ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान बड़ा घटनाक्रम हुआ जब पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने अपने केस की पैरवी खुद की. इस दौरान उनकी ट्विशा के परिवार के वकील अनुराग श्रीवास्तव के साथ जोरदार बहस हुई जब दोनों ने एक दूसरे पर जमकर आरोप लगाए.
दरअसल, मंगलवार को पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को भोपाल की अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. इसी मामले की सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में हाई-वोल्टेज ड्रामा और तीखी बहस देखने को मिली. 63 साल की पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने कोर्ट में अपना पक्ष खुद रखा. अदालत में मौजूद लोगों के अनुसार वह काफी आक्रोशित नजर आ रही थीं और बार-बार ऊंची आवाज में अपनी बात रख रही थीं.
कोर्ट में हाथापाई और धक्कामुक्की
इस दौरान गिरिबाला सिंह ने आरोप लगाया कि ट्विशा के परिवार के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने उनके बेटे समर्थ सिंह के साथ जबलपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में हाथापाई और धक्कामुक्की की. इसी दौरान कोर्टरूम में मौजूद वकील अनुराग श्रीवास्तव ने इस आरोप का तीखा जवाब देते हुए कहा 'अगर ऐसा कोई घटनाक्रम हुआ है तो अदालत परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर ली जाए. पूरे परिसर में कैमरे लगे हैं और वहां मीडिया भी बड़ी संख्या में मौजूद था, उनके फुटेज भी चेक किए जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई. गिरीबाला के वकील भी इस दौरान अनुराग श्रीवास्तव से बहस करते दिखे.
'हम जहां भी जाते हैं मीडिया हमारे पीछे पहुंच जाती है'
गिरिबाला सिंह ने मामले में हो रही 'मीडिया ट्रायल' पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने अदालत से कहा 'हम जहां भी जाते हैं मीडिया हमारे पीछे-पीछे पहुंच जाती है. यह बंद होना चाहिए. हमारी जान को खतरा है. गिरिबाला सिंह ने क्राइम सीन रीक्रिएशन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि जांच एजेंसियों ने उन्हें उनके घर तक सीधे ले जाने के बजाय कई मकान पहले ही वाहन से क्यों उतार दिया और मीडिया के कैमरों के सामने पूरा सीन रिक्रिएशन कराया गया जो अप्रत्याशित था.
गिरिबाला सिंह ने ट्विशा के छत पर जाते और बाद में उसे लेकर नीचे उतारते समर्थ के सीसीटीवी फुटेज से भी खुद को अलग करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह फुटेज किसने लीक की थी.
दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप
इसके बाद अनुराग श्रीवास्तव ने एक और सवाल उठाते हुए पूछा कि 30 हजार रुपये के इनामी और फरार चल रहे समर्थ सिंह को जबलपुर में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के चेंबर में शरण कैसे मिली? इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. वहीं समर्थ सिंह की ओर से पेश वकील इनोश जॉर्ज कार्लो ने दलील दी कि यदि किसी व्यक्ति को अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हो तो उसे सुरक्षित स्थान पर शरण लेने का अधिकार है. इस पूरी सुनवाई के दौरान माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा.