तमिलनाडु की राजनीति का मिजाज बिल्कुल ही अलग है. चर्चा में तो सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल की लड़ाई है, लेकिन थोड़ा ध्यान से देखें तो तमिलनाडु का चुनाव कैंपेन ज्यादा दिलचस्प लगता है. चुनाव कैंपेन भी तमिलनाडु बाकी राज्यों से काफी आगे नजर आता है. वहां न SIR बड़ा मुद्दा है, न अफसरों के तबादले और न ही घुसपैठियों की बात.
तमिलनाडु में सबसे बड़ी बात हो गई है AIADMK के सत्ता में आने पर मुफ्त रेफ्रिजरेटर दिए जाने का चुनावी वादा. अगर 'रेवड़ी' और कल्याणकारी योजनाओं में फर्क करना मुश्किल लगे, तो तमिलनाडु अलग ही मिसाल है. दिल्ली या देश के दूसरे हिस्सों में भले ही मुफ्त की योजनाओं को रेवड़ी करार दिया जाता हो, लेकिन तमिलनाडु में AIADMK हो या DMK - दोनों ही द्रविड़ दल ऐसी योजनाओं को सामाजिक कल्याण का कारगर टूल मानते हैं.
कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही डीएमके से मुकाबले के लिए AIADMK ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया है - और AIADMK नेता ई. पलानीस्वामी सत्ता में फिर से लौटने पर तमिलनाडु के लोगों को सब कुछ मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से ज्यादा देने का वादा कर रहे हैं.
AIADMK का सबसे ज्यादा देने का वादा
तमिलनाडु में DMK को शिकस्त देकर सत्ता पर फिर से काबिज होने की कोशिश में जुटी AIADMK हर संभव उपाय कर रही है. बीजेपी भले ही तमिलनाडु में भी डबल इंजन की सरकार लाने के वादे करे, लेकिन DMK की योजनाओं के मुकाबले AIADMK डबल बेनिफिट स्कीम देने की बात कर रही है.
पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी ने AIADMK के चुनाव घोषणा पत्र को हीरो बताया है. असल में, पलानीस्वामी का यह बयान अपने आप में किसी चुनावी रैली जितना असरदार लगता है. वैसे भी तमिलनाडु में चुनावी वादे चुनाव कैंपेन पर भारी पड़ते हैं. चुनाव घोषणा पत्र के माध्यम से तमिलनाडु में राजनीतिक पार्टियां अपने वोटर से हर तरीके से कनेक्ट होने की कोशिश करती हैं.
1. पलानीस्वामी का वादा है कि अगर AIADMK की सत्ता में फिर से वापसी हुई, तो जिसके पास भी चावल राशन कार्ड है, उसे मुफ्त में रेफ्रिजरेटर दिया जाएगा. जब कुछ अनाज या खाते में नकद ट्रांसफर होने की स्थिति में लोग दिल खोलकर दलों की झोली वोटों से भर देते हों, रेफ्रिजरेटर तो खास मायने रखता है.
2. डीएमके के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार अगर हर महीने खाते में 1,000 रुपये भेजती है, तो AIADMK सरकार बनाते ही रकम डबल करके 2,000 रुपये कर देगी.
3. अगर डीएमके सरकार में सिर्फ महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा मिल रही है, तो AIADMK को सरकार बनाने का मौका मिला तो यह सुविधा पुरुषों को भी मिला करेगी.
4. AIADMK समय समय पर राहत के रूप में दी जाने वाली मदद में भी इजाफा की घोषणा की है. सरकार बनने पर AIADMK एकमुश्त 10,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी देगी.
जैसे बीजेपी पहले दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार की योजनाओं को रेवड़ी कहकर आलोचना करती थी, तमिलनाडु की नई नवेली पार्टी टीवीके के नेता थलपति विजय भी राज्य में चलने वाली मुफ्त की योजनाओं का मजाक उड़ाया करते थे, लेकिन अब वही विजय डीएमके की 1 हजार और AIADMK की 2 हजार वाली प्रस्तावित स्कीम के मुकाबले हर महीने 2500 रुपये देने का वादा कर रहे हैं.
तमिलनाडु में मुफ्त वाली स्कीम बहुत पुरानी है
तमिलनाडु देश का पहला राज्य है, जहां स्कूलों में मिड-डे-मील की शुरुआत हुई. और उसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन को पुराने योजना आयोग के एक सदस्य की अजीब टिप्पणी सुननी पड़ी थी - आप स्कूल चलाना चाहते हैं या भोजनालय!
मिड डे मील योजना गरीब तबके के बच्चों के स्कूल छोड़ने से रोकने के मकसद से लाई गई थी. और बड़े ही व्यवस्थित तरीके से संचालित की जाती थी. किचन, कुक और हेल्पर तक की निगरानी की व्यवस्था हुआ करती थी. हालांकि, अब ऐसी योजनाएं चुनाव घोषणा पत्र का हिस्सा नहीं होतीं. जमाना काफी आगे बढ़ चुका है, शायद इसीलिए रेफ्रिजरेटर की जरूरत पड़ रही है.
बीते वक्त की बात करें, तो तमिलनाडु की वेलफेयर पॉलिटिक्स टीवी सेट और मिक्सर से नहीं, बल्कि भोजन, गरीबों की मदद और सामाजिक न्याय से शुरू हुई थी.
1. सीएन अन्नादुरई ने 1967 में 1 रुपये में चावल देने का वादा किया था. चुनाव जीते तो वादे को अमली जामा पहनाने के बजाए, व्यवहार में उसे कम भी कर दिया. चुनावी वादे अधूरे रह जाने या ठीक से अमल में न लाए जाने का यह उदाहरण माना जा सकता है.
2. डीएमके नेता एम. करुणानिधि ने बाद में राशन कार्ड धारकों को 5 किलो चावल देने का वादा किया. धीरे धीरे चुनावी सौगातों की संस्कृति अपने आधुनिक उपभोक्तावादी रूप में तब्दील हो चुकी थी. 2006 में करुणानिधि ने ही जब रंगीन टीवी सेट देने का वादा किया तो राजनीति में मुफ्त की चीजों के नए आयाम नजर आने लगे.
3. AIADMK नेता जे. जयललिता ने करुणानिधि को काउंटर करने के लिए सौगातों की बौछार कर दी. लैपटॉप, मिक्सर ग्राइंडर और पंखे जैसी चीजों ने तमिलनाडु की राजनीति में अलग ही अम्मा ब्रांड बना दिया. अम्मा बोतल बंद पानी भी आ गया.
4. जयललिता ने 2016 में मुफ्त मोबाइल फोन, 100 यूनिट मुफ्त बिजली, सब्सिडी पर महिलाओं के लिए स्कूटर, शादियों में सोना जैसे उपहारों की बरसात कर दी, जिसका फायदा भी मिला.
पलानीस्वामी को मालूम है कि अम्मा के जाने के बाद एक बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तो मिल गई, लेकिन अपने बूते उसे हासिल करना नाको चने चबाने से कम नहीं है. पलानीस्वामी को यह भी मालूम है कि बीते चुनावों में मुफ्त वाली कल्याणकारी योजनाओं का फायदा भी उसी राजनीतिक दल को मिला है, जो पहले से सत्ता पर काबिज है.
दिल्ली इस मामले में अपवाद हो सकता है, लेकिन वहां अरविंद केजरीवाल के खिलाफ बने माहौल का बीजेपी ने फायदा उठा लिया. करीब करीब वैसे ही जैसे पंजाब में आम आदमी पार्टी ने 2022 में मौके का फायदा उठाया था. एमके स्टालिन के चुनावी वादों में भी नई कल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह भी है कि तमिलनाडु के लोगों को डीएमके सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं का फायदा पहले से ही मिल रहा है - और पलानीस्वामी के वादे में सत्ता में आने जैसी शर्तें लागू हैं.