भारत के महत्वाकांक्षी 'प्रोजेक्ट चीता' के लिए सोमवार का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है. मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई मादा चीता 'ज्वाला' ने 5 शावकों को जन्म दिया है. यह ज्वाला की तीसरी सफल डिलीवरी है, जो भारत के वातावरण में चीतों के पूरी तरह ढलने का सबसे बड़ा प्रमाण है.
ज्वाला के इन 5 नए शावकों के आने के बाद अब कूनो और पूरे भारत में चीतों की स्थिति बेहद मजबूत हो गई है. भारत में चीतों की कुल संख्या गांधी सागर सहित 53 हो गई है.
कूनो में 50 चीते हो गए हैं. इनमें भारत की धरती पर जन्मे शावकों की संख्या 33 यानी कुल का 62% है. ज्वाला और उसके पांचों बच्चे फिलहाल स्वस्थ हैं और उन पर डॉक्टरों की टीम 24 घंटे नजर रख रही है. देखें VIDEO:-
दिग्गजों ने दी बधाई
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस जानकारी को शेयर करते हुए खुशी जताई.
भूपेंद्र यादव ने इसे वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन के लिए ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा, "यह कामयाबी हमारे फील्ड स्टाफ और डॉक्टरों की मेहनत का नतीजा है. भारत की चीता कहानी अब नई ऊंचाइयों पर है."
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MP के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिखा, कूनो आने के बाद ज्वाला ने यहां के वातावरण को पूरी तरह अपना लिया है और वह पार्क की सबसे सफल मादा चीताओं में शुमार हो गई है.
कूनो नेशनल पार्क के DFO आर थिरुकुराल ने बताया कि मादा चीता ज्वाला और उसके पांचों नवजात शावक फिलहाल पूरी तरह स्वस्थ हैं. विशेषज्ञों की टीम सीसीटीवी और मैदानी निगरानी के जरिए शावकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर नजर रख रही है. कूनो में चीतों का लगातार सफल प्रजनन इस महात्वाकांक्षी परियोजना के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है.
ज्वाला का रिकॉर्ड
यहां बता दें कि ज्वाला (पूर्व नाम सियाया) उन 8 चीतों में शामिल थी, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2022 में कूनो पार्क में छोड़ा था. यह ज्वाला का तीसरा प्रसव है.
मार्च 2023: पहली बार 4 शावकों को जन्म दिया (केवल एक 'मुखी' जीवित बचा).
जनवरी 2024: दूसरी बार 3 शावकों को जन्म दिया.
9 मार्च 2026: तीसरी बार 5 शावकों को जन्म दिया.
लगातार बढ़ रहा है कुनबा
हाल ही में दक्षिण अफ्रीकी चीता 'गामिनी' ने भी 4 बच्चों को जन्म दिया था. इसके साथ ही बीती 28 फरवरी को बोत्सवाना से लाए गए 9 नए चीतों (6 मादा, 3 नर) को भी कूनो के क्वारंटाइन बाड़ों में छोड़ा गया है. नए मेहमानों के आगमन और शावकों के जन्म ने कूनो को दुनिया के सबसे अहम चीता संरक्षण केंद्रों में से एक बना दिया है.