मैं मनोवैज्ञानिक नहीं हूं. मेरे पास मनोविज्ञान, मनोचिकित्सा, व्यवहार विज्ञान, या क्लीनिकल एनलिसिस में कोई प्रशिक्षण नहीं है. हां, मैं वर्षों से डोनाल्ड ट्रंप को देखता आ रहा हूं. वही पहले के तीनों को मिलाकर भी कहीं अधिक भारी अनुभव है और जिसने मेरे भीतर गहरे घाव छोड़े हैं. चूंकि टेलीविज़न पर हर बिना सनद वाले इंसान को अब विशेषज्ञ मान लिया जाता है, तो लीजिए, मैं भी अपने निष्कर्ष यहां इंटरनेट पर पेश करता हूं. तैयार हो जाइए.
डोनाल्ड ट्रंप जब जन्मे थे तो मुंह में चांदी का चम्मच था और सिर पर सोने से बाल. उन्हें “ऑरेंज मैन” इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे विटामिन C से भरपूर हैं. अब C विटामिन के विस्तार और फायदे में जाने की बजाय हम यह मानकर चलें कि बहुत C फॉर करेंसी या D फॉर डॉलर के बीच इनकी परवरिश हुई. भगवान की दया से सबकुछ था. दौलत, शोहरत, इज़्ज़त, सब. पर पूत सपूत और धन संचय का इतिहास.
यह शख़्स ढाई शब्दों के लिए मशहूर है: You're fired. यह उन्होंने The Apprentice में कहा. यह उन्होंने व्हाइट हाउस में कहा. यह वे अपनी पूरी ज़िंदगी कहते आए हैं, बढ़ते उत्साह और घटते औचित्य के साथ. शुरू से ही यह शब्द उन पर फ़ब्ता था, क्योंकि वे हमेशा ऐसे लोगों की संगत में रहे जिन्हें वे निकाल सकते थे. हाल ही में उन्होंने बिना किसी संकोच के स्वीकार किया कि वे उन सफल लोगों की संगत से अधिक लूज़र्स की संगत पसंद करते हैं जो उनकी सफलताओं की तारीफ़ें सुनना चाहते हैं. अचीवर्स अपनी सुनाने लगते हैं. ट्रंप सुनना वैसे ही पसंद नहीं करते. दूसरों की महानता के किस्से क्यों सुनें? यह कोई संयोग नहीं, यह एक कला है. जो आदमी किसी बराबर वाले को बर्दाश्त नहीं कर सकता, उसे अपना दर्शक खरीदना पड़ता है.
ट्रंप कॉर्पोरेशन ने उन लोगों को काम पर रखा जो उन्हें पसंद आए. जब वे लोग उन्हें पसंद करना बंद कर देते, तो उन्हें निकाल दिया. सबसे हॉट कंपनी. सबसे हॉट बॉस. इवांका सबसे हॉट. मेलानिया सबसे हॉट. ट्रम्प के दायरे में हर चीज़ और हर इंसान "सबसे हॉट" है जब तक वे उनके जूती के नीचे बने रहें.
डोनाल्ड ट्रंप दशकों तक उन लोगों की छाती पर मूंग दलते रहे जो उनके एहसानों के तले पहले से दबे मिले थे. जिन्हें उन्होंने सीधे-सीधे मोल लिया था इस्तेमाल के लिए. अधीनस्थ, कर्मचारी, ठेकेदार जिन्हें उन्होंने ठगा. वकील जिन्हें उन्होंने पकाया. महिलाएं जिनका मुंह बंद किया. वे अपनी कंपनी में पूर्ण सत्ता के इतने अभ्यस्त हो गए कि राष्ट्रपति पद पर पहुंचते-पहुंचते उनकी बुनियादी समझ ही गड़बड़ा गई थी.
उन्होंने सोचा था कि ओवल ऑफ़िस एक बड़ा बोर्डरूम है. साइज़ के बारे में वे ग़लत भी नहीं थे. पहला कार्यकाल एक विस्तारित ओरिएंटेशन सत्र था जिसमें अमेरिकी संस्थाओं ने धैर्यपूर्वक उन्हें समझाया कि गवर्नर चुने जाते हैं, न्यायाधीश स्वतंत्र होते हैं, और प्रेस को सवाल पूछने के लिए निकाला नहीं जा सकता. उन्होंने इनमें से कुछ नहीं सुना. उन्होंने FBI निदेशक को निकाला. अटॉर्नी जनरल को निकाला. विदेश मंत्री (वहां सचिव), रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, और लगभग बाकी सभी को निकाला. अक्सर एक ट्वीट से, कभी-कभी हवाई जहाज़ में उड़ते-उड़ते ही यह काम कर दिया. निकालने के बाद उन्हें "कमज़ोर" और नियुक्त करने से पहले "प्रतिभाशाली" कहते थे, और इन दो आकलनों के बीच का अंतराल कभी-कभी मात्र एक सप्ताहांत का होता था.
जनवरी 2021 में जब वे व्हाइट हाउस से विदा हुए, तो अमेरिका ने एक सामूहिक राहत की सांस ली. चार साल की सापेक्षिक शांति रही. फिर वे वापस आए. इस बार राष्ट्रपतित्व सीखने वाले आदमी की तरह नहीं, बल्कि हिसाब चुकता करने वाले आदमी की तरह. ओवल ऑफ़िस, उनकी मर्जी के मुताबिक सजाया गया, व्हाइट हाउस में बुलडोज़र मंगवाया गया. एक नया बॉलरूम बनवाया गया. ओवल ऑफ़िस एक नए तरह के प्रदर्शन का मंच बन गया. विश्व नेताओं का सार्वजनिक अपमान. कैमरे के सामने.
आपने वे वीडियो देखे हैं. सबने देखे हैं. उन्होंने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से मुलाक़ात के दौरान खड़े होने को कहा जैसे कोई मास्साब हाज़िरी ले रहे हों. उन्होंने अपने यहां आने वाले नेताओं से कैमरों के सामने अपनी महानता के गुणगान करवाए. सूट पहने वयस्क पुरुषों को ज़ुबानी साष्टांग दंडवत करते देखा गया. उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को "कमज़ोर" कहा. यह टिप्पणी उस आदमी की मुंह से बड़ी दिलचस्प है जिसे वियतनाम युद्ध से बचने के लिए डॉक्टर का पर्चा चाहिए था. उन्होंने सऊदी नेतृत्व को ऐसे लहजे में बताया जो किसी सामंत को भी शर्मिंदा कर दे. उन्होंने ज़ेलेंस्की को अपने ही ओवल ऑफ़िस में अपराधी की तरह खड़ा किया. डांटते और लेक्चर देते हुए, जबकि कैमरे चलते रहे और दुनिया उस विशेष चुप्पी में देखती रही जो सार्वजनिक अपमान के बाद छा जाती है.
उन्होंने कहा कि मैक्रों की पत्नी मैक्रों को सूत देती है और प्रेस को यह भी बताया कि मैक्रों का जबड़ा ब्रिजिट ने तोड़ा था. उन्होंने हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "महान मित्र, शानदार इंसान, ज़बरदस्त नेता" कहा. और फिर बातचीत की रफ़्तार को ज़रा भी धीमा किए बिना भारत पर 26% टैरिफ़ थोप दिया. ऐसे दोस्तों के होते हुए दुश्मन की क्या ज़रूरत वाली पुरानी कहावत खुद-ब-खुद लागू हो जाती है.
हेनरी किसिंजर ने एक बार कहा था कि अमेरिका का दुश्मन होना ख़तरनाक है और उसका दोस्त होना घातक. इसे हमारे दौर के लिए दोबारा लिखा जाना चाहिए: डोनाल्ड का दुश्मन होना ख़तरनाक है और उनका दोस्त होना घातक. एलन मस्क से पूछिए. जिन्होंने वह रॉकेट बनाया जो ट्रंप को अमेरिकी राजनीति के अंतरिक्ष की कक्षा में वापस ले गया, अभियान पर दस करोड़ डॉलर ख़र्च किए, एक नया DOGE विभाग बनाया, निजी क़ीमत पर सरकारी विभागों को दुरूस्त किया, और अंततः जब अपनी उपयोगिता खो दी तो "ट्रेन रैक" कहलाए और सीधे दरवाज़ा उधर है. जो आदमी लोगों को निकालता है, वह एक दिन पाता है कि बचे हुए लोग केवल वही हैं जो निकाले जाने का इंतज़ार कर रहे हैं.
यहां मनोवैज्ञानिक संरचना कोई जटिल नहीं है. इसके लिए न फ्रॉयड चाहिए, न युंग, न DSM-5. एक लड़का जो इतना अमीर था कि हां ख़रीद सके. एक वयस्क जिसने “हाँ-जी ट्रंप जी" बोलने वालों को इर्द भी रखा और गिर्द भी. एक टेलीविज़न पर्सनाल्टी जिसने लोगों को फायर करना मनोरंजक बना दिया. एक राजनेता जिसे बआसानी पता चल गया कि पूरे देश को एक रियलिटी शो की तरह चलाया जा सकता है. बशर्ते आप पटकथा पर कसा हुआ नियंत्रण रखें .नैरेटिव. विमर्श.
राजा के बदन पर सूत नहीं है, ये सब जानते थे राजा के सिवाय. उस कहानी में एक निर्दोष बालक राजा को ये बताता है. हम सब ये किस्सा जानते हैं. ट्रंप को कोई बालबुद्धि नहीं चाहिए ये बताने के लिए. वे स्वयं बालबुद्धि हैं और वे स्वयं जानते हैं , दरबार जानता है. चौराहे पर खड़ी भीड़ जानती है. सब जानते हैं. मामला पूर्ण पारदर्शी है.
एपस्टीन द्वीप के उनके क़िस्से अभी के लिए सुविधाजनक रूप से संपादित (रेडैक्टेड) हैं. वे सामने आएंगे. हमेशा आते हैं. लेकिन ट्रम्प ने अपने लिए कुछ जबरदस्त बना लिया है: एक ऐसी छवि जो बेशर्मी के कवच से इतनी सुरक्षित है कि कोई भी खुलासा उसे भेद नहीं सकता. हर रहस्योद्घाटन “विच हंट" बन जाता है. हर आरोप "झूठ" बन जाता है. हर सज़ा उनके ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया गया राजनीतिक हथियार बन जाती है. इस आदमी को उत्तरदायी ठहराया गया, अभियुक्त बनाया गया, दोषी ठहराया गया, महाभियोग लगाया गया. इनमें से हर घटना के एवज़ में उन्होंने और धन अर्जित किया और राजनीतिक ताक़त भी.
उन्हें निर्दोष होने की ज़रूरत नहीं. बस यह काफ़ी है कि उनके दर्शक यह मान लें कि दोष या दोषमुक्त होना अप्रासंगिक है. नंगे आदमी की छवि ख़राब नहीं की जा सकती. यह है अंतिम निदान. न घातक नार्सिसिज़्म, न सोशियोपैथी, न वे लेबल जो डिग्रीधारी विशेषज्ञ सुरक्षित दूरी से सावधानीपूर्वक चिपकाते रहे हैं. असली निदान सरल है. और इसीलिए और भी भयावह है.
उन्हें एक ऐसा फ़ॉर्मूला मिल गया जो काम करता है. जो आदमी कभी ग़लत नहीं हुआ, उसे सुधारा नहीं जा सकता.जो आदमी जवाबदेही जानता ही नहीं, उसे जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता. जो आदमी 50 साल से हर असहमत व्यक्ति को फायर करता आया हो, उसके भीतर आत्म-सुधार का कोई तंत्र नहीं बचता. कोई भीतरी आवाज़ नहीं जो कहे कि शायद इस बार, शायद यहां, शायद इन परमाणु शक्तियों के मामले में, मुझे किसी और की बात सुननी चाहिए.
चांदी का चम्मच अभी भी उनके मुंह में है. सुनहरे बाल अभी भी अपनी जगह पर हैं. नारंगी चमक जारी है चाहे स्रोत जो भी हो. वे हमेशा की तरह "सबसे हॉट" हैं. हाथ जल सकता है. सुरक्षा के लिए दूरी बनाए रखें.