मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में नगर निगम के सप्लाई किए जाने वाले पीने के पानी की शुद्धता को लेकर सियासत गरमा गई है. पानी को दूषित और बैक्टीरिया युक्त बताए जाने के बाद इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने एक अनोखा और आक्रामक कदम उठाया. उन्होंने सीधे जनता के बीच जाकर नल का पानी पीकर कांग्रेस के दावों को खुली चुनौती दी है.
कांग्रेस के आरोपों का करारा जवाब देने के लिए मेयर पुष्यमित्र भार्गव शहर के सुदामा नगर इलाके में पहुंचे. वहां उन्होंने स्थानीय निवासियों की मौजूदगी में सीधे नल का पानी पीया और कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया.
नल का पानी पीने के बाद भार्गव ने कहा, "मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी का झूठ अब जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो गया है. मैंने खुद निवासियों के बीच खड़े होकर नगर निगम का वही पानी पिया है, जिसे कांग्रेस ने 'जहरीला' और दूषित बताया था. कांग्रेस ने एक सोची-समझी साजिश के तहत इंदौर की साख को नुकसान पहुंचाने के लिए ये झूठी बातें फैलाई हैं."
जीतू पटवारी का '98% पानी दूषित' होने का दावा
यह सियासी घमासान पिछले हफ्ते तब शुरू हुआ था, जब एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नगर निगम के पानी पर गंभीर आरोप लगाए थे. पटवारी के मुख्य दावे निम्नलिखित थे. कांग्रेस पार्टी ने इंदौर के 85 वार्डों में से 29 वार्डों से पीने के पानी के 240 नमूने (सैंपल) जमा किए थे. पटवारी का दावा था कि जांच में इन 240 नमूनों में से लगभग 98 प्रतिशत पानी दूषित और पीने के अयोग्य पाया गया.
बैक्टीरिया और रसायनों की भरमार
कांग्रेस का आरोप था कि जांच के दौरान पानी में 'ई. कोलाई' और 'कोलीफॉर्म' जैसे खतरनाक बैक्टीरिया मिले हैं. इसके साथ ही पानी में कैल्शियम कार्बोनेट, क्लोराइड और सल्फेट यौगिकों जैसे रसायन निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक मात्रा में मौजूद थे.
'रिपोर्ट के ब्योरे में हेरफेर, बाकी नाम भी बताए कांग्रेस'
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने विपक्षी पार्टी पर इंदौर की छवि खराब करने के लिए रिपोर्ट के आंकड़ों और ब्योरे में हेरफेर करने का सीधा आरोप लगाया. उन्होंने तकनीकी खामियां निकालते हुए कहा कि जीतू पटवारी ने पूरे शहर से 240 नमूने जमा करने का दावा तो किया, लेकिन उनकी सौंपे गए ब्योरे में केवल 130 लोगों के ही नाम दर्ज थे, जिनके घरों से ये सैंपल लिए गए थे.
भार्गव ने चुनौती देते हुए कहा, "अगर कांग्रेस बाकी बचे हुए लोगों के नाम और पते भी उजागर करती है, तो हम उनके घरों पर भी अपनी टीम भेजकर पीने के पानी की निष्पक्ष जांच करवाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं."
क्या है पूरा मामला?
इंदौर में पीने के पानी की क्वालिटी का मामला काफी समय से जांच के दायरे में है. इसकी मुख्य वजह दिसंबर 2025 में भागीरथपुरा इलाके में फैली उल्टी और दस्त की बीमारी है. इस घटना को लेकर सरकार और विपक्ष के आंकड़ों में बड़ा अंतर है. इनका आरोप है कि भागीरथपुरा इलाके में नगर निगम का दूषित और गंदा पानी पीने की वजह से कुल 36 लोगों की मौत हुई थी.
सरकार का कहना है कि भागीरथपुरा की इस दुखद घटना में 22 लोगों की मौत हुई थी. प्रशासन की ओर से मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जा चुका है.
14 जून को आएगी न्यायिक आयोग की रिपोर्ट
भागीरथपुरा में हुई मौतों और दूषित पानी के इस गंभीर मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया गया है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रिटायर्ट जज सुशील कुमार गुप्ता इस न्यायिक आयोग की अध्यक्षता कर रहे हैं. हाई कोर्ट ने इस आयोग को आगामी 14 जून तक अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया है, जिसके बाद ही पानी की क्वालिटी और मौतों की असली सच्चाई पूरी तरह सामने आ सकेगी.