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ममता बनर्जी vs शुभेंदु अधिकारी... क्या भवानीपुर में रिपीट होगा नंदीग्राम का इतिहास, SIR से फंसा पेंच

ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच चुनावी मुकाबला पांच साल बाद फिर से देखने को मिलने वाला है. बीजेपी की पहली लिस्ट में शुभेंदु अधिकारी का नाम आने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने भी ममता बनर्जी को भवानीपुर से उम्मीदवार घोषित कर दिया है - देखना है, नया संग्राम भी नंदीग्राम जैसा होता है या बिल्कुल अलग. SIR के कारण यहां काफी सीन बदला हुआ है.

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ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी एक फिर आमने सामने भिड़ने जा रहे हैं, लेकिन इस बार भवानीपुर के मैदान में. (Photo: PTI)
ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी एक फिर आमने सामने भिड़ने जा रहे हैं, लेकिन इस बार भवानीपुर के मैदान में. (Photo: PTI)

पांच साल बाद चुनाव मैदान में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी फिर से आमने सामने होने जा रहे हैं. सिर्फ मैदान का नाम बदला है. 2021 में नंदीग्राम था, 2026 में भवानीपुर हो गया है. नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को शिकस्त दी थी, भवानीपुर का रिजल्ट 4 मई को मालूम होगा. 

बीजेपी ने ममता बनर्जी को 2021 में नंदीग्राम से लड़ने के लिए मजबूर किया था, और अब 2026 में भवानीपुर से न हटने के लिए भी पहले से ही दबाव बना दिया था. अगर ममता बनर्जी का कोई और प्लान होगा तो भी भवानीपुर से चुनाव मैदान में उतरना पड़ा. ममता बनर्जी फिलहाल भवानीपुर से ही विधायक हैं. 

शुभेंदु अधिकारी का नाम बीजेपी की पहली ही लिस्ट में सामने आया है, और तृणमूल कांग्रेस ने तो पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. ममता बनर्जी भवानीपुर से ही टीएमसी उम्मीदवार हैं. 

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं. पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को होगी, और दूसरे चरण की 29 अप्रैल को - वोटों की गिनती 4 मई को होगी. 

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बीजेपी की भवानीपुर स्ट्राइक

2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए राहत की बात बस इतनी ही थी कि नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हरा दिया था. ममता बनर्जी की सत्ता में वापसी का मलाल तो था ही, बीजेपी को 100 सीटों से भी कम पर सिमट जाने की तकलीफ तो थी ही. बीजेपी को पिछले चुनाव में 77 विधानसभा सीटें मिली थीं. 

बीजेपी में अगले चुनाव की तैयारी तो नतीजे आने के दिन ही शुरू हो जाती है. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने तैयारियां तेज कर दी. शुभेंदु अधिकारी तो बंगाल का मोर्चा पांच साल से संभाल रहे थे, भवानीपुर के लिए स्पेशल टास्क अलग से दे दिया गया. 

हो सकता है, शुभेंदु अधिकारी के लिए भवानीपुर से चुनाव लड़ना सूली पर चढ़ने जैसा लग रहा हो, लेकिन बीजेपी कवर फायर और बैक अप तो दे ही रही है - और ध्यान देने वाली बात यह है कि ममता बनर्जी को भी बहुत पहले ही बीजेपी की रणनीति की भनक लग गई थी - पिछले साल तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बातचीत में ममता बनर्जी ने ऐसी आशंका भी जताई थी. 

14 अक्टूबर, 2025 को कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम सहित सीनियर टीएमसी नेताओं के जमावड़े को फोन पर संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा था, 'मैं देख रही हूं... आजकल कई जगह गरीबों की झुग्गियों को तोड़ा जा रहा है, और वहा बड़े आवासीय प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं... मैं इसका समर्थन नहीं करती... हमारे वोटर वहां से हटाए जा रहे हैं... भवानीपुर को योजनाबद्ध तरीके से बाहरी लोगों से भरा जा रहा है.'

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अगले ही दिन, 14 अक्टूबर, 2025 को शुभेंदु अधिकारी ने सरेआम ऐलान किया, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पूरा हो जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस चीफ ममता बनर्जी को भवानीपुर में हराया जाएगा. बोले, विधानसभा क्षेत्र के 8 में से 5 वार्ड में बीजेपी बढ़त बना चुकी है. 

शुभेंदु अधिकारी पहले भी ऐसी बातें बोलते आ रहे थे, लेकिन ममता बनर्जी का बयान आने के बाद फिर से यह दावा किया था. बीजेपी की पहली लिस्ट आने के साथ ही शुभेंदु अधिकारी और पार्टी की रणनीति भी सामने आ गई. 

ममता बनर्जी ने भवानीपुर में बसाए जाने वालों के लिए 'बोहिरागोटो' शब्द का इस्तेमाल किया था. टीएमसी नेता अक्सर बाहरी लोगों को 'बोहिरागोटो' कह कर बुलाते हैं. विशेष रूप से ऐसे लोग जिनकी मातृभाषा बांग्ला नहीं है. ममता बनर्जी को जब लगा कि दांव कहीं उलटा न पड़ जाए, तो लगे हाथ सफाई भी दे डाली.

1. ममता बनर्जी ने समझाया कि जो लोग वास्तव में रहने और काम करने के लिए राज्य में आते हैं, वे सभी बंगाल के लोग ही माने जाने हैं. बोलीं, लेकिन वे जो बाहर से आकर अचानक धावा बोल देते हैं. बेशुमार पैसे खर्च करते हैं. जमीन और घर खरीदते हैं. और फिर स्थानीय लोगों की जगह काबिज हो जाते हैं - असल में 'बोहिरागोटो' वे ही हैं. असल में, भवानीपुर में गुजरात और बिहार से आए हुए लोगों के साथ साथ सिखों और मारवाड़ी समुदाय की भी अच्छी आबादी है. 

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2. भवानीपुर को लेकर ममता बनर्जी का बयान महत्वपूर्ण इसलिए भी माना जा सकता है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और टीएमसी के बीच भवानीपुर विधानसभा सीट पर वोटों का फासला काफी कम हो गया था. 2021 में ममता बनर्जी ने 58,832 वोटों से जीत हासिल की थी, जबकि 2024 के आम चुनाव में विधानसभा में ये अंतर घटकर 8,297 वोट रह गया था. भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र, कोलकाता साउथ लोकसभा सीट में आता है.

3. शुभेंदु अधिकारी कोलकाता नगर निगम के जिन वार्डों का उदाहरण दे रहे हैं, वे हैं - 63, 70, 71, 72, और 74, जहां बीजेपी को बढ़त मिली थी. वार्ड नंबर 73, 77 और 82 में तृणमूल कांग्रेस ने बढ़त बनाई थी.

क्या SIR के बाद भवानीपुर की वोटर लिस्ट निर्णायक बनेगी?

रिपोर्ट के अनुसार, SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत 28 फरवरी को आई फाइनल लिस्ट से मालूम होता है कि भवानीपुर विधानसभा में 47 हजार नाम काट दिए गए हैं, जबकि 14 हजार वोटर जांच के दायरे में हैं. ये लोग वोट दे पाएंगे भी या नहीं, इस पर सवाल है. 

SIR के खिलाफ सड़क पर मार्च से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपने केस की पैरवी करने वाली ममता बनर्जी का दावा है कि अगर वोटर लिस्ट में एक भी नाम बचेगा, तब भी भवानीपुर से वही चुनाव जीतेंगी. 

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कोलकाता के नेताजी सुभाष इंडोर स्टेडियम में जमा लोगों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, 'मैं BJP के उन नेताओं को जानती हूं, जिन्होंने चुनाव क्षेत्रों से 10 हजार से 30 हजार मतदाताओं के नाम हटवाए हैं, जहां तृणमूल कांग्रेस को जीत हासिल हुई है... मैंने आपको अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर का उदाहरण दिया है... लेकिन मैं आपको बता दूं... अगर मतदाता सूची में सिर्फ एक ही वोटर बचा हो, तब भी मैं भवानीपुर से जीतूंगी.'

भवानीपुर में निर्णायक वोटर किसके

कोलकाता के बीचोंबीच बसा भवानीपुर इलाका ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता रहा है. और, राजनीतिक रूप से भवानीपुर ममता बनर्जी के घर के रूप में सबसे ज्यादा जाना जाता है. करीब करीब वैसे ही जैसे नंदीग्राम शुभेंदु अधिकारी का गढ़ माना जाता है - पांच साल पहले शुभेंदु अधिकारी के चैलेंज करने पर ममता बनर्जी नंदीग्राम पहुंच गई थीं, इस बार शुभेंदु अधिकारी खुद भवानीपुर पहुंचे हैं. 

1. 2011 से, जब से ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनी हैं, भवानीपुर सीट पर तृणमूल कांग्रेस का ही कब्जा बना हुआ है. दो बार उपचुनाव हुए और तब भी भवानीपुर टीएमसी के ही कब्जे में रहा. 

2. 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से चुनाव हार जाने के बाद ममता  बनर्जी ने भवानीपुर का ही रुख किया. टीएमसी के टिकट पर विधायक बने शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इस्तीफा देकर ममता बनर्जी के लिए सीट खाली कर दी, और उपचुनाव जीतकर ममता बनर्जी विधानसभा पहुंचीं. 

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2011 में भी बिल्कुल ऐसा ही हुआ था, जब ममता बनर्जी के लिए सुब्रत बख्शी ने ममता बनर्जी के चुनाव लड़ने के लिए सीट खाली कर दी थी. 2016 में भी ममता बनर्जी भवानीपुर से ही विधायक चुनी गई थीं. 

3. भवानीपुर में करीब 20 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं. करीब 40 फीसदी बंगाली वोटर हैं - और करीब 40 फीसदी मिलीजुली आबादी है, जिसमें गुजराती, मारवाड़ी, पंजाबी और बिहार से जाकर बसे हुए लोग हैं.

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