नेपाल की संसद में इस वक्त बड़ा बवाल मचा हुआ है. वजह है प्रधानमंत्री बालेन शाह का एक बयान, जिसमें उन्होंने कह दिया कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया हुआ है. इस बयान के बाद विपक्षी दल सड़क पर आ गए हैं और संसद की कार्यवाही रोक दी है. मांग एक ही है, पीएम शाह माफी मांगें.
नेपाल और भारत के बीच कई सालों से एक पुराना झगड़ा चला आ रहा है. लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी, ये तीन इलाके हैं जिन पर दोनों देश अपना-अपना हक जताते हैं. नेपाल कहता है ये उसकी जमीन है, भारत उसे अपना मानता है. यह मुद्दा काफी पुराना और संवेदनशील है.
सोमवार को संसद में क्या हुआ?
सोमवार को संसद का ऊपरी सदन यानी नेशनल असेंबली की बैठक शुरू होते ही विपक्षी सांसद खड़े हो गए और विरोध शुरू कर दिया. उन्होंने रविवार के बयान पर माफी की मांग की और सदन नहीं चलने दिया.
नेशनल असेंबली के अध्यक्ष नारायण प्रसाद दहल ने पहले 20 मिनट के लिए बैठक रोकी, लेकिन जब दोबारा शुरू हुई तो हंगामा जारी रहा. आखिरकार बैठक मंगलवार दोपहर 1.15 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.
यही हाल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का भी रहा. स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने बार-बार अपील की कि सदन को चलने दें, लेकिन विपक्ष नहीं माने.
संसद में प्रधानमंत्री बालेन शाह ने क्या कहा था?
नेपाल की संसद की बैठक रविवार को चल रही थी. सांसद प्रधानमंत्री बालेन शाह से इन्हीं तीनों इलाकों यानी लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर सवाल पूछ रहे थे.
जवाब देते हुए पीएम बालेन शाह ने कुछ ऐसा कह दिया जो किसी को उम्मीद नहीं था. उन्होंने कहा, 'आपको हैरानी होगी, लेकिन मुझे भी प्रधानमंत्री बनने के बाद पता चला कि सिर्फ भारत ने ही नेपाल की जमीन नहीं दबाई है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा कर रखा है.' बस यही बयान बवाल की जड़ बन गया.
बयान पर हंगामा क्यों मचा?
नेपाल में यह मुद्दा बेहद भावनात्मक और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा हुआ माना जाता है. वहां के लोग और नेता हमेशा से यही कहते आए हैं कि भारत ने उनकी जमीन दबाई है. ऐसे में खुद नेपाल के प्रधानमंत्री का यह कहना कि नेपाल ने भी भारत की जमीन कब्जाई है, विपक्ष को बड़ा धक्का लगा.
पूर्व राजनयिकों और सीमा विशेषज्ञों ने भी इस पर आपत्ति जताई. उनका कहना है कि जब किसान खेती के लिए सीमा पार जमीन इस्तेमाल करते हैं, तो उसे सरकारी कब्जा नहीं कहा जा सकता. पीएम शाह ने दोनों को एक ही तराजू पर रख दिया, जो गलत है.
यह भी पढ़ें: 'हमने भी भारत की जमीन हड़प ली...', PM बालेन शाह के बयान से नेपाल में हंगामा, क्या कह रहे वहां के लोग
विपक्ष की चेतावनी
विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक प्रधानमंत्री संसद में आकर अपना पक्ष स्पष्ट नहीं करते और माफी नहीं मांगते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा. नेपाली कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और संसद में इसका जवाब दिया जाना चाहिए.
संसदीय जांच समिति का गठन
इस बीच प्रतिनिधि सभा की बैठक के दौरान कुछ सांसदों के कथित अनुचित व्यवहार की जांच के लिए एक संसदीय जांच समिति का गठन भी किया गया है. समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट स्पीकर को सौंपनी होगी. आवश्यकता पड़ने पर समिति आगे की कार्रवाई की भी सिफारिश कर सकती है.
इनपुट: पीटीआई और काठमांडू पोस्ट