जरा सोचिए- दो ग्लोबल लीडर्स. एक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरी इटली की फायरब्रांड पीएम जॉर्जिया मेलोनी. मीटिंग में सीरियस टॉक्स चल रहे हैं- ट्रेड, डिफेंस, टेक्नोलॉजी, AI. फिर उन्हीं बातों को ज्वाइंट प्रेस कान्फ्रेंस में आकर दोहराया जाए. कुछ डिप्लोमैटिक सर्कल्स में बैठे लोगों और फॉरेन पॉलिसी कवर करने वाले मीडिया को ही उसमें रुचि हो सकती है. लेकिन, इन सब रस्मो-रिवाज को परे रखकर अचानक मोदी 50 रुपए का मेलोडी चॉकलेट पैकेट निकालकर मेलोनी को गिफ्ट कर देते हैं. मेलोनी मुस्कुराते हुए कहती हैं, 'प्रधानमंत्री मोदी ने हमें गिफ्ट दिया… बहुत अच्छी टॉफी. मेलोडी!' और ये वीडियो पोस्ट सोशल मीडिया पर सनसनी बन जाती है.
इंटरनेट फट पड़ता है. #Melodi ट्रेंडिंग है. मीम्स बन रहे. बरसों से ठंडे पड़े पारले के शेयर ऊपर. सिर्फ मेलोडी के नाम पर. लोग कमेंट कर रहे हैं कि 'मोदी जी फ्लर्टिंग लेवल 1000'. ये कोई साधारण गिफ्ट नहीं था, ये था चॉकलेट डिप्लोमेसी का नेक्स्ट लेवल. कंट्रोवर्सी को कैश में बदलने का परफेक्ट मास्टरक्लास.
अब इसके उलट दो दिन पहले नार्वे में हुई ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस को याद कीजिए. मोदी से चिल्ला-चिल्लाकर सवाल पूछ रही पत्रकार के अलावा कुछ ऐसा नहीं हुआ, जिस पर चकल्लस होती. उस एक्टिविस्ट कम जर्नलिस्ट ने जो बखेड़ा खड़ा किया, वो सोशल मीडिया पर स्ट्रेस ही था. बहस कर रहे दोनों सिरे निगेटिविटी पर ही बात कर रहे थे. #मेलोडी को लेकर सिर्फ स्वाद लिया जा रहा है.
#मेलोडी की स्टोरी: सोशल मीडिया ने जोड़ी बना दी
2022 से जॉर्जिया मेलोनी इटली की पीएम हैं. राइट-विंग नेशनलिस्ट, बोल्ड वॉइस, कल्चर और रूट्स पर जोर - बिल्कुल मोदी जी वाली वाइब. दोनों लीडर्स बोल्ड हैं, बिना झिझक नेशनलिस्ट और सोशल मीडिया के स्टार. जब-जब दोनों मिले, उनकी सेल्फी वायरल हुईं- COP28, G7, G20. हर बार पूरा इंटरनेट दीवाना हुआ. मेलोनी ने खुद #मेलोडी हैशटैग यूज किया. सेल्फी पोस्ट की – 'Good friends at COP28, #मेलोडी'. भारतीय यूजर्स ने जैसे लॉटरी जीत ली. मीम्स बने – रोमांटिक एंगल, भाई-बहन वाला, पॉलिटिकल कपल, सब. कुछ बोले 'ये डिप्लोमेसी है', बाकी फुल मजा ले रहे थे. इनमें से ज्यादातर वे थे जो 90 के दशक में आई मूवी मैंने प्यार किया का डायलॉग नहीं भूले थे- ‘लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते’.
लीडर्स की पर्सनल केमिस्ट्री पर सबका फोकस रहता है. और लीडर्स ये अच्छी तरह समझते हैं कि ये Gen Z वाला टाइम है. पहले नेता सूट-बूट में फॉर्मल हैंडशेक करते थे. अब? सेल्फी, कैजुअल लाफ, वायरल मोमेंट्स. मोदी-मेलोनी डुओ ने इसे परफेक्टली प्ले किया है. मेलोनी ने कई बार #मेलोडी वीडियो शेयर किए. पीएम मोदी ने भी इग्नोर नहीं किया – बल्कि अगला लेवल ले गए. मेलोडी गिफ्ट देकर. दोनों जानते हैं कि सोशल मीडिया का कमेंट सेक्शन कितना पावरफुल है. पॉजिटिव, नेगेटिव, ट्रोल, दोनों सबको कैश कर लेते हैं. दोनों झेंपते या झिझकते नहीं. क्रिटिसिज्म, ट्रोलिंग और टीजिंग को भी कंटेंट बना लेते हैं.
चॉकलेट डिप्लोमेसी: 50 रु. का पैकेट, बिलियन डॉलर इम्पैक्ट
वो क्लासिक टॉफी एडः 'मेलोडी इतनी चॉकलेटी कैसे बनी?' 80-90 के दशक में बचपन गुजारने वालों को दूरदर्शन वाला यह विज्ञापन खूब याद होगा. मोदी जी ने उसी को डिप्लोमैटिक टूल बना दिया. ये सॉफ्ट पावर है. हार्ड डिप्लोमेसी (डिफेंस डील्स, ट्रेड एग्रीमेंट्स) के साथ सॉफ्ट पावर (कल्चर, फूड, मीम्स) मिलाओ तो एक विनिंग फॉर्मूला बनता. भारत अब ग्लोबल स्टेज पर कॉन्फिडेंट है, और अप्रोचेबल भी. मोदी जी की फॉरेन विजिट्स में यही पैटर्न है – हग्स, लोकल फूड ट्राई करना, यादगार गिफ्ट्स.
मेलोनी ने भी स्मार्ट मूव किया. गिफ्ट एक्सेप्ट किया, वीडियो पोस्ट किया, कैप्शन सिंपल. कोई डिफेंसिव नहीं. फुल कॉन्फिडेंस. दोनों सोशल मीडिया को कंट्रोल करते हैं, कंट्रोल नहीं होते. यंग जनरेशन फास्ट कंटेंट पसंद करती है. लंबे स्पीच नहीं, शॉर्ट रील्स, रिलेटेबल मोमेंट्स. मोदी-मेलोनी ने इसे समझ लिया. फॉर्मल प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ वायरल चॉकलेटी मोमेंट. ये दिखाता है कि पुरानी डिप्लोमेसी बदल रही है. लीडर्स अब पब्लिक फिगर भी हैं – अनफिल्टर्ड, बोल्ड, मीमेबल. विवाद को यूज करके पॉजिटिव स्टोरी बनाना भी स्किल है. दोनों की फॉलोइंग जबरदस्त है. मोदी ग्लोबल आइकन, मेलोनी यूरोप की राइजिंग स्टार. जब ये डुओ साथ आते हैं, आंखें गारंटीड. और आंखें यानी इन्फ्लुएंस यानी बैकडोर बेहतर डील्स.
बिग पिक्चर: भारत-इटली रिलेशंस
चॉकलेट सिर्फ स्वीट मोमेंट नहीं. रियल टॉक्स हो रहे हैं. ट्रेड बढ़ाना, डिफेंस कोऑपरेशन, टेक, स्पेस, टेररिज्म पर. जॉइंट स्ट्रैटेजिक प्लान चल रहा है. इटली G7 का बड़ा प्लेयर, भारत ग्लोबल साउथ की आवाज. पर्सनल केमिस्ट्री लीडर्स के लेवल पर ट्रस्ट बनाती है. जब दो पीएम कम्फर्टेबल होते हैं, उनकी टीम्स भी तेज फैसले ले पाती हैं. मोदी जी का इटली दौरा – पांच देशों की यात्रा का आखिरी चरण है. रोम में कोलोसियम, डिनर, कार राइड्स – कैंडिड फोटो. सब #मेलोडी वाइब्स.
मीटिंग्स में दोनों के बीच गर्मजोशी साफ झलकती है. सहज बातचीत, हंसी-मजाक, म्यूचुअल रिस्पेक्ट. मोदी से पहले हुई एक मुलाकात में मेलोनी ने कहते सुना गया था – 'You are the best, मैं भी वैसा बनने की कोशिश कर रही हूं'. मोदी जी हंसकर सुनते हैं. दोनों के बीच ये केमिस्ट्री फेक नहीं लगती. दोनों की आइडियोलॉजी मैच करती है – नेशन फर्स्ट, स्ट्रॉन्ग लीडरशिप, कल्चरल प्राइड.
#मेलोडी मीम्स में रोमांटिक फिल्टर्स, बॉलीवुड डायलॉग, 'इंगेजमेंट फार्मिंग' जोक्स. एक तरफ बोला गया 'डिप्लोमेसी स्वीट हो गई', दूसरी तरफ 'मोदी जी पारले प्रमोट कर रहे'. पारले बिक भी जाता तो मोदी और मेलोनी जैसे इन्फ्लुएंसर को अपने ब्रांड प्रमोशन के लिए हासिल नहीं कर पाता. असली बात ये है कि दोनों समझते हैं कि पर्सनल केमिस्ट्री से दो देशों के बीच ब्रिज बनता है. फॉर्मल टॉक्स जरूरी हैं, लेकिन ह्यूमन टच रिलेशन को लॉन्ग-लास्टिंग बनाता है. चॉकलेट गिफ्ट सिर्फ मीम के लिए नहीं है, ये सिग्नल भी था. 'हम फॉर्मल भी हैं, कैजुअल भी, और भारत-इटली की दोस्ती स्वीट है'.
मोदी-मेलोनी मास्टरक्लास: आज का टाइम है जहां लीडर्स सिर्फ पॉलिसी नहीं, पर्सनालिटी का भी ट्रांजेक्शन करते हैं. मोदी जी दशकों से कर रहे हैं. चाय पर चर्चा, मन की बात, सोशल मीडिया. मेलोनी भी उसी क्लास में. अगली बार जब कोई कहे कि 'पॉलिटिक्स बोरिंग है', #मेलोडी मोमेंट याद दिला दो. ₹50 का चॉकलेट पैकेट इंटरनेशनल हेडलाइंस बना सकता है. डिप्लोमेसी कभी इतनी स्वीट नहीं थी.
#मेलोडी फॉरएवर.