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सोने से पहले नहीं किया ये जरूरी काम... आधी रात को अटक गई सांस, अस्पताल में एक्स-रे भी हो गया फेल

क्या कोई ऐसी चीज हो सकती है जो गले में फंसकर किसी की जान ले सकती हो, लेकिन एक्स-रे मशीन भी उसे पकड़ न पाए? मध्य प्रदेश के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है.

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श्वास नली के पास फंसे जबड़े को डॉक्टरों ने सूझबूझ से निकाला बाहर.(Photo:ITG)
श्वास नली के पास फंसे जबड़े को डॉक्टरों ने सूझबूझ से निकाला बाहर.(Photo:ITG)

मध्य प्रदेश के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में एक हैरान करने वाला मामला आया. यहां आए मरीज के गले में उसका नकली दांत फंस गया था, जिसे डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए एक ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित बाहर निकाल लिया. 

दरअसल, दमोह जिले के रहने वाले रामदास, जो अपने आगे के तीन नकली दांतों के सेट का उपयोग करते हैं, रात में सोते समय उन्हें निकालना भूल गए थे. आधी रात के बाद अचानक वह दांत उनके गले में सरक गया, जिससे उन्हें सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने लगी. स्थिति बिगड़ती देख परिजन उन्हें तत्काल आपातकालीन स्थिति में बीएमसी के नाक, कान और गला विभाग लेकर पहुंचे.

यह मामला मेडिकल टीम के लिए बेहद चुनौती भरा था. चूंकि कृत्रिम दांत पूरी तरह से प्लास्टिक सामग्री  के बने हुए थे, इसलिए वे शुरुआती एक्स-रे जांच में दिखाई नहीं दे रहे थे .

मरीज का ऑक्सीजन सैचुरेशन बार-बार तेजी से गिर रहा था. एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. सर्वेश जैन और डॉ. दीपक गुप्ता ने हालात को भांपते हुए मरीज को तुरंत जनरल एनेस्थीसिया  दिया.

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डॉ. सर्वेश जैन के मुताबिक, यह 'फॉरेन बॉडी' आहार नली और श्वास नली के ठीक मुहाने पर फंसी हुई थी, जिससे हवा का रास्ता लगभग ब्लॉक हो रहा था. यदि समय रहते उपचार नहीं मिलता, तो दम घुटने से मरीज की जान जा सकती थी. 

'एसोफगोस्कोप' से मिला जीवनदान
मरीज की बताई गई परेशानी और डॉक्टरों के  क्लीनिकल असेसमेंट के आधार पर बिना समय गंवाए ऑपरेशन का फैसला लिया गया. ENT विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीतू बजाज ने 'एसोफगोस्कोप'  तकनीक की सहायता से तीन कृत्रिम दांतों के जुड़े हुए पूरे सेट को उसकी धातु की शीथ सहित सुरक्षित रूप से गले से बाहर खींच निकाला. 

डॉक्टरों की जरूरी अपील
इस सफल और जटिल प्रक्रिया के बाद डॉ. नीतू बजाज ने आम जनता के लिए एक बेहद जरूरी सलाह दी है, "जो लोग भी डेंटर इम्प्लांट, डेंचर या किसी भी प्रकार की अस्थायी डेंटल डिवाइस का उपयोग करते हैं, वे रात में सोने से पहले उसे अनिवार्य रूप से मुंह से बाहर निकाल दें. रात में सोते समय अनजाने में लार के साथ इसे निगलने का खतरा रहता है. थोड़ी सी भी लापरवाही या असावधानी किसी भी समय प्राणघातक साबित हो सकती है."

BMC के डीन डॉ. पीएस ठाकुर ने इस सफल जीवन रक्षक प्रक्रिया के लिए ENT और एनेस्थीसिया विभाग की संयुक्त टीम की सराहना की है. साथ ही उन्होंने कहा कि मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.

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