मध्य प्रदेश में चर्चित ट्विशा मौत मामले में मंगलवार को कोर्ट में उस वक्त एक अलग मोड़ देखने को मिला, जब ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह ने जेल में मिलने वाले अखबारों को लेकर शिकायत कर दी. कोर्ट में पेशी के दौरान गिरिबाला ने कहा कि उन्हें पूरा अखबार पढ़ने के लिए नहीं दिया जा रहा है. उनके मुताबिक, जिस हिस्से में ट्विशा केस से जुड़ी खबरें होती हैं, उसे काटकर अखबार दिया जाता है. गिरिबाला ने कोर्ट से मांग की कि उन्हें बिना काट-छांट वाला पूरा अखबार पढ़ने को दिया जाए.
जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस पेशी के दौरान गिरिबाला सिंह ने कोर्ट के सामने अपनी कुछ परेशानियां रखीं. उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके बेटे समर्थ को अपने वकीलों से बातचीत करने के लिए पूरा समय नहीं मिल पा रहा है. फिलहाल उन्हें सिर्फ 20 मिनट वकीलों से मिलने दिए जाते हैं, जो उनके केस को समझने के लिए बहुत कम हैं. उन्होंने कोर्ट से वकीलों से मुलाकात का समय बढ़ाने की मांग की.
अखबार से काट दी जाती हैं खबरें
गिरिबाला सिंह ने कोर्ट को बताया कि जेल प्रशासन उन्हें रोज एक हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार तो देता है, लेकिन उसमें एक बड़ी गड़बड़ी की जाती है. अखबार का वो हिस्सा पहले ही कैंची से काट दिया जाता है, जिसमें उनकी बहू ट्विशा की मौत से जुड़ी खबरें छपती हैं. गिरिबाला की मांग है कि उन्हें देश-दुनिया की खबरों के साथ-साथ अपने केस से जुड़ी खबरें भी पढ़ने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए.
अखबार के अलावा गिरिबाला ने कोर्ट को एक और जरूरी बात बताई. उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनके घर से ट्विशा की कुछ दवाइयां जब्त की थीं, लेकिन उसकी जब्ती सूची अभी तक उन्हें या उनके वकील को नहीं दी गई है. कोर्ट ने सास की इस बात को माना. इसके बाद अदालत ने जांच एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे दवाइयों का सीजर मेमो फौरन आरोपी के वकीलों को सौंपें.