गुजरात के गिर जंगल में कैनिन डिस्टेंपर वायरस (CDV) और बेबेसिया जैसी जानलेवा महामारियों के प्रकोप के बाद भावनगर वन विभाग पूरी तरह सतर्क मोड पर आ गया है. सौराष्ट्र के गिर पूर्व और गिर पश्चिम वन प्रभागों में कम समय के भीतर ही 8 से अधिक शेरों और उनके शावकों की मौत से हड़कंप मच गया है. इस गंभीर संकट को देखते हुए भावनगर वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 118 शेरों की एक स्वास्थ्य रिपोर्ट तैयार की जा रही है, ताकि शेरों को इस महामारी के खतरे से बचाया जा सके.
एशियाई शेरों के एकमात्र निवास स्थान और गुजरात के गौरव 'गिर जंगल' पर एक बार फिर महामारियों का साया मंडरा रहा है. हाल ही में गिर पूर्व और गिर पश्चिम वन प्रभागों में कैनिन डिस्टेंपर वायरस (CDV) और बेबेसिया संक्रमण के कारण 8 से अधिक शेरों और शावकों ने दम तोड़ दिया है. इस गंभीर स्थिति के बाद भावनगर वन विभाग ने एहतियाती कदम उठाते हुए अपने क्षेत्र में घूम रहे शेरों की सुरक्षा के लिए कमर कस ली है.
भावनगर की 5 रेंजों में 118 शेरों का ठिकाना
भावनगर वन विभाग के अधिकार क्षेत्र (गोहिलवाड़) में आने वाली जेसर, पालीताना, महुवा, सिहोर और भावनगर रेंज में वर्तमान में अलग-अलग समूहों में कुल 118 शेर निवास कर रहे हैं. इनमें से अकेले पालीताना रेंज में 17 शेरों का एक बड़ा समूह सक्रिय है.
महामारी के खतरे को देखते हुए पशु चिकित्सकों और क्षेत्रीय वन अधिकारियों की मदद से शेरों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है. शेरों की गतिविधियों को ट्रैक करते हुए एक 'स्वास्थ्य जांच पत्रक' तैयार किया जा रहा है.
47 शेरों की जांच, 19 पर एहतियाती उपाय
भावनगर वन विभाग के उप वन संरक्षक (DCF) योगेश देसाई ने इस विशेष अभियान की प्रगति के बारे में महत्वपूर्ण आंकड़े शेयर किए हैं. वन विभाग की विभिन्न रेंजों में सघन गश्त के जरिए अब तक 47 शेरों की स्वास्थ्य जांच पूरी की जा चुकी है, जो पूरी तरह स्वस्थ हैं.
रेंज के अनुसार अब तक निरीक्षित किए गए शेरों की संख्या:
महुवा रेंज: 12 शेर
जेसर रेंज: 12 शेर
सिहोर रेंज: 11 शेर
पालीताना रेंज: 8 शेर
भावनगर रेंज: 4 शेर
डीवर्मिंग और डी-टिकिंग अभियान
डीसीएफ योगेश देसाई के मुताबिक, इस निरीक्षण के दौरान 19 शेरों में एहतियाती उपाय अपनाए गए हैं. वर्तमान में शेरों को आंतरिक परजीवियों से बचाने के लिए डीवर्मिंग यानी कीड़े मारने और बाहरी कीटों से सुरक्षित रखने के लिए डी-टिकिंग मतलब कीट हटाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है. आने वाले दिनों में शेष बचे सभी शेरों का भी डीवर्मिंग और डी-टिकिंग कर उनकी अंतिम स्वास्थ्य रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
'पैदल गश्त' बढ़ाएं, इन 4 लक्षणों पर रखें नजर
महामारी के फैलने के डर से उप वन संरक्षक ने भावनगर वन विभाग के तहत आने वाले सभी वन क्षेत्रों में फील्ड स्टाफ और कर्मचारियों को पैदल गश्त बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं. गश्त के दौरान कर्मचारियों को शेरों में निम्नलिखित 4 मुख्य स्थितियों या लक्षणों को बारीकी से देखने और रिपोर्ट करने को कहा गया है:
आदेश में साफ कहा गया है कि ऐसा कोई भी लक्षण दिखने पर संबंधित शेर को तत्काल विशेष निगरानी में लिया जाए और उसे बिना किसी देरी के जरूरी इलाज उपलब्ध कराया जाए.
(रिपोर्ट:- नितिन गोहेल)