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आकांक्षा सुसाइड केस: बेटी को पढ़ाने पिता बन गए थे रसोइया... क्रेडिट कार्ड से लिया 3 लाख लोन, नागपुर की कोचिंग में कराया एडमिशन

NEET Aspirant Akanksha Chaturvedi Death: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की आकांक्षा चतुर्वेदी के पिता अपनी बेटी के सपनों की खातिर नागपुर में कुक बन गए थे. किसान क्रेडिट कार्ड से 3 लाख लोन लेकर बेटी को NEET की तैयारी करा रहे थे. परीक्षा में 650 अंक आने की उम्मीद थी. NSUI ने अब पीड़ित परिवार को 2.5 लाख रुपए की मदद दी है.

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आकांक्षा चतुर्वेदी को NEET परीक्षा में 650 नंबर आने की थी उम्मीद.(Photo:ITG)
आकांक्षा चतुर्वेदी को NEET परीक्षा में 650 नंबर आने की थी उम्मीद.(Photo:ITG)

मध्य प्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज से एक झकझोर कर रख देने वाली खबर सामने आई है. यहां के मगनिया गांव की रहने वाली और नीट (NEET) परीक्षा की तैयारी कर रही एक होनहार छात्रा आकांक्षा उर्फ स्नेहा चतुर्वेदी ने पेपर लीक होने के चलते डिप्रेशन में आकर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली. इस घटना ने एक गरीब किसान परिवार के डॉक्टर बेटी पाने के सपने को हमेशा के लिए तोड़ दिया है.

यह दुखद घटना मऊगंज जिले के मगनिया गांव की है. मृतका आकांक्षा चतुर्वेदी के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी गांव में किसानी करते थे. घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन बेटी को डॉक्टर बनाने का सपना पूरे परिवार की आंखों में था.

बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए पिता ने बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए 3 लाख रुपये का लोन लिया. इसके बाद वे आकांक्षा को तैयारी कराने के लिए नागपुर के एक निजी कोचिंग संस्थान ले गए. वहां बेटी की पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए पिता खुद एक कुक (रसोइया) की नौकरी करने लगे. नीट का पेपर होने के बाद पूरे परिवार को पूरा भरोसा था कि इस बार आकांक्षा का चयन हो जाएगा और वह डॉक्टर बन जाएगी. आकांक्षा को भी परीक्षा में 650 अंक आने की पूरी उम्मीद थी.

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पेपर लीक ने तोड़ी कमर 
नीट परीक्षा के बाद जब देश भर में पेपर लीक और धांधली की खबरें सामने आईं, तो आकांक्षा गहरे मानसिक तनाव और डिप्रेशन में चली गई. उसे लगा कि इतनी मेहनत और परिवार के कर्ज में डूबने के बाद भी इस धांधली के कारण उसका भविष्य अंधकार में है. इसी डिप्रेशन के चलते बीते 20 मई को आकांक्षा ने अपने घर में लगे पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. इस आत्मघाती कदम से पूरे परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं.

'दोबारा पेपर देने की हिम्मत नहीं'
आत्महत्या वाले स्थान से पुलिस को आकांक्षा का एक बेहद भावुक सुसाइड नोट बरामद हुआ है. इस पत्र में उसने अपने माता-पिता के संघर्ष और अपनी बेबसी को बयां करते हुए लिखा था, "मम्मी-पापा, आपको पूरा भरोसा था कि मेरी बेटी पढ़ लेगी और डॉक्टर बनेगी. पर अब दोबारा NEET का पेपर देने की मुझमें हिम्मत नहीं है. मैंने आप दोनों को बर्बाद कर दिया. अगर दोबारा पेपर होता भी है, तो वह अच्छा जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है."

NSUI ने बंधाया ढांढस और दी आर्थिक मदद
इस भयानक त्रासदी के बाद पीड़ित परिवार का आरोप है कि अभी तक सरकार का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनके घर संवेदना व्यक्त करने या मदद के लिए नहीं पहुंचा है.

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हालांकि, इस बीच छात्र संगठन NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े सहित एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार के घर मगनिया गांव पहुंचा. कांग्रेस नेताओं ने दुखी माता-पिता को ढांढस बंधाया और संगठन की तरफ से 2.5 लाख रुपये की आर्थिक मदद का लिफाफा सौंपा.

इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिया है कि वे जल्द ही उनकी बात कांग्रेस नेता राहुल गांधी से कराएंगे और उन्हें हर संभव कानूनी और सामाजिक मदद दिलाएंगे.

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