क्या ममता बनर्जी खुद को चुनावी चक्रव्यूह में घिरा हुआ महसूस कर रही हैं? ममता बनर्जी के सामने चौतरफा चुनौतियां तो हैं ही. लेकिन, ममता बनर्जी स्ट्रीट फाइटर भी हैं. कोई अभिमन्यु तो हैं नहीं. चुनाव आयोग के SIR के खिलाफ ममता बनर्जी सड़क पर मार्च से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी भी कर चुकी हैं - और सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से बेहद खुश भी हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अपीलीय न्यायाधिकरण से 21 अप्रैल तक जिनके नाम अतिरिक्त सूची में आ जाते हैं तो उनको मतदान करने का अधिकार मिलेगा.
चुनावी रैलियों में ममता बनर्जी बार बार दोहरा रही हैं कि उनके हाथ में कुछ नहीं है. सारा पावर फिलहाल चुनाव आयोग के पास है. असल में, ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर तबादले किए जाने से चुनाव आयोग से खफा हैं. और, चुनाव कैंपेन के दौरान लोगों को समझाने की कोशिश करती हैं कि चुनाव आयोग कुछ भी कर रहा है, केंद्र में बीजेपी सरकार के इशारे पर करता है.
पश्चिम बंगाल में जो चुनावी माहौल बना है, ममता बनर्जी को हर बात पर उसके हिसाब से अलग अलग तरीके से रिएक्ट करती हैं. जब राज्यपाल आरएन रवि लोकभवन से 'परिवर्तन' की बात करते हैं, तो ममता बनर्जी उसे अपमानजनक बताते हुए आरोप लगाती हैं कि उनको 'गाली' दी गई है.
एक चुनावी रैली के आखिर में ममता बनर्जी ने कुछ लाइनें पढ़ी हैं, जिसे लेकर बीजेपी नेता अमित मालवीय दावा कर रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस नेता ने चुनाव से पहले ही हार मान ली है. ममता बनर्जी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भी ऐसी ही लाइनें पढ़ी थीं, लेकिन नतीजे टीएमसी के पक्ष में आए थे - क्या ममता बनर्जी ने कोई इमोशनल कार्ड खेला है?
ममता बनर्जी का इमोशनल कार्ड
पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर में तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रैली को ममता बनर्जी ने शेरो-शायरी वाले अंदाज में खत्म किया. खास बात यह रही कि ममता बनर्जी ने जो पंक्तियां बोलीं उनमें 'तृणमूल' शब्द का जिक्र था. ऐसी कविता ममता बनर्जी ने जब पिछले लोकसभा चुनाव में पढ़ी थी, तो तृणमूल की जगह उसमें 'जिंदगी' शब्द सुनने को मिला था.
निश्चित तौर पर ममता बनर्जी ने तब भी अपने समर्थकों से इमोशनल अपील की थी. और, ताजा बयान भी बिल्कुल वैसा ही लगता है. वही भाव प्रेषित कर रहा है. नए प्रसंग में पुरानी वाली ही अपील है - और 'तृणमूल' शब्द के इस्तेमाल से यह और भी खास हो जाता है.
रैली के आखिर में ममता बनर्जी धन्यवाद के साथ लोगों के प्रति आभार प्रकट करती हैं. और उसके बाद हर तबके का अलग अलग शब्दों से अभिवादन करती हैं, नमस्कार, जय हिंद, वंदे मातरम, खुदा हाफिज... और तीन बार जय बांग्ला भी बोलती हैं.
रैली का समापन करते हुए ममता बनर्जी शेरो शायरी वाले अंदाज में कहती हैं कि फिर मुलाकात होगी. ममता बनर्जी कहती हैं, 'फिर मिलेंगे, रहा गुलशन तो फूल खिलेंगे, फिर जोड़ा फूल खिलेंगे, रहा तृणमूल तो फिर मिलेंगे।'
बाकी बातें अपनी जगह हैं, लेकिन ममता बनर्जी का रैली में तृणमूल शब्द का इस तरह इस्तेमाल करना थोड़ा हैरान करता है. हैरानी अपनी जगह है, और हर कोई इसे अपने अपने तरीके से समझने की कोशिश करेगा. मुमकिन है, ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों तक अपना संदेश पहुंचा भी दिया हो - लेकिन बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ममता बनर्जी की बात को अपने तरीके से समझा है, और वही समझाने की कोशिश की है.
बीजेपी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय का दावा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव से पहले ही हार मान गई हैं. ममता बनर्जी के 'रहा तृणमूल तो फिर मिलेंगे,' वाले हिस्से को आगे बढ़ाते हुए अमित मालवीय ने सोशल साइट X पर एक पोस्ट में लिखा है, पश्चिम बंगाल की जनता कह रही है, 'न रहेगा तृणमूल, न फिर मिलेंगे.' अमित मालवीय ने ममता बनर्जी के भाषण का वीडियो क्लिप भी शेयर किया है.
In a candid admission, Mamata Banerjee acknowledges that she has her back to the wall. At a public programme, she signs off by saying, “Raha Trinamool, toh phir milenge.”
— Amit Malviya (@amitmalviya) April 16, 2026
But the people of West Bengal are saying: “Na rahega Trinamool, na phir milenge.” pic.twitter.com/Nb99JppJhK
2024 के लोकसभा चुनाव में ममता ने क्या कहा था
बात ठीक दो साल पहले की है. अप्रैल का ही महीना था. लोकसभा चुनाव 2024 में ममता बनर्जी टीएमसी उम्मीदवार बिप्लब मित्रा के समर्थन में रैली करने पहुंची थीं. बालूरघाट लोकसभा क्षेत्र के कुमारगंज की रैली में ममता बनर्जी ने कहा था, ‘बीजेपी मुझे और अभिषेक को टार्गेट कर रही है... हम सेफ नहीं हैं, लेकिन हम केंद्र की सत्ताधारी पार्टी की साजिश से भी नहीं डरते... हम हर किसी से तृणमूल नेताओं और पश्चिम बंगाल के लोगों के खिलाफ साजिश के प्रति सावधान रहने का आग्रह करते हैं.’
दरअसल, ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के बयान की तरफ इशारा कर रही थीं. बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने तब कहा था, '...आप लोग देखिएगा, मैं अभी नहीं कहूंगा. ऐसा बम फटेगा कि टीएमसी संभल नहीं पाएगी.'
और फिर बीजेपी पर बेहद गंभीर इल्जाम लगाते हुए ममता बनर्जी ने कहा था, ये लोग हमारी जान भी ले सकते हैं.
ममता बनर्जी ने उस वक्त भी एक शेर पढ़कर अपनी भावना जाहिर की थी. बोलीं, ‘रहा गुलशन तो फूल खिलेंगे, रही जिन्दगी तो फिर मिलेंगे.’
चुनाव नतीजे आए तो मालूम हुआ कि बालूरघाट लोकसभा सीट टीएमसी ने बीजेपी के हाथों गंवा दिया है. टीएमसी उम्मीदवार बिप्लब मित्रा का मुकाबला बीजेपी के तत्कालीन बंगाल अध्यक्ष सुकांत मजूमदार से था. सुकांत मजूमदार 2019 में टीएमसी की अर्पिता घोष को हरा कर जीत हासिल की थी. सुकांत मजूमदार फिलहाल केंद्र सरकार में मंत्री हैं.
मौजूदा चुनाव में ममता बनर्जी ने उसी लाइन से एक शब्द बदल दिया है. 'जिंदगी' की जगह 'तृणमूल' कहा है, जो ममता बनर्जी की पार्टी के नाम में आता है. क्या ममता बनर्जी को विधानसभा चुनाव में 'तृणमूल' पर भी अब वैसा ही खतरा महसूस हो रहा है, जैसा लोकसभा चुनाव में 'जिंदगी' पर हो रहा था?