोचा. उस पुल के बारे में सोचा जिसका वजूद मिट गया. उन दो सैनिकों की याद किया जिनके नाम अब भी याद थे.
शाम आठ बजे, मुनीर ने मारिया को पलटकर फोन किया.
उसने कहा “क्रूज़ से कहो कि तैयार रहे... अगला गुरुवार.”
पार्ट 7 : वह रात
सत्रह तारीख की रात गर्म थी. बादलों से ढकी हुई. अमेरिकी टीम का मौसम विशेषज्ञ जिसे हेलिकॉप्टर को कम ऊंचाई पर उड़ान भरने के लिए बिल्कुल मुफीद मान रहा था. चांद बादलों के पीछे था. नीचे बिखरा-बिखरा सा शहर पुरानी खूबसूरती को समेटे सोया हुआ था.
पहले हेलिकॉप्टर में बारह लोग थे. कुल तीन हेलिकॉप्टर आए. वे एविला माउंटेन रेंज के ऊपर से नीचे उड़ते हुए आए. रात में ऊपर से देखने पर ये पहाड़ समुद्र और शहर के बीच एक बड़ी दीवार जैसे लगते हैं. हेलिकॉप्टर कराकास के पूर्वी हिस्से की ओर उतरे. जहां राष्ट्रपति का पैलेस था. कैमरों, गार्डों और क्यूबाई कमांडो के सुरक्षा घेरे में. उन कमांडो को उस रात उनके सेक्शन कमांडरों ने बताया था कि उत्तर दिशा में एक तयशुदा बाहरी खतरा है, जिसके कारण उन्हें वहां तैनात होना है.
सेक्शन कमांडरों को यह निर्देश उनके ऑपरेशनल कोऑर्डिनेटर से मिला था.
वह कोऑर्डिनेटर जो फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को रिपोर्ट करता था.
रात कोई 9:30 बजे होंगे. जब ऑपरेशन शुरू हुआ तो मुनीर पैलेस में अपने कमरे में थे. उन्होंने पहले हेलिकॉप्टर की आवाज सुनी. चश्मे पहने. एक किताब उठाई, जिसे वह तीन महीने से खत्म करना चाह रहा थे. पढ़ने लगे.
जब अचानक लाइट चली गई तब ट्रंप को पहली बार एहसास हुआ कि कुछ गड़बड़ है. पैलेस का मुख्य जनरेटर “मेंटेनेंस” के नाम पर चालीस मिनट पहले ही बंद कर दिया गया था. ऑफ कोर्स मुनीर के आदेश पर. बैकअप जनरेटर डिजाइन के मुताबिक चालू हुआ. वह साठ फीसदी सिक्योरिटी सिस्टम को ही बैकअप दे रहा था. बाकी चालीस प्रतिशत में बाहरी अलर्ट सिस्टम शामिल था.
ट्रंप अपने ऑफिस में थे. जहां उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रवादियों की तस्वीरें लगाई थीं. और उनके बीच ट्रंप ऑर्गनाइजेशन की ब्रांडिंग का अजीब मिश्रण भी था. हर दीवार पर उनकी अपनी तस्वीर लगी थी. कई तस्वीरों पर उहोंने खुद ही अपने साइन किए थे. अपने लिए ही. कुछ तस्वीरों पर तो अपने ही लिए प्रेरणादायक मैसेज भी लिखे थे.
ट्रंप को शोर सुनाई दिया. फिर बूटों की आवाज आई.
उन्हें अपनी कुर्सी से उठने, फोन उठाने और बस इतना कहने का समय मिला: “मेरा शिकार किया गया....”
तभी काले कपड़ों में स्पेशल फोर्सेस के चार कमांडो भीतर घुसे. ऐसी सहजता के साथ जैसे वो इस कमरे के चप्पे-चप्पे से पहले से वाकिफ हों. ये तो होना ही था. वर्जीनिया के वेयरहाउस में इस कमरे का लेआउट बनाकर ये लोग काफी समय से प्रैक्टिस जो कर रहे थे.
टीम लीडर ने साफ और सधे हुए लहजे में कहा, “मिस्टर ट्रंप, आप हमारे साथ चल रहे हैं.”
“मैं वेनेजुएला का राष्ट्रपति हूं! मैं अपने वकील से बात करना चाहता हूं!”
“आप कर सकते हैं. लेकिन न्यूयॉर्क में.”
स्टॉर्मी डेनियल्स बगल वाले कमरे में थीं. अपनी जिंदगी के अनुभवों से उसे अंदाजा लगाने में देर नहीं लगी कि हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. वह पहले ही अपना बैग पैक कर चुकी थी.
वह सिक्योरिटी टीम से पहले बाहर निकल आई.
“मुझे पता था यह होने वाला है,” स्टॉर्मी ने बुदबुदाया. और हेलिकॉप्टर में बैठ गईं.

पार्ट 8 : नई सुबह
सुबह तक तीन चीजें हो चुकी थीं.
डोनाल्ड ट्रंप- अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति एक सैन्य विमान में कैरेबियन के ऊपर कहीं उड़ रहे थे. उनकी दिशा न्यूयॉर्क के एक खास रनवे की ओर थी.
मारिया कोरीना मचाडो राष्ट्रपति पैलेस के बाहर प्लाज़ा में भीड़ को संबोधित कर रही थीं. ये लोग ऐसे इकट्ठा हुए थे, मानो लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रहे हों. अभी भी वह कोई दावा नहीं कर रही थीं. वह बस वहां खड़ी थीं, साफ-साफ बोल रही थीं. वही काफी था. हमेशा से उतना ही काफी रहा है.
दूसरी ओर पैलेस के अपने कमरे में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी किताब खत्म कर ली थी. उन्होंने उसे साइड टेबल पर रखा. अपना चश्मा उतारा. कुछ देर के लिए इत्मीनान से बैठे रहे.
फिर उन्होंने फोन उठाया और रावलपिंडी में एक नंबर मिलाया.
कहा, “काम हो गया”.
दूसरी तरफ से कुछ कहा गया.
मुनीर हल्के से मुस्कुराए. बोले “हां, ब्रिज भी.”
उन्होंने फोन रख दिया. खिड़की से बाहर कराकास की सुबह को निहारा. धूसरित सी नारंगी फ़िज़ा, जो दुनिया के किसी और शहर में नहीं होती. ये नजारा आज उस शख्स के सामने था, जिसने अपनी पूरी जवानी पावर, टाइमिंंग और नतीजों के जोड़-घटाव करते गुजार दीं. उसे लग रहा था जैसे तमाम मुश्किलों के बावजूद, शायद कुछ बेहतर की शुरुआत हो सकती है.
वह भावुक व्यक्ति नहीं था. वह एक सोल्जर था. उसने उम्मीद जैसी भावनाओं में डूबने की छूट तो खुद को भी नहीं दी थी.
लेकिन उन्होंने, थोड़ी देर के लिए, खुद को यह सोचने की गुंजाइश तो दी ही कि वह सुबह बहुत अच्छी थी.

अंत में: ट्रायल की शुरुआत
सुनवाई सोमवार को थी. ट्रंप एक सूट पहनकर पहुंचे, जिसे साफ तौर पर जल्दबाजी में प्रेस किया गया था. वह अदालत में वैसे ही दाखिल हुए जैसे वह हमेशा कमरों में दाखिल होते थे. जैसे उन्हें कमरे में प्रवेश करने के लिए रखा गया हो और उन्हें देख वह कमरा खुद को खुशकिस्मत समझे.
आरोप पढ़े गए. ड्रग तस्करी, कार्टेल की मदद, साजिश रचना, मनी लॉन्ड्रिंग. एक लंबी फेहरिस्त थी, जिसे पूरा होने में वक्त लगा.
वह अपने वकील की ओर झुके और इतनी ऊंची आवाज में बोल बैठे कि पहली तीन पंक्तियों ने सुन लिया: “यह इस देश ही नहीं, बल्कि वेनेजुएला के इतिहास का भी सबसे बड़ा विच हंट है.”
जज ने पूछा, “आप खुद को गुनाहगार मानते हैं या नहीं?”
ट्रंप ने कहा, “ब्यूटीफुली”.
उनके वकील ने तुरंत टोकते हुए कहा, “बेगुनाह, योर ऑनर.”
अदालत के बाहर, कुछ समर्थक जमा थे. उनके पास तख्तियां थीं. कुछ पर लिखा था- TRUMP 2028. कुछ उत्साही लोगों ने कोने में वेनेजुएला का छोटा सा झंडा भी बनाया हुआ था.
भीतर, सरकारी वकील एक फाइल खोल रहा था. वह बहुत मोटी फाइल थी.
उधर कराकास में, मारिया कोरीना मचाडो से एक पत्रकार ने पूछा- क्या उन्हें लगता है कि न्याय हो गया?
उसने इस बारे में सोचा. फिर ख्याल आया वर्षों के अपने संघर्ष के बारे में. उन दोस्तों के बारे में जो इस सुबह तक नहीं पहुंच सके. उस ब्रिज के बारे में जिसका जिक्र मुनीर ने किया था. जिसे वह पूरी तरह समझती नहीं थी, लेकिन महसूस करती थी कि वह महत्वपूर्ण है.
उसने कहा, “न्याय एक घटना नहीं है. यह एक दिशा है.”
पत्रकार ने इसे लिख लिया.
राइकर्स आइलैंड की बदनाम जेल की एक कोठरी में बैठे डोनाल्ड ट्रंप स्टेट प्रिजन जेल में ट्रांसफर किए जाने का इंतजार रहे हैं. इस बीच जब उन्हें एक संतरी दिखाई देता है, तो उससे पूछते हैं- क्या उन्हें बेहतर तकिया मिल सकता है?
वे उसे समझा रहे हैं- “मैं बहुत अच्छे तकियों का आदी हूं. सबसे अच्छे तकिए. लोग यह नहीं जानते, लेकिन मैं बहुत अच्छा स्लीपर हूं. वर्ल्ड क्लास. जबरदस्त. किसी से भी पूछ लो.”
किसी ने किसी से नहीं पूछा.
जोहरान ममदानी का फैसला अंतिम था.
तकिया जस का तस रहा.
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यह एक व्यंग्य और काल्पनिक रचना है. सभी घटनाएं, संवाद और परिस्थितियां पूरी तरह कल्पना पर आधारित हैं. किसी वास्तविक व्यक्ति, राजनीति, रणनीति, सुरक्षा अभियान या किसी भी अमेरिकी या वेनेजुएला की राष्ट्रपति पद से समानता महज संयोग है. और सच कहें तो, इसमें उस समय का दोष है जिसमें हम रह रहे हैं.