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MP: तेंदुओं के शिकार से इंटरस्टेट सप्लाई तक, वन्यजीव तस्करी के बड़े नेटवर्क में सामने आया NGO का नाम

मध्य प्रदेश के जंगलों में तेंदुओं के शिकार और उनकी खाल व अंगों की अंतरराज्यीय तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. UP वन विभाग, MP STSF और WCCB की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. आगरा से पकड़े गए दो आरोपियों के एक दिल्ली स्थित वन्यजीव संरक्षण NGO से कथित संबंध सामने आने के बाद जांच और गहरी हो गई है.

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तेंदुओं के खाल के साथ गिरफ्तार तस्कर. (Photo: ITG)
तेंदुओं के खाल के साथ गिरफ्तार तस्कर. (Photo: ITG)

मध्य प्रदेश के जंगलों में तेंदुओं के शिकार से लेकर उनकी खाल और अंगों की अंतरराज्यीय तस्करी तक फैले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. उत्तर प्रदेश वन विभाग, मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. हैरानी की बात ये है कि जांच के दौरान दिल्ली के एक एनजीओ की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई है जो देश में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जानी जाती है.

मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस नेटवर्क के तार नए लोगों और संस्थाओं तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं. आगरा से गिरफ्तार दो आरोपियों के दिल्ली स्थित एक बड़े वन्यजीव संरक्षण संगठन से कथित तौर पर जुड़े होने की जानकारी सामने आने के बाद जांच और गहरा गई है. इसी सिलसिले में STSF ने एनजीओ के CEO को 17 अगस्त को शिवपुरी में जांच अधिकारी के सामने पेश होने का नोटिस जारी किया है.

NGO से जुड़े दो आरोपियों पर गंभीर आरोप
जांच के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी भगवान सिंह उर्फ सलीम को वन्यजीव तस्करी का पुराना आरोपी बताया जा रहा है. उसे 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था, जबकि उसके साथी वसीम की गिरफ्तारी 13 अगस्त को हुई. जांच एजेंसियों को शक है कि दोनों आरोपी पिछले करीब पांच साल से एक वन्यजीव संरक्षण NGO से जुड़े हुए थे. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी. फिलहाल STSF ने NGO के CEO को पूछताछ के लिए तलब किया है.

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आगरा की कार्रवाई से खुली तस्करी की परतें
इस पूरे नेटवर्क की कड़ी 23 जुलाई को आगरा-ग्वालियर हाईवे पर सैंया क्षेत्र के राजपूताना होटल में हुई कार्रवाई से सामने आई. वन विभाग, पुलिस और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी टीम की संयुक्त कार्रवाई में चार संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया गया. आरोपियों की निशानदेही पर तेंदुओं की खाल, कटे हुए सिर और अन्य वन्यजीव अवशेष बरामद किए गए. जांच आगे बढ़ने पर सामने आया कि मामला किसी एक इलाके तक सीमित नहीं था, बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान तक फैले नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है. अब तक की कार्रवाई में कुल 10 तेंदुओं की खालें बरामद होने की बात सामने आई है. इससे पहले सात शिकारियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी थी.

कूनो से चंबल तक तेंदुओं का शिकार
पूछताछ में सामने आई जानकारी के मुताबिक गिरोह ने मध्य प्रदेश के अलग-अलग जंगलों को निशाना बनाया. जांच एजेंसियों के अनुसार कूनो वाइल्डलाइफ डिवीजन में छह, श्योपुर में दो और मुरैना के चंबल अभयारण्य में दो तेंदुओं का शिकार किया गया. शिकार का तरीका भी बेहद क्रूर बताया गया है. आरोपियों के मुताबिक तेंदुओं को नायलॉन के जाल में फंसाया जाता था और इसके बाद उन्हें लाठियों से पीटकर मार दिया जाता था. 

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तेंदुए के मारे जाने के बाद उसकी खाल उतारी जाती थी और सिर, हड्डियां, नाखून, दांत और मूंछ जैसे अंग अलग कर लिए जाते थे. शव के बाकी हिस्से को जंगल में गड्ढा खोदकर दफनाने की बात भी जांच में सामने आई है. STSF अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए शिकारियों से लेकर खाल के खरीदारों और अंतिम सप्लायर तक पूरी चेन जोड़ने में जुटी है. साथ ही NGO से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है.

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