मध्य प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपनी बेबाकी को लेकर सुर्खियों में हैं. एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार और पारिवारिक मूल्यों पर तीखा कटाक्ष किया. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी मंत्री का परिवार ठेकेदारों के उपकारों पर पलेगा, तो बच्चों का नैतिक विकास संभव नहीं है. BJP लीडर के इस उदाहरण ने अब राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है.
मंत्री विजयवर्गीय ने परवरिश और माहौल पर सवाल उठाते हुए कहा, बच्चा स्कूल में केवल 4 घंटे रहता है, जबकि 20 घंटे घर पर. अगर माता-पिता घर में दोस्तों के साथ पार्टी करेंगे, तो बच्चा वही सीखेगा. बच्चों के साथ-साथ उनके पेरेंट्स के लिए भी एक 'सिलेबस' होना चाहिए कि वे घर में कैसा व्यवहार करें.
उन्होंने उदाहरण देते हुए व्यवस्था पर हमला बोला, "अगर पिताजी PWD मिनिस्टर हैं और बेटे को कपड़े दिलाने ठेकेदार जा रहा है, तो वहां चरित्र की बात करना बेमानी है."
उन्होंने सवाल उठाया कि आज डॉक्टर, इंजीनियर और सोशल वर्कर बनाने की होड़ तो है, लेकिन हमारा बेटा 'चरित्रवान' और 'राष्ट्रभक्त' बने, इसकी बात कोई संगठन या शिक्षण संस्थान नहीं करता.
विजयवर्गीय ने दो-टूक कहा कि चाहे कितनी भी अच्छी शिक्षा नीति बना ली जाए, अगर घर के अंदर का वातावरण अनैतिक है, तो बच्चे का चरित्र निर्माण असंभव है.
बता दें कि इससे पहले इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जलप्रदाय को लेकर हुए कांड के दौरान मीडिया के सवालों पर मंत्री विजयवर्गीय ने आपत्तिनजक शब्द का इस्तेमाल कर दिया था. उस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं और विपक्ष ने मंत्री की भाषा और गरिमा पर सवाल खड़े किए थे.
इन्हीं विवादों के बीच पारिवारिक शोक के चलते मंत्री कुछ दिनों की छुट्टी पर भी रहे. लेकिन कार्यभार संभालने के बाद यह नया बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
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मंत्री विजयवर्गीय का कहना था कि वे उदाहरण के माध्यम से बच्चों में नैतिक मूल्यों और ईमानदारी की बात कर रहे थे, लेकिन राजनीतिक क्षेत्र में PWD (लोक निर्माण विभाग) मंत्री जैसे सीधे संदर्भ ने बयान को संवेदनशील बना दिया.