इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है. राजवाड़ा पर हुए विशाल धरने में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार को 8 दिन का अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि मृतकों के परिवारों को न्याय मिले, अन्यथा पूरा इंदौर शहर बंद किया जाएगा.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी की वजह से अब तक 32 मौतें हुई हैं और कहा, "ये मौतें कोई हादसा नहीं हैं, बल्कि सिस्टम फेल होने और कल्पना से परे भ्रष्टाचार का नतीजा हैं."
राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, "दूषित पीने के पानी की वजह से 32 घरों में मातम पसरा है. लेकिन सत्ताधारी बीजेपी के लिए लोगों की जान सस्ती है, और मृतकों के परिवारों को सिर्फ 2 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया गया है."
पटवारी ने मांग की कि मृतकों के परिवारों को मुआवज़े के तौर पर 1 करोड़ रुपये और नगर निगम में नौकरी दी जाए. उन्होंने कहा कि अगर आठ दिनों के भीतर मांगें नहीं मानी गईं, तो उनकी पार्टी पूरे शहर में बंद करवाएगी.
भागीरथपुरा, जो पीने के पानी की त्रासदी को लेकर सुर्खियों में रहा है, राज्य कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र 'इंदौर-1' के तहत आता है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए, प्रदेश कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि 32 मौतों के बावजूद विजयवर्गीय का इस्तीफा न मांगना यह दिखाता है कि यादव सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री रह गए हैं.
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पीने के पानी से उल्टी और दस्त की समस्या दिसंबर के आखिर में शुरू हुई थी.
27 जनवरी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सौंपी गई अपनी 'डेथ ऑडिट' रिपोर्ट में, राज्य सरकार ने संकेत दिया था कि भागीरथपुरा में 16 लोगों की मौत दूषित पीने के पानी से होने वाली उल्टी और दस्त के प्रकोप से जुड़ी हो सकती है.
कोर्ट ने दूषित पीने के पानी के मामले में न्यायिक जांच का आदेश दिया है और इसके लिए हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया है.