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सनातन धर्म पर किताब लिखेंगे धीरेंद्र शास्त्री, कहा- जल्द लूंगा कुछ दिनों का ब्रेक 

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने घोषणा की है कि वह सनातन धर्म पर किताब लिखेंगे. उन्होंने कहा कि वह जल्द ही रूटीन के कामों से कुछ दिनों का ब्रेक लेंगे और एकांत में बैठकर पुस्तक तैयार करेंगे.

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धीरेंद्र शास्त्री (फाइल फोटो)
धीरेंद्र शास्त्री (फाइल फोटो)

अपने बयानों को लेकर अकसर चर्चा में रहने वाले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार सुर्खियों में है. इस बार उन्होंने कोई विवादित बयान नहीं दिया, बल्कि एक घोषणा की है. धीरेंद्र शास्त्री ने गुरुवार को कहा कि वह सनातन धर्म पर किताब लिखने की योजना बना रहे हैं.  

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, "मैं सनातन धर्म पर एक किताब लिखने की योजना बना रहा हूं. इसके लिए मैं रोजाना वाले कामों से जल्द ही छुट्टी लूंगा और एकांत में बैठकर इस पुस्तक को तैयार करूंगा."

मंदसौर पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भीड़ को देखकर लग रहा है कि धर्म विरोधियों की जल रही होगी. इस दौरान उन्होंने ईसाई मिशनरीज को चुनौती देते हुए कहा कि मेरा सामना करो पैंट गीला करके भेजा जाएगा. वहीं शादी को लेकर अफवाह पर उन्होंने कहा कि न्यूज वाले रोज हमारी शादी करवा देते हैं और तो और हर बिटिया को भी बदल देते हैं.  

हाल ही में छात्रा ने किया है दावा

बता दें कि हाल ही में एमबीबीएस की छात्रा शिवरंजनी तिवारी ने कहा कि वह धीरेंद्र शास्त्री से प्रेम करती हैं. वह गंगोत्री से कलश लेकर बागेश्वर धाम तक की पदयात्रा पर निकली हैं. शिवरंजनी ने कहा कि वह 16 जून को बाबा बागेश्वर के साथ लाइव आकर भक्तों को सबकुछ बताएंगी. 

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शिवरंजनी ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री की तीन बातें उन्हें सबसे अच्छी लगती हैं. सबसे पहली यह कि वे सनातन का प्रचार करते हैं. दूसरी वे हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं और तीसरा उन्होंने कैंसर अस्पताल बनाने की बात कही है. छात्रा ने कहा कि मैं खुद एक मेडिकल की छात्रा हूं, इसलिए मेरे लिए इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है कि मैं उनके अस्पताल में काम करूं. 

शिवरंजनी ने कहा कि मैं तो खुद को बागेश्वर धाम की दासी मानती हूं और सबको यही बताती भी हूं. छात्रा ने कहा कि उसके परिवार की पहले से ही कलश यात्रा की इच्छा थी. इसलिए परिवार वालों ने कहा कि क्यों न यह कलश यात्रा बागेशवर धाम के लिए करते हैं. MBBS छात्रा ने कहा कि लोग कह रहे हैं कि प्यार के लिए इतना शोर कैसा, लेकिन मेरी कलश यात्रा के केवल दो ही मकसद थे. पहला कि हिंदू धर्म का प्रचार और दूसरा लोग आजकल संस्कार भूल गए हैं, उनको संस्कार के पथ से जोड़ना. इससे पहले भी उनका नाम कथावाचक जया किशोरी के नाम से जोड़ा जा चुका है. 
 

 

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