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मर्चेंट नेवी : छप्पर फाड़ कमाई वाला ‘ड्रीम करिअर’ कैसे बन गया सबसे र‍िस्‍की

यूक्रेन के नजदीक मिसाइल हमले में 4 भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत ने मर्चेंट नेवी के चमकते करियर पर खौफ का साया डाल दिया है. लाखों की टैक्स-फ्री सैलरी और ग्लैमरस लाइफस्टाइल देने वाला यह 'ड्रीम जॉब' अब बारूद के ढेर पर खड़ा है. जानिए आखिर कैसे ग्लोबल वॉर-जोन ने समुद्र में छिपे जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है.

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यूक्रेन के नजदीक काला सागर में रूसी मिसाइल स्ट्राइक का शिकार हुए जहाज MV Golden Leo पर सवार चार भारतीय नाविकों की जान चली गई. (AP Photo/Michael Shtekel)
यूक्रेन के नजदीक काला सागर में रूसी मिसाइल स्ट्राइक का शिकार हुए जहाज MV Golden Leo पर सवार चार भारतीय नाविकों की जान चली गई. (AP Photo/Michael Shtekel)

यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से मक्का भरकर रवाना हुए कमर्शियल जहाज 'एमवी गोल्डन लियो' (MV Golden Leo) पर 19 जुलाई 2026 को हुए रूसी  मिसाइल हमले में चार भारतीय मर्चेंट नेवी ऑफिसर्स और क्रू की मौत हो गई है. गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर तीन क्रूज मिसाइलें दागी गईं थीं. विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, जहाज पर सवार 17 क्रू मेंबर्स में से 5 भारतीय थे. इनमें से चार सीधे मिसाइल का टारगेट बन गए. जिनमें केरल के 26 वर्षीय चीफ ऑफिसर अखिल जोवन और यूपी के 21 वर्षीय ऑर्डिनरी सीमैन अभिषेक निषाद शामिल थे. गंभीर रूप से घायल एक अन्य भारतीय अस्पताल में भर्ती है.

इस हमले ने समुद्री ट्रांसपोर्ट की रीढ़ माने जाने वाले भारतीय नाविक समुदाय और उनके परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है. ग्लोबल ट्रेड की लाइफ लाइन माने जाने वाले मर्चेंट नेवी को वैसे तो  एक बेहद आकर्षक, टैक्स-फ्री मोटी सैलरी और दुनिया घूमने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए 'सपनों का करिअर' माना जाता रहा है. भारत में मिडिल क्लास परिवारों के लिए यह पेशा आर्थिक समृद्धि का सबसे बड़ा जरिया रहा है. लेकिन हाल के वर्षों, खासकर 2025 और 2026 में दुनिया भर में भड़के जियो-पॉलिटिकल टेंशन और वॉर ने इस चमकीले करियर को दुनिया के सबसे खतरनाक और जोखिम भरे जॉब्स में बदल दिया है.

आज स्थिति यह है कि समुद्र में तैरते विशालकाय जहाज और उन पर सवार बेकसूर नाविक, ग्लोबल पावर्स और रीजनल कॉन्फ्लिक्ट के बीच सीधे निशाने पर आ गए हैं. और मर्चेंट नेवी प्रोफेशनल्स की लाइफ बारूद के ढेर पर आकर खड़ी हो गई है.

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marine war zone
दुनिया के सबसे व्यवस्ततम समुद्री मार्गों पर छिड़ी जंग मर्चेंट नेवी प्रोफेशनल्स के लिए जानलेवा खतरा बन गया है. (AI generated info-graphics)

दुनिया भर के बड़े वॉर-जोन, खतरे में समुद्री ट्रेड रूट्स

ग्लोबल ट्रेड का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्गों के जरिए होता है. लेकिन वर्तमान में दुनिया के कई प्रमुख समुद्री 'चोक पॉइंट्स' और जलडमरूमध्य युद्ध के मैदान बन चुके हैं:

1. हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और पर्शियन गल्फ: क्रूड ऑयल की ग्लोबल सप्लाय के लिए यह रूट सबसे अहम है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण यह पूरा इलाका एक एक्टिव वॉर-जोन में तब्दील हो चुका है. ईरान द्वारा की गई नाकेबंदी और ड्रोन हमलों ने इस रूट को बेहद असुरक्षित बना दिया है.

2. लाल सागर और अदन की खाड़ी: हूती विद्रोहियों और क्षेत्रीय ताकतों के हमलों के कारण यह मार्ग पिछले कई महीनों से तनाव में है. हालांकि, समय-समय पर सीजफायर की स्थितियां बनती हैं, लेकिन इजरायल या पश्चिमी देशों से जुड़े किसी भी जहाज पर हमलों का खतरा लगातार मंडरा रहा है.

3. ओमान की खाड़ी: हॉर्मुज के पास होने के कारण यह क्षेत्र मिसाइल और ड्रोन हमलों का नया सेंटर बनकर उभरा है.

4. काला सागर और अजोव सागर: रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर यह समुद्री इलाका समुद्री बारूदी सुरंगों (Naval Mines) और मिसाइल हमलों के कारण लगातार 'हाई-रिस्क ज़ोन' बना हुआ है.

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5. अन्य क्षेत्र: इसके अलावा अफ्रीका का गिनी तट (Gulf of Guinea) और सोमालिया के तटीय इलाके समुद्री डकैती और स्थानीय संघर्षों के कारण पहले से ही जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल हैं.

वॉर-जोन में पैसा डबल लेकिन जान की गारंटी नहीं

जब कोई जहाज अंतरराष्ट्रीय मैरीटाइम एजेंसियों द्वारा घोषित 'हाई रिस्क ज़ोन' या 'वॉर ज़ोन' (जैसे ओडेसा या पर्शियन गल्फ) में प्रवेश करता है, तो नाविकों को नियम के तहत 100% वॉर बोनस (Hazardous Area Allowance) दिया जाता है. यानी जिस महीने जहाज खतरे के इलाके से गुजरता है, उस महीने सैलरी दोगुनी हो जाती है. लेकिन 'एमवी गोल्डन लियो' की घटना यह बयां करती है कि दोगुनी सैलरी भी अब इस खौफ को कम नहीं कर पा रही है.

जहाजों पर हमलों की हालिया घटनाएं और भारतीय नाविकों की टेंशन

दुनियाभर की मर्चेंट शिपिंग में भारतीय नाविकों की संख्या बहुत बड़ी है. 2025 के आंकड़ों के अनुसार 3.2 लाख से अधिक भारतीय नाविक इस क्षेत्र में कार्यरत हैं. यही कारण है कि इन युद्धों में सबसे ज्यादा प्रभावित भारतीय ही हो रहे हैं. हाल के महीनों में हुई कुछ प्रमुख घटनाएं इस खतरे की भयावहता को दर्शाती हैं:

1. एमटी सेटेबेलो (MT Settebello) पर हमला (जून 2026): यह हाल के दिनों में भारतीय नाविकों के साथ हुई सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है. पर्शियन गल्फ में इस टैंकर पर हुए भीषण हमले में चालक दल के 24 भारतीय सदस्यों में से 21 को तो बचा लिया गया, लेकिन 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई.

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2. एमटी स्काईलाइट (MT Skylight) त्रासदी (1 मार्च 2026): पलाऊ के झंडे वाले इस टैंकर पर इंजन रूम को निशाना बनाकर मिसाइल हमला किया गया. इस हमले में बिहार के कैप्टन आशीष कुमार और राजस्थान के नाविक दलीप सिंह की मौके पर ही मौत हो गई.

3. एमटी मारीवेक्स (MT Marivex) की जब्ती (जून 2026): नाकेबंदी के नियमों के उल्लंघन के आरोप में इस जहाज को अमेरिकी फोर्सेस द्वारा निशाना बनाया गया, जिसमें 24 भारतीय नाविक सवार थे. बाद में ओमान की मदद से क्रू को रेस्क्यू किया गया.

4. एमटी जलवीर (MT Jalveer) पर हमला (जून 2026): ओमान के शिनास पोर्ट के पास इस कमर्शियल जहाज पर हमला हुआ, जिसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया.

5. हॉर्मुज में महीनों तक फंसे हजारों नाविक: फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच टकराव बढ़ने के बाद ईरान की नाकेबंदी के कारण लगभग 23,000 भारतीय सीफेयरर्स (Seafarers) महीनों तक समुद्र के बीचों-बीच जहाजों पर फंसे रहे. नाविकों ने बताया कि उनके जहाजों से महज 10-15 मीटर की दूरी पर हेलीकॉप्टर क्रैश हो रहे थे और मिसाइलें गुजर रही थीं.

मर्चेंट नेवी, जिसके जॉब प्रोफाइल में है लक्जरी और खूब पैसा

जोखिम बढ़ने के बावजूद इस जॉब में मिलने वाला पैसा और सुविधाएं आज भी युवाओं को आकर्षित करती हैं. मर्चेंट नेवी के काम को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जाता है:

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1. डेक डिपार्टमेंट और नेविगेशनः

जिसमें शामिल होता है कैप्टन, जहाज का सर्वोच्च कमांडर, जो पूरे जहाज, क्रू और कार्गो की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होता है. इसके अलावा चीफ ऑफिसर, जो कार्गो लोडिंग/अनलोडिंग और डेक क्रू का मैनेजमेंट देखता है. सेकंड व थर्ड ऑफिसर, जो नेविगेशन, वॉच-कीपिंग और लाइफ-सेविंग उपकरणों की देखरेख करते हैं.

2. इंजन डिपार्टमेंट, मशीनरी और मेंटिनेंसः

जिसमें शामिल होता है चीफ इंजीनियर, जो मेन इंजन और सभी मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल सिस्टम्स का इंचार्ज होता है. इसके अलावा सेकंड, थर्ड व फोर्थ इंजीनियर होते हैं, जो प्रोपल्शन सिस्टम, जनरेटर और तकनीकी खराबी को ठीक करने का काम करते हैं.

3. सैलून/कैटरिंग डिपार्टमेंटः

इसमें आते हैं चीफ कुक और स्टीवर्ड, जो क्रू के लिए भोजन और रहने की व्यवस्था का प्रबंधन करते हैं.

लेकिन, अब बदले में मिल रहा है तनाव और जानलेवा खतरा

मैरीटाइम यूनियनों और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए सर्वेक्षणों के अनुसार नाविकों में मानसिक तनाव और पीटीएसडी बढ़ रहा है. वॉर जोन से गुजरते समय जहाजों पर ब्लैकआउट रखा जाता है, रडार अलार्म बजती रहती हैं और मिसाइल हमलों का डर रहता है. ऐसे में 75% से अधिक सीफेयरर्स अत्यधिक डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझ रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय मैरीटाइम नियमों के तहत नाविकों को अधिकार है कि वे वॉर ज़ोन में जाने वाले जहाजों पर जाने से मना कर दें, लेकिन नौकरी जाने के डर और कंपनियों के दबाव के चलते युवाओं को मजबूरी में यह जोखिम उठाना पड़ता है.

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यूक्रेन के ओडेसा तट पर 'एमवी गोल्डन लियो' में लगी मिसाइल की आग केवल एक जहाज का हादसा नहीं है, बल्कि उस भरोसे पर प्रहार है जिसके दम पर भारत के लाखों युवा मर्चेंट नेवी का रुख करते हैं. छप्पर फाड़ सैलेरी का यह पेशा अब बारूद की गंध से भर चुका है. जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमर्शियल जहाजों को युद्ध के मुहाने से बाहर रखने की सख्त गारंटी नहीं मिलती, तब तक हर नाविक के परिवार के लिए समुद्र की हर लहर एक अनजाना खौफ लेकर आती रहेगी.

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