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राहुल गांधी ने जो भारत में किया वो 'कमाल' कमला हैरिस अमेरिका में ट्रंप के साथ नहीं कर पाईं । Opinion

अमेरिका में भी चुनाव के मुद्दे वही थे जो भारत में थे. बढ़ती महंगाई से लेकर घुसपैठ तक दोनों देशों में मुद्दे एकसमान ही थे. पर दोनों जगहों पर विपक्ष ने इसे अलग तरीके से लिया. राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जिस तरीके से हमला किया शायद उस तरीके से कमला हैरिस नहीं कर सकीं.

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राहुल गांधी और कमला हैरिस
राहुल गांधी और कमला हैरिस

भारत में लोकसभा चुनाव और अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव में मुद्दे करीब-करीब एक जैसे ही थे. चुनावी कैंपेन भी करीब-करीब एक तरह से हो रहा था. भारत में लोकसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन और इंडिया गठबंधन के बीच मुकाबला था. अमेरिका में हमेशा की तरह रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के बीच मुकाबला हो रहा था. रिपब्लिकन की कमान डोनल्ड ट्रंप के हाथ में थी जबकि डेमोक्रेट्स की ओर से मोर्चा कमला हैरिस संभाल रहीं थीं. ठीक उसी तरह इंडिया गठबंधन की ओर से राहुल गांधी ने मोर्चा संभाला हुआ था जबकि एनडीए की ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामने थे. हालांकि भारत में लोकसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन को इंडिया गठबंधन सत्ता से बाहर नहीं कर सकी पर उसे पहले जैसा मजबूत भी नहीं रहने दिया. केंद्र सरकार अब कमजोर हो चुका है. बिना सहारे के एनडीए सरकार अब एक दिन भी नहीं चला सकती है. यह सब कैसे हुआ. निसंदेह इसके पीछे कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी की रणनीति काम आई, जिसके चलते बीजेपी को घेरने में  इंड़िया गठबंधन को कामयाब साबित हुई. यही काम अमेरिका को कमला हैरिस को भी करना था पर वो उतने प्रभावी ढंग से उन चीजों को नहीं उठा सकीं जिस तरह से भारत में उठाईं गईं.

भारत की तर्ज पर हो रहा था अमेरिका में चुनाव

अमेरिका में भी चुनाव के मुद्दे वही थे जो भारत में थे. भारत में अगर बढ़ती महंगाई चुनाव मु्द्दा था तो अमेरिका में भी यह बहुत बड़ा मुद्दा था. एक आम अमेरिकी को हर रोज की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है, भारत में  दलितों पर अत्याचार बढ़ने की बात के साथ यह भी कहा गया कि अगर सरकार में बीजेपी आती है तो संविधान ही बदल दिया जाएगा,  भारत में विपक्ष का आरोप था कि नरेंद्र मोदी अगर एक बार फिर सत्ता में आते हैं तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा, यही बात अमेरिका में डोनल्ड ट्रंप के साथ भी कही जा रही थी.  महिलाओं के खिलाफ अपराध, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा आदि मुद्दे भारत ही नहीं अमेरिका में भी खास रही. भारत में राहुल गांधी यह आरोप लगाने में सफल रहे कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने खास दोस्त पूंजीपति गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के लिए काम कर रहे हैं. यही बात कमला हैरिस भी डोनल्ड ट्रंप पर भी लगा रहीं थीं कि ट्रंप की सरकार बनने पर अमेरिका में केवल पूंजिपतियों, कॉर्पोरेट और बड़े लोगों का ही ध्यान रखा जाएगा.  वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश मिश्र अपने एक्स हैंडल पर लिखते हैं कि
 2024 के चुनाव में एक अलग ही अमेरिका दिखा.

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विभाजित अमेरिका. बंटा हुआ अमेरिका.

व्हाइट का अमेरिका. ब्लैक का अमेरिका.

पुरुषों का अमेरिका. महिलाओं का अमेरिका.

ट्रंप का मीडिया.. डेमोक्रेट का मीडिया.

इसका कॉरपोरेट. उनका कॉरपोरेट. 

ग्रामीण अमेरिका. अर्बन अमेरिका. 

अवैध घुसपैठ अमेरिका का सबसे बड़ा मुद्दा रहा और ट्रंप को उसका अपार जनसमर्थन हासिल हुआ है. 

बहुत कुछ भारत में लोकसभा चुनाव के दौरान यही स्थिति भारत की भी थी. पर इन मुद्दों पर जिस तरीके से ताबड़तोड़ हमले राहुल गांधी ने किए उसका फायदा उनकी पार्टी और इंडिया गठबंधन के दलों को मिला. पर कमला हैरिस चूंकि खुद सत्ता में थीं और एक बेहद महत्वपूर्ण पद उपराष्ट्रपति पद पर थीं. इसलिए उनको आरोप लगाना शोभा नहीं देता. अमेरिकी समाज कमला हैरिस से सवाल पूछने लगती कि आखिर पिछले 4 साल तो आप सत्ता में थी तो क्यों नहीं कदम उठाया गया.

2- राहुल गांधी का तरीका पकड़ नहीं पाईं कमला हैरिस

राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार पर आरोप लगाते रहे. इसके लिए वो यह नहीं सोच रहे थे कि ये सवाल उनकी पार्टी और उन पर भी उठाएं जाएंगे. जैसे राहुल गांधी ने कहा कि जाति जनगणना को मुद्दा बनाया बिना यह सोचे की कांग्रेस की राज्य सरकार खुद ही जाति जनगणना नहीं करवां रहीं. उन्होंने बजट बनाने और अन्य फैसलों में दलित और पिछड़े अधिकारियों का मुद्दा उठाया बिना यह सोचे की कांग्रेस की सरकारों में क्या हो रहा है या जब देश में कांग्रेस की सरकारें थीं तो इन तबके के अधिकारियों को इस तरह के फैसलों में शामिल किया जाता था या नहीं? राहुल  गांधी लगातार हर चौके चौराहे पर यह बात बोलने लगे दलितों और पिछड़ों के साथ अन्याय हो रहा है. जनता को यह बात समझ में आ गई. कमला हैरिस भले सरकार में थी पर उन्हें भी उसी तरह से बे सिर पैर तथ्यहीन बातों को उठाते रहना चाहिए था.

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3- राहुल भारत में एक तबके को बताने में सफल साबित हुए थे कि सरकार पूंजीपतियों के लिए काम कर रही है

राहुल गांधी लगातार कई सालों से अंबानी और अडानी का नाम पीएम मोदी के दोस्तों पर लेते रहे हैं. बार-बार कहते हैं कि उद्योगपति गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के लिए मोदी सरकार काम कर रही है. राहुल ने कभी ये नहीं सोचा कि इन उद्योगपतियों की आवभगत कांग्रेस सरकारें भी करती हैं. बार-बार अडानी का नाम लेने से आम जनता प्रभावित हुई. लोगों को ऐसा लगा कि हमारा नेता पूंजिपतियों से टकराने की हिम्मत रखता है. इसके उलट कमला हैरिस ने कार्पोरेट और ट्रंप के हितों के एक होने की बात की पर खुलकर एलन मस्क जैसे लोगों को टार्गेट नहीं कर सकीं.  

4- घुसपैठियों का मुद्दा भारत में भी था

अवैध घुसपैठियों और बाहर से आने वाले लोगों को लेकर डोनल्ड ट्रंप को अमेरिका में जबरदस्त समर्थन मिला है. पर भारत में इसका उल्टा हुआ. सारे अवैध घुसपैठियों ने इंडिया गठबंधन के दलों को वोट दिया. इसके साथ ही मुस्लिम अल्पसंख्यकों के वोट भी एकमुश्त मोदी सरकार के खिलाफ गए. जबकि अमेरिका में कमला हैरिस भी इसका लाभ उठा सकतीं थीं.  मुलिस्म, ब्लैक्स और इंडियंस (अमेरिका के मूल निवासी) आदि के समुदायों के वोटों पर अपना एकाधिकार जमा सकती थीं पर ऐसा नहीं कर सकीं.

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