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ऑयल सप्लाई चेन पर ईरानी 'सर्जिकल स्ट्राइक', होर्मुज स्ट्रेट में बन गया जहाजों की बेबसी का नक्शा

ईरान पर इजरायल और अमेरिकी हमले का सबसे बड़ा तनाव पर्शियन गल्फ को अरब सागर से जोड़ने वाले समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट पर देखा जा सकता है. समुद्री जहाजों के ट्रैकर ने पर्शियन गल्फ, खासकर होर्मुज की खाड़ी की डरावनी तस्वीर पेश की है. ईरानी हमले के आगे होर्मुज स्ट्रेट के दोनों ओर सैकड़ों जहाज ठिठक गए हैं.

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होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी नाकेबंदी ने तेल ही नहीं, दुनिया के कारोबार पर संकट ला दिया है.
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी नाकेबंदी ने तेल ही नहीं, दुनिया के कारोबार पर संकट ला दिया है.

ताजा खबर तो ये है कि ईरान ने सोमवार दोपहर सऊदी अरब की सबसे बड़ी रिफायनरी कंपनी अरामको के तानुरा प्लांट को निशाना बनाया. कतर के नजदीक पर्शियन गल्फ से सटी इस रिफायनरी पर हमले का मतलब सिर्फ युद्ध का भीषण होना ही नहीं, बल्कि इजरायल और अमेरिकी हमले के जवाब में इलाके के पेट्रोलियम ठिकानों के संकट में पड़ने का संकेत है. लेकिन, इस जंग का सबसे बड़ा तनाव दिखाई दे रहा है दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइफलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य यानी 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) पर.

मरीन ट्रैफिक के रियल-टाइम डेटा और मैप को देखने पर जो तस्वीर सामने आ रही है, वह ग्लोबल इकोनॉमी के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है. दुनिया में शिपिंग ट्रैफिक को ट्रैक करने वाली एजेंसी MarineTraffic: Global Ship Tracking Intelligence के ताजा यानी सोमवार दोपहर 12 बजे के मैप को देखें तो पता चलता है कि ईरान की चेतावनी के बाद पर्शियन गल्फ, खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास समुद्र में सबकुछ थम सा गया है. समुद्र के नीले पानी पर रंग-बिरंगे आईकन से दर्शए गए जहाजों का यह जमावड़ा किसी मेले का हिस्सा नहीं, बल्कि हमले की जद में आने से ठिठकी हुई दुनिया की कहानी कह रहा है.

समुद्र में थम गई है रफ्तार: क्या कहता है ट्रैकर मैप

मैप पर नजर डालें तो होर्मुज स्ट्रेट, जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और ओमान की खाड़ी को जोड़ती है, वहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठहर सी गई है. मेरिटाइम ट्रैफिक के डेटा के अनुसार, इस स्ट्रेट के दोनों छोर पर सैकड़ों की संख्या में कार्गो वेसल और ऑयल टैंकर एक ही जगह खड़े दिखाई दे रहे हैं.

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Strait of Hormuz blockade
मैप सोर्सः marinetraffic.com

1. ईरान का बंदर अब्बास पोर्ट: मैप के ऊपरी हिस्से में ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट के पास हरे रंग के डॉट्स (कार्गो वेसल) का एक बड़ा जमावड़ा देखा जा सकता है. यह दर्शाता है कि ईरान ने अपने इस प्रमुख पोर्ट से जहाजों की निकासी को या तो रोक दिया है या सुरक्षा कारणों से जहाज आगे नहीं बढ़ रहे हैं. यहां पर आपको ज्यादा ऑयल टैंकर दिखाई नहीं देंगे, क्योंकि ईरान के ऑयल पर प्रतिबंध लगा हुआ था.

2. शारजाह और दुबई का तट: मैप के निचले हिस्से में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तटों पर स्थिति ज्यादा गंभीर दिख रही है. दुबई, शारजाह और अजमान के तटों के पास समुद्र का रंग लाल और हरा हो गया है. यहां लाल रंग के डॉट्स भारी संख्या में 'ऑयल टैंकर' को दर्शाते हैं, जबकि हरे डॉट्स 'कार्गो वेसल्स' हैं. ये जहाज होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश करने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा जोखिमों के कारण वे खुले समुद्र में ही लंगर डाले खड़े हैं.

3. फूजैराह और ओमान का तट: होर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर फूजैराह के पास भी जहाजों की लंबी कतार है. यह इलाका जहाजों के लिए ईंधन भरने और रुकने का मुख्य केंद्र है, लेकिन अभी यहां जहाजों का जमावड़ा किसी ट्रैफिक जाम जैसा लग रहा है.

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एशिया और दुनिया पर असर: तेल और ट्रेड की चुनौती

होर्मुज स्ट्रेट से पूरी दुनिया का लगभग 20 से 30 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है. करीब 20 मिलियन बैरल प्रति दिन. अगर ईरान युद्ध की वजह से इस रास्ते को लंबे समय तक बंद रखता है, तो इसका असर सबसे ज्यादा एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा.

तेल कीमतों में आग लगने की आशंका: भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं. जहाजों के इस तरह खड़े रहने का मतलब है कि दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई चेन टूट सकती है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक 100 डॉलर के पार जा सकती हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल महंगा होगा और महंगाई बढ़ेगी. भारत का करीब 85 प्रतिशत क्रूड ऑयल सप्लाय गल्फ देशों से ही आता है.

सिर्फ ऑयल ही नहीं, इस इलाके से बहुत सा साजो-सामान भारत समेत पूर्वी एशिया के देशों से खाड़ी देशों को सप्लाय होती है. भारत से ही बड़ी तादाद में खाद्यान्न और फल आदि इन देशों में जाते हैं. होर्मुज स्ट्रेट पर हुई नाकेबंदी का मतलब है खाड़ी देशों को होने वाली सप्लाय रुक जाना, और दूसरी तरफ भारत समेत बाकी एशिया में बैठे कारोबारियों पर संकट.

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एशियाई अर्थव्यवस्थाएं खतरे मेंः 'द इकोनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया की सबसे अमीर और बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस संकट के सामने सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं. क्योंकि खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकतर तेल पूर्व की ओर यानी एशिया की तरफ ही आता है. सप्लाई रुकने से भारत जैसे देशों के विदेशी मुद्रा भंडार और राजकोषीय घाटे पर बुरा असर पड़ सकता है.

महंगा होगा समुद्री व्यापार: जब जहाज समुद्र के बीच में घंटों या दिनों तक खड़े रहते हैं, तो उनका किराया और बीमा (Insurance) का खर्च बढ़ जाता है. युद्ध के खतरे वाले इलाकों से गुजरने वाले जहाजों का बीमा प्रीमियम कई गुना बढ़ चुका है. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक सामान से लेकर खाने-पीने की चीजों तक, सब कुछ महंगा हो जाएगा.

मेरिटाइम डेटा के ये छोटे-छोटे डॉट्स असल में दुनिया की धड़कनें हैं. अगर ये जहाज इसी तरह ठिठके रहे, तो वैश्विक बाजार में हड़कंप मच सकता है. होर्मुज स्ट्रेट में खामोश खड़े ये जहाज इस बात के गवाह हैं कि युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता, बल्कि यह हजारों मील दूर बैठी आम जनता की थाली और अर्थव्यवस्था को भी चोट पहुंचाता है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस समुद्री रास्ते पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस जाम को खोल पाती है या तनाव इसे और गहरा कर देता है.

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