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भारत में जन्मी पहली चीता 'मुखी' 3 साल की हुई, बिन मां के पली बढ़ी, अनाथ शावक से मजबूत शिकारी बनी

India first-born cheetah Mukhi: भारत की धरती पर जन्मी पहली मादा चीता 'मुखी' ने आज अपने जीवन के 3 साल पूरे कर लिए हैं. नामीबियाई चीता 'ज्वाला' की संतान मुखी, आज न केवल कूनो की शान है, बल्कि भारत के 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है.

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CM मोहन यादव ने शेयर की मुखी की तस्वीरें.(Photo:ITG)
CM मोहन यादव ने शेयर की मुखी की तस्वीरें.(Photo:ITG)

देश की धरती पर बने चीतों के पहले घर श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में जन्मी पहली मादा शावक 'मुखी' ने 29 मार्च को अपने जीवन के 3 साल पूरे कर लिए हैं. भारत में जन्मी पहली मादा चीता के रूप में मुखी अब चीता पुनर्स्थापन परियोजना की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है. इस खास मौके पर कूनो प्रबंधन ने मुखी के एक शावक से मां बनने तक की सफल जीवन यात्रा और उसके संघर्ष की कहानी बयां करती तस्वीरें जारी की हैं. वहीं, सीएम मोहन यादव ने भी सोशल मीडिया पर मुखी से जुड़ी खबर को शेयर कर खुशी जताई है.

CM मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''कूनो से खुशखबरी! भारत की पहली चीता, 'मुखी', आज तीन साल की हो गई है. एक नन्ही शावक से एक आत्मविश्वासी मां बनने तक का उसका सफर, प्रोजेक्ट चीता की सफलता का एक सशक्त प्रतीक है. यह उपलब्धि मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को एक नई दिशा और बढ़ते आत्मविश्वास का मार्ग प्रशस्त करती है.''

बता दें कि चीता मुखी का जन्म मार्च 2023 में उस समय हुआ था, जब नामीबिया और साउथ अफ्रीका से लाए गए चीतों को कूनो में बसाने की प्रक्रिया चल रही थी. उस दौरान नए माहौल, मौसम और स्वास्थ्य से जुड़ी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था.

जन्म के बाद मुखी की शुरुआत बेहद कठिन रही. उसकी मां 'ज्वाला' ने उसे छोड़ दिया था, जबकि उसके भाई-बहन तेज गर्मी के कारण जीवित नहीं रह पाए. ऐसे हालात में कूनो की टीम और वेटेरियन ने मुखी को बचाया और लगातार निगरानी में रखकर उसे पाला. यही कारण है कि आज उसे कूनो पार्क की सबसे मजबूत मादा चीता माना जाता है.

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मार्च 2023 में जन्मी 'मुखी' अब 3 साल की.

मुखी वक्त के साथ बनी धाकड़ शिकारी

वक्त के साथ चीता मुखी ने स्वयं को पूरी तरह जंगल के माहौल में ढाल लिया है. अब वह एक स्वस्थ वयस्क चीता है और शिकार करने में भी माहिर हो चुकी है. वन अधिकारियों के अनुसार, उसका व्यवहार इस बात का संकेत है कि कूनो का वातावरण चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है.

नवंबर 2025 में 5 शावकों को दिया था जन्म

मुखी ने 33 महीने की उम्र में नवंबर 2025 में पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया. यह देश में चीतों की दूसरी पीढ़ी की शुरुआत मानी जा रही है. खास बात यह है कि मुखी अपने शावकों की देखभाल खुद कर रही है, जो जंगल में किसी भी प्रजाति के टिके रहने के लिए बेहद जरूरी है.

भीषण गर्मी और अकेलेपन से लड़कर बनी कूनो की शान.

इनका कहना

प्रोजेक्ट चीता के डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने aajtak को बताया, ''मुखी की कहानी पूरे प्रोजेक्ट के लिए माइलस्टोन है. कठिन परिस्थितियों में उसका जीवित रहना और अब मां बनना यह दिखाता है कि कूनो पार्क का इकोसिस्टम चीतों के लिए अनुकूल है.''

तस्वीरों में दिखी नन्हे शावक से शिकारी बनने की झलक.

कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर. थिरुकुराल ने कहा, ''मुखी का व्यवहार, शिकार करने की क्षमता और अपने शावकों की देखभाल इस प्रोजेक्ट की बड़ी सफलता है. इससे साफ है कि चीतों ने यहां खुद को स्थापित करना शुरू कर दिया है.''

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