विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की दावोस बैठक लंबे समय से पश्चिम के नेतृत्व वाले बहुपक्षीय वैश्विक ढांचे का प्रतीक रही है. पर इस बार एक साफ़ संदेश उभरा है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सनक भरी धमकियों और एक्शन के चलते पश्चिमी देशों के भीतर ही बदलाव की आवाज़ें तेज़ हुई हैं. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डर लेयेन ने जिस तरह अमेरिका के साथ सहयोग की बात करते हुए उसके कृत्यों की निंदा की है उसका संदेश बहुत साफ है.
दोनों नेताओं ने साफ़ शब्दों में कहा कि पुरानी वैश्विक व्यवस्था अब समाप्त हो चुकी है और इसे वापस लाने की कोई इच्छा नहीं है. हमें पता है कि पुराना वैश्विक क्रम अब लौटकर नहीं आने वाला है. हमें शोक मनाने के बजाय आगे की रणनीति पर ध्यान देना होगा.
अपने कड़े भाषण में मार्क कार्नी ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक सुखद कल्पना का अंत कर दिया है और एक कठोर वास्तविकता की शुरुआत कर दी है. उर्सुला फ़ॉन डर लेयेन ने भी कहा कि बीती चीज़ों को वापस लाने की कोशिश करने से वे संरचनात्मक निर्भरता ठीक नहीं होंगी, जिनके साथ हम आज जी रहे हैं.
दोनों नेताओं ने कहा कि हम ऊर्जा सुपरपावर हैं. हमारे पास सबसे शिक्षित आबादी है. हमारे पास पूंजी है. हम निवेश आकर्षित करने में सक्षम हैं. वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोपीय संघ के पास असीमित क्षमता है, कुशलता, कौशल और नवाचार भी है. यह अपरोक्ष रूप से अमेरिका को एक तरह से धमकी थी कि अगर हम अमेरिका से दूरी बनाते हैं तो विश्व में अमेरिका का प्रभुत्व खत्म होने कगार पर पहुंच सकता है.
ग्रीनलैंड पर दोनों ही नेताओं ने ट्रंप की कार्रवाई का विरोध किया. कार्नी ने कहा कि कनाडा ग्रीनलैंड, डेनमार्क और नाटो का समर्थन करता है. वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोपीय संघ ग्रीनलैंड और डेनमार्क के साथ एकजुट है.
क्या नए वर्ल्ड आर्डर की शुरूआत हो चुकी है ?
दावोस 2026 में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के भाषणों से यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि दुनिया में एक नए विश्व व्यवस्था (new world order) की शुरुआत हो चुकी है. दोनों नेताओं ने पुरानी व्यवस्था (old order) के अंत की बात जरूर की है पर नॉस्टैल्जिया को रणनीति न मानते हुए विभाजन पर जोर दिया है.
कार्नी कहना सही है कि अमेरिकी नेतृत्व वाली नियम-आधारित व्यवस्था अब वापस नहीं आएगी, और मध्यम शक्तियों (middle powers) को एकजुट होकर सामना करना चाहिए. वॉन डेर लेयेन ने इसे स्थायी परिवर्तन बताया. और यूरोप को और स्वतंत्रता फैसले लेने पर जोर दिया. चूंकि यह भाषण ट्रंप के ग्रीनलैंड धमकी और टैरिफ से जुड़े संकट के संदर्भ में आए, जहां पश्चिमी सहयोगी अमेरिका से दूरी महसूस कर रहे हैं. इसलिए इसे कनाडा और यूरोपीय संघ का स्थाई भाव नहीं कहा जा सकता है.
लेकिन वास्तव में यह नई व्यवस्था की शुरुआत ऐसे ही होती है. जब पुरानी व्यवस्था पर संकट के बादल गहराते हैं तो नई व्यवस्था अंकुरित होती है. ट्रंप की नीतियां वैश्विक व्यवस्था को तोड़ रही हैं. लेकिन कोई स्पष्ट नया ढांचा नहीं उभर कर सामने आ रहा है. कार्नी और वॉन डेर लेयेन ने विभिन्न गठबंधनों और रणनीतिक साझेदारियों की बात की, जो बहुपक्षीयता की नई कोशिश है, न कि नई व्यवस्था की.
दरअसल किसी भी नई व्यवस्था के जन्म लेने के पहले एक संक्रमण काल होता है. विश्व अभी उसी संक्रमण काल में है.
ट्रंप की नीतियां, चीन-रूस का उदय, और यूक्रेन युद्ध ने पुरानी व्यवस्था को कमजोर किया, लेकिन नया आर्डर (चाहे बहुपक्षीय या बहुध्रुवीय) अभी बनना बाकी है.
दावोस भाषण राजनीतिक संदेश हैं, जो मध्यम शक्तियों को एकजुट करने की कोशिश हैं, लेकिन ये अभी सिर्फ प्रतिक्रिया हैं, न कि नई व्यवस्था की नींव. पर इतना तो कहा ही जा सकता है कि बदलाव आ रहा है और शुरुआत हो चुकी है. यह भी हो सकता है कि वैश्विक व्यवस्था के लिए यह संकट का चरण हो न कि नई शुरुआत.
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी प्रभुत्व (US hegemony) कम होने के कई संकेत
1-ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीतियां और सैन्य दखलंदाजी
ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला में हमला कर राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया, कोलंबिया, मैक्सिको और ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है. कहीं से भी संयुक्त राष्ट्र जैसी एजेंसियां या कोई भी संगठन ऐसा नहीं दिख रहा है जो अमेरिकी राष्ट्रपति के मनमानेपन को कंट्रोल कर सके.
2- ट्रंप की नीतियां अमेरिका को अलग थलग कर रही हैं
अमेरिका अपने खास सहयोगियों यूरोप और कनाडा जैसे देशों से अलग थलग पड़ रहा है. यही कारण है कि सहयोगी (EU, कनाडा) नई साझेदारियां (Mercosur, भारत, UAE) बना रहे हैं. WEF Global Risks Report 2026 में कहा गया है कि अमेरिका की नीतियां fragmentation बढ़ा रही हैं.
3-चीन का उदय और बहुध्रुवीय दुनिया
चीन BRI और टेक से प्रभाव बढ़ा रहा है, जबकि अमेरिका टैरिफ युद्धों में फंसा है. भारत-रूस-चीन 'ट्रोइका' नई व्यवस्था बनाने की ओर आगे बढ़ रहे हैं. डॉलर का पतन शुरू हो गया है, गोल्ड/सिल्वर की कीमतें बढ़ रही हैं.
4- मध्य शक्तियों का उभार
कनाडा और EU 'मिडल पॉवर्स' के रूप में उभर रहे हैं, अमेरिका से दूरी बना रहे हैं. दावोस में कार्नी और वॉन डेर लेयेन ने "old order" के अंत की घोषणा की, नए गठबंधनों (variable geometry) पर जोर दिया.
5-आर्थिक और सैन्य संतुलन अब अमेरिका के पक्ष में नहीं.
अमेरिका अब यूरेशिया पर प्रभाव कम कर रहा है, जबकि मध्य पूर्व, इंडो-पैसिफिक में चुनौतियां बढ़ी हैं. TRENDS रिपोर्ट 2026 में shifting alliances को मुख्य ट्रेंड बताया गया है. शक्ति अब एक देश (US) में केंद्रित नहीं है. चीन, रूस, भारत, ब्राजील, मध्य शक्तियां (middle powers) जैसे कनाडा, EU, इंडोनेशिया, सऊदी अरब स्वतंत्र भूमिका निभा रही हैं.