योगी आदित्यनाथ दिल्ली के दौरे पर हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद और भी बड़े नेताओं से मिल रहे हैं. मोदी की ही तरह बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने को भी योगी आदित्यनाथ ने शिष्टाचार मुलाकात बताया है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राम मंदिर की प्रतिकृति भेंट की है. ये प्रतिकृति चांदी से बनी है, जिसमें गुलाबी मीनाकारी आर्ट का इस्तेमाल हुआ है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री कार्यालय दोनों की तरफ से ये तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की गई है.
प्रधानमंत्री मोदी के साथ करीब एक घंटा चली योगी आदित्यनाथ की ये मुलाकात कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें उत्तर प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार तो है ही - अब तो विधानसभा चुनाव में भी करीब एक साल का ही समय बचा हुआ है.
महज मंत्रिमंडल विस्तार ही या कुछ और भी?
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात को सूबे में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है. 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भी ये काम हुआ था. और, चुनावी रणनीति के हिसाब से नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था.
तब सितंबर, 2021 में उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था. अभी तो ये साल की शुरुआत है. वैसे तब मंत्रिमंडल विस्तार टलने की एक बड़ी वजह भी मानी गई थी. उस वक्त योगी आदित्यनाथ और बीजेपी नेतृत्व के बीच एक पेच फंसा हुआ माना जा रहा था. पूर्व नौकरशाह अरविंद शर्मा को लेकर. टकराव की चर्चा और खबरें उनके वीआरएस लेने और एमएलसी बनने के साथ ही शुरू हो गई थीं. आखिरकार अरविंद शर्मा मंत्री बने भी, लेकिन चुनाव बाद बनी नई सरकार में.
फिलहाल तो ऐसा कोई पेच सामने नहीं आया है. रही बात टकराव की तो 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ऐसी बातों की खासी चर्चा रही. इसलिए भी क्योंकि यूपी में बीजेपी की लोकसभा सीटें समाजवादी पार्टी से भी कम आ गई थीं. और, अयोध्या में भी हार का मुंह देखना पड़ा था - वो भी तब जब चुनाव से ठीक पहले राम मंदिर उद्घाटन समारोह का भव्य आयोजन हुआ था.
हाल फिलहाल ये चर्चा जोरों पर है कि मकर संक्रांति के बाद यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है. खरमास में शुभ कार्य करने से बचने की कोशिश होती है. नितिन नबीन को बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष भी खरमास शुरू होने के ठीक पहले बनाया गया था.
चुनावी तैयारियों के हिसाब से भी वक्त बहुत ज्यादा नहीं बचा है. संगठन में भी बदलाव हुआ है. पंकज चौधरी के यूपी बीजेपी की कमान संभाल लेने के बाद पूर्व यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को भी कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है. पंकज चौधरी के यूपी बीजेपी का अध्यक्ष बन जाने के बाद यूपी बीजेपी में पावर बैलेंस न होने की जोरदार चर्चा थी. क्योंकि मुख्यमंत्री और यूपी बीजेपी अध्यक्ष दोनों ही गोरखपुर यानी पूर्वी उत्तर प्रदेश से हो गए हैं.
साथ ही, कैबिनेट में कुछ युवाओं को भी जगह मिलने की संभावना जताई गई है. और, इसकी बड़ी वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का युवाओें को बीजेपी से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जाना. कई मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी बीजेपी से युवाओं को जोड़े जाने की बात कह चुके हैं.
अब तो टार्गेट 2027 ही सामने है
युवाओं को बीजेपी से जोड़ने की रणनीति भी खास है. क्योंकि, प्रधानमंत्री मोदी ऐसे युवाओं को बीजेपी से जोड़ने की बात कर रहे हैं, जिनका कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड न हो. मतलब साफ है, ऐसे युवा जिनकी राजनीति में दिलचस्पी तो हो, लेकिन वो पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण न हो. बिहार चुनाव से पहले भी मोदी ने बीजेपी नेताओं को परिवारवाद की राजनीति से बचने की सलाह दी थी - और बिहार चुनाव में बीजेपी की कामयाबी की एक बड़ी वजह परिवारवाद की राजनीति को पहले जैसा सपोर्ट न मिलना भी है.
अक्टूबर, 2024 में अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी में एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा युवाओं को नेपोटिज्म यानी परिवारवाद की राजनीति के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया था. मोदी ने कहा था, हम राजनीति में ऐसे एक लाख युवाओं को लाएंगे जिनका पहले कोई राजनीतिक संबंध नहीं रहा है.
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त, 2025 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शवासियों का आवाहन करते हुए कहा था कि राजनीति में ऐसे नए लोगों को अवसर मिलना चाहिए जिनके परिवारों का पहले से कोई राजनीतिक बैकग्राउंड न हो - देश की राजनीति को परिवारवाद से बचाने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लाख ऐसे युवाओं को आगे लाने की बात की थी.
मोदी का कहना था, ये एक लाख युवा ऐसे परिवारों से आएं जिनका राजनीति से कोई संबंध न रहा हो. ऐसे एक लाख लोग, फ्रेश ब्लड चाहे ग्राम पंचायत में आएं, नगर पालिका में आएं, जिला परिषदों में आएं, चाहे विधानसभाओं में आएं या लोकसभा में आएं. पहले उनके परिवार का कोई राजनीतिक इतिहास न हो, ऐसे फ्रेश लोग राजनीति में आएं.
मोदी ने कहा था, मैं एक चिंता हमेशा कहता हूं परिवारवाद, जातिवाद भारत के लोकतंत्र को बहुत नुकसान कर रहा है... देश की राजनीति को हमें परिवारवाद और जातिवाद से मुक्ति दिलानी होगी.
बिहार चुनाव में भी मोदी तकरीबन ऐसी ही बातें कर रहे थे, और यूपी चुनाव का पैटर्न भी तो बिहार जैसा ही है. अगले साल यूपी में विधानसभा के चुनाव होने हैं. यूपी चुनाव योगी आदित्यनाथ के लिए जितना मायने रखते हैं, प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण है. आखिर देश के प्रधानमंत्री पद का रास्ता यूपी होकर ही तो जाता है. गुजरात से मोदी ने वाराणसी का रुख भी तो इसीलिए किया था. और, 2022 के यूपी चुनाव में अमित शाह भी तो कह ही रहे थे, 2024 में मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए योगी को मुख्यमंत्री बनाना जरूरी है - और ये बात तो आगे भी लागू रहेगी.
योगी आदित्यनाथ ने सोशल साइट X पर लिखा है, आज नई दिल्ली में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से शिष्टाचार भेंट कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया. आपका पाथेय 'नए उत्तर प्रदेश' की विकास यात्रा को और अधिक गति प्रदान करने हेतु सदैव नवीन ऊर्जा का संचार करता है. अपना बहुमूल्य समय प्रदान करने हेतु हार्दिक आभार प्रधानमंत्री जी.
मुलाकातें, और दोनों डिप्टी सीएम का दिल्ली में होना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के साथ ही, योगी आदित्यनाथ एक लंबी लिस्ट पहले से तैयार कर रखी थी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन जैसे नेता इस लिस्ट में शामिल थे.
ये मुलाकातें उत्तर प्रदेश में सरकार और संगठन में फेरबदल से यूं भी जुड़ी हुई लगती हैं. भले ही 'सरकार बनाम संगठन' वाली बहस यूपी बीजेपी में दबा दी गई हो, लेकिन असर तो अब भी खत्म हुआ नहीं लगता - और ये बात यूपी के दोनों डिप्टी सीएम का योगी आदित्यनाथ के साथ साथ दिल्ली में मौजूदगी से और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
योगी आदित्यनाथ के साथ ही यूपी के दोनों डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसात मौर्य भी दिल्ली में मौजूद हैं. बीते दिनों ऐसे कई मौके देखे गए हैं, जब योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी सीएम के बीच तल्खी महसूस की गई है. हालांकि, बाद में मामला ऊपर से रफा दफा करा दिया गया - अब चुनाव से पहले पूरे घर को दुरुस्त करने की तैयारी चल रही है.