scorecardresearch
 

कलकत्ता के एक बांग्लादेशी जिगोलो की कहानी

'आप बंगाली, मारवाड़ी, पंजाबी या तमिल हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता. एक बार कोलकाता में आए तो आप इस कबीले का हिस्सा बन जाते हैं. यह अमेरिका में रहने जैसा है, जहां हर कोई अमेरिकी है.'

X
Kalkatta book Kalkatta book

'आप बंगाली, मारवाड़ी, पंजाबी या तमिल हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता. एक बार कोलकाता में आए तो आप इस कबीले का हिस्सा बन जाते हैं. यह अमेरिका में रहने जैसा है, जहां हर कोई अमेरिकी है.'

कोलकाता पर बहुत कुछ लिखा गया है, फिर भी बहुत कुछ कहने से रह गया है. एक नई किताब आई है कुनाल बासु की. नाम 'कलकत्ता'. यह इस ताकतवर शहर पर पहचान और संबंध के बारे में एक 'काला और खुरदुरा' बयान है. पैन मैकमिलन इंडिया की सहयोगी प्रकाशक इकाई पिकाडोर इंडिया ने इसे छापा है.

कोलकाता में जन्मे कुनाल बसु ने भारत और अमेरिका से पढ़ाई की. वह 'द जैपनीज वाइफ' जैसे कई सराही गई किताबों के लेखक हैं. इस किताब पर अवॉर्ड-विनिंग फिल्म भी बनी. कुनाल ऑक्सफोर्ड और कोलकाता में रहते हैं.

जामी कलकत्ता का 'जिगोलो किंग' है. उसे तस्करी के जरिये बांग्लादेश से भारत भेजा गया था. पक्का कलकत्ता-वाला बनने के सपने के साथ वह जकरिया स्ट्रीट पर खेलते हुए बड़ा होता है. लोकल गैंग से दोस्ती की वजह से स्कूल से निकाला जाता है, फिर एक पासपोर्ट जालसाज का असिस्टेंट बन जाता है. मसाज से काम से शुरुआत होती है और फिर कलकत्ता अपने दरवाजे जामी के लिए खोल देता है. अमीर-मशहूर हाउसवाइफ, टूरिस्ट, ट्रैवलिंग एग्जीक्यूटिव और कभी कभी बेशुमार पैसा देने वाली 'खतरनाक' पार्टियां उसकी ग्राहक हो जाती हैं.

लेकिन जैमी की दोहरी जिंदगी करवट लेती है जब वह पाब्लो नाम के एक लड़के से मिलता है जो ल्यूकीमिया से ग्रस्त है. आगे क्या होता है, वह आप किताब में पढ़िए.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें