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इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन में 'प्लास्टिक के सरिये' का दावा, अफसर बोले- ये GFRP है, अफवाह फैलाने वालों पर होगी FIR

Indore Ujjain Six Lane Highway: इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन हाईवे के निर्माण को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा 'प्लास्टिक के सरिये' का दावा पूरी तरह भ्रामक और गलत निकला है.

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इंदौर-उज्जैन हाईवे में इस्तेमाल सरियों को कमजोर बताने का दावा भ्रामक निकला.(Photo:Screengrab)
इंदौर-उज्जैन हाईवे में इस्तेमाल सरियों को कमजोर बताने का दावा भ्रामक निकला.(Photo:Screengrab)

अंडर कंस्ट्रक्शन इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में आरसीसी ड्रेनेज निर्माण में 'प्लास्टिक के सरिये' के इस्तेमाल की बात कहकर कंस्ट्रक्शन की क्वालिटी पर सवाल उठाए गए हैं. हालांकि, विभागीय जांच और विशेषज्ञों की राय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है.

MPRDC के प्रबंधक गणेश भाभर और नेशनल हाईवे के रिटायर्ड GM सुमेश बाजल ने साफ किया कि निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री प्लास्टिक नहीं, बल्कि ग्लास फाइबर रीइनफोर्स्ड पॉलिमर यानी GFRP है. यह एक उन्नत निर्माण सामग्री है जिसे इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) कोड 137:2022 के तहत मान्यता प्राप्त है.

क्यों बेहतर है GFRP सरिया?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह आधुनिक फाइबर सरिया पारंपरिक स्टील (लोहे) की तुलना में कई मायनों में श्रेष्ठ है. लोहे की तरह इसमें जंग नहीं लगता, जिससे ड्रेनेज और पुलों की उम्र बढ़ जाती है.

यही नहीं, यह वजन में हल्का लेकिन मजबूती में स्टील के बराबर या उससे बेहतर होता है.

वहीं, इसका इस्तेमाल खासकर समुद्री क्षेत्रों, सीवेज प्लांट और मेट्रो प्रोजेक्ट्स में किया जाता है जहां नमी अधिक होती है.

अफवाह फैलाने वालों पर प्रशासन सख्त
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो लोग बिना तकनीकी जानकारी के इस तरह के भ्रामक वीडियो वायरल कर रहे हैं और सरकार की छवि खराब कर रहे हैं, उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी.

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अफसरों का कहना है कि यह पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित तकनीक है, जिसका उद्देश्य निर्माण को दीर्घकालिक और टिकाऊ बनाना है.

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