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साहित्य आजतक में तबले की ताल का आधुनिक रंग दिखाया निखिल परालिकर ने

साहित्य आजतक के मंच से निखिल परालिकर ने बताया कि जब वे पांच साल के थे, तब उनकी मां ने तबला लाकर दिया था. आज तबले को आधुनिक संगीत के साथ फ्यूजन करने के लिए जाने जाते हैं निखिल.

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साहित्य आजतक के मंच से तबले के विभिन्न रंगों से परिचय कराते निखिल परालिकर.
साहित्य आजतक के मंच से तबले के विभिन्न रंगों से परिचय कराते निखिल परालिकर.

  • विभिन्न प्रकार की संगीतों से कराया फ्यूजन
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तबले को कर रहे विख्यात
साहित्य आजतक के मंच से निखिल परालिकर ने बताया कि जब वे पांच साल के थे, तब उनकी मां ने तबला लाकर दिया था. उन्होंने बताया कि मैं उस समय पापा के गाने पर कोई डिब्बा लेकर उनके साथ मिक्सिंग करने की कोशिश करता था. और उनके गाने के साथ जब मिक्सिंग अच्छी होने लगी तो मां ने मुझे तबला लाकर दिया. इसके बाद मेरी क्लासिकल ट्रेनिंग शुरू हुई. फिर इंजीनियरिंग भी करी. पर मेरा ध्यान सिर्फ तबले की तरफ ही था. तबला अपने आप में बहुत बड़ा विषय है.

निखिल ने बताया कि तबले में जितना आप सीखेंगे, उतना कम लगेगा. आज भी सीख रहा हूं. इसका इतिहास और भविष्य इतना बड़ा है कि सीखना खत्म नहीं होगा. क्लासिकली सीखने के बाद अब मैं आज तबले के ताल को कॉमर्शियल म्यूजिक के साथ मिलाता हूं.

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तबला पखावज से बना है. शिव तांडव के समय पखावज का उपयोग हुआ था. इसके बाद मैंने सोचा क्यों न तबले को भी उपयोग इसके लिए किया जाए. इसके बाद निखिल ने तबले से पूरा शिव तांडव स्त्रोत बजाया. इसे यूट्यूब पर 10 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले हैं.

तबले को कैसे इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक के साथ फ्यूज कर सकते हैं. हमारा पूरा परिवार दुर्गा माता का भक्त है. इसलिए मैंने दुर्गा स्त्रोतम का तबला मिक्स किया. इसे सोशल मीडिया पर डाला तो इसका रिसपॉन्स भी बहुत अच्छा आया. मैं डीजे स्नेक के ऑफिशियल स्टेज पर परफॉर्म करने वाला पहला भारतीय कलाकार हूं.


इसके बाद निखिल ने डीजे स्नेक के हिपहॉप नंबर पर तबला बजाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस फ्यूजन के बाद रितविज के गाने पर तबले की ताल बिठाई तो मंच के सामने बैठे युवा दर्शक तालियों से स्वागत करने लगे. फिर, तीन ताल द्रुत पर तबले को साधकर दिखाया.

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