टीवी से लेकर अख़बार और डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक नया कीवर्ड मिला है जो पिछले कुछ दिनों से पूरी तरह से छाया हुआ है, वो है मदर ऑफ ऑल डील. इस डील की होने वाली चर्चा के अलग-अलग कारण हैं लेकिन अगर आप शाम को एक हाथ में चखना और दूसरे में गिलास लेकर बैठने वाले 'शौकीन' से पूछेंगे, तो उसके लिए यह सिर्फ कोई समझौता नहीं, बल्कि एक 'इलाही पैगाम' जैसा है.
वो भी तब जब दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ महीनों से शराब की किल्लत ऐसी रही है कि लोग ठेकों के बाहर वैसे ही खड़े नज़र आते थे, जैसे कभी राशन की दुकान पर मिट्टी के तेल के लिए खड़े होते थे. ऐसे में जब ख़बर आई कि अब स्कॉच, वाइन और व्हिस्की के यूरोपियन ब्रांड्स सस्ते होंगे, तो जाम के शौकीनों के चेहरे पर वैसी ही रौनक आ गई जैसी निदा फाजली के इस शेर में दिखती है:
'कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई, आओ कहीं शराब पिएं रात हो गई'
आसान भाषा में समझें तो भारत और ईयू एक ऐसे समझौते की तरफ बढ़े हैं, जिसमें दोनों तरफ से लगने वाली ड्यूटी (टैक्स) को कम या खत्म कर दिया जाएगा. अभी आप जब कोई विदेशी स्कॉच या वाइन खरीदते हैं, तो उस पर करीब 150% की इंपोर्ट ड्यूटी लगती है. यानी अगर बोतल की असली कीमत 100 रुपये है, तो वह आप तक पहुंचते-पहुंचते 250 रुपये से ऊपर हो जाती है. इस डील के बाद यह ड्यूटी धीरे-धीरे कम होकर 50% या उससे भी नीचे आ सकती है. इसका सीधा मतलब है कि जो बोतल आपकी पहुंच से बाहर थी, वह अब आपकी मेज की शोभा बढ़ा सकती है.

डील की चर्चा होते ही दो चीज़ों का ज़िक्र सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा हुआ, एक ब्रांडेड गाड़ियां और दूसरा ब्रांडेड शराब. अब गाड़ियां तो हर किसी की पहुंच में हैं नहीं, इसलिए सबकी बात शराब की बोतल पर आकर अटक गई. क्यूंकि ये भी समझना ज़रूरी है कि एक आम भारतीय शराबी के लिए दो ही समस्याएं रही हैं—पहली जेब और दूसरी वैरायटी. दिल्ली में पॉलिसी बदली तो लाइन में लगकर पसीने छूट गए, गुड़गांव जाओ तो पुलिस का डर रहता है. ऐसे में अगर घर के पास वाले ठेके पर स्कॉटलैंड की व्हिस्की या फ्रांस की वाइन वाजिब दाम पर मिलने लगे, तो एक शराबी के लिए उससे बड़ी खुशी क्या होगी?
शौकीन लोग अक्सर कहते हैं कि 'नशा पिला के गिराना तो सबको आता है, मजा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी" इस डील के जरिए सरकार एक तरह से 'साकी' की भूमिका में आ गई है, जो मार्केट में प्रीमियम ऑप्शंस की बाढ़ लाने वाली है और निराश होते शराबियों के लिए उसने एक नया दरवाज़ा खोला है.
जैसे ही इस डील की सुगबुगाहट तेज हुई, शेयर बाजार में भारतीय शराब कंपनियों के शेयर ऐसे गिरे जैसे किसी ने चलती महफिल में पुलिस की रेड मार दी हो. 'यूनाइटेड स्पिरिट्स' और 'रेडिको खेतान' जैसी कंपनियों के निवेशक थोड़े डरे हुए हैं. डर वाजिब भी है. अब तक ये कंपनियां भारतीय मार्केट पर राज कर रही थीं क्योंकि विदेशी ब्रांड्स महंगे थे.
अब जब स्कॉच और प्रीमियम व्हिस्की सस्ती होगी, तो लोग 'देसी ठाठ' छोड़कर 'विदेशी विंटेज' की तरफ भागेंगे. हालांकि, इसका एक फायदा यह भी है कि अब भारतीय ब्रांड्स को अपनी क्वालिटी सुधारनी पड़ेगी ताकि वो यूरोपियन जायके को टक्कर दे सकें.
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पिछले कुछ समय से दिल्ली में शराब को लेकर जो मारामारी मची है, उसने शराबियों को दार्शनिक बना दिया है. कोई कहता है कि "महफिल में जाम न हो तो सन्नाटा चीखता है." राजधानी में ब्रांड्स की कमी और दुकानों की बंदी ने एक बड़ा गैप पैदा कर दिया था.
ऐसे वक्त में विदेशी शराब की सस्ती कीमतों वाली खबर किसी ठंडी फुहार जैसी है. एक तरफ वो लोग हैं जिन्हें अपनी पसंदीदा ब्रांड की बोतल नहीं मिल रही, और दूसरी तरफ अब उम्मीद जगी है कि जल्द ही 'सिंगल मॉल्ट' के वो ब्रांड्स भी बजट में होंगे जो अब तक सिर्फ ड्यूटी-फ्री शॉप्स या फिल्मों में देखे जाते थे.
कव्वालियों में शराब को अक्सर 'इश्क़' और 'इबादत' से जोड़कर देखा गया है. तभी अज़ीज़ मियां अपनी कव्वाली में कहते हैं कि मयख़ाने में मज़ार अगर हमारा कभी बना, दुनिया यही कहेगी कि जन्नत में घर बना.
यह डील भी कुछ ऐसी ही जन्नती आंखों वाली साकी नजर आ रही है. अगर यह हकीकत में बदलती है, तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा शराब मार्केट बन सकता है. अभी भारत में शराब की खपत करोड़ों लीटर में है, लेकिन प्रीमियम सेगमेंट में अभी भी बहुत स्कोप बचा है.
एक शराबी के लिए यह डील किसी लॉटरी से कम नहीं है. सस्ती शराब, ज्यादा ऑप्शन और बेहतर क्वालिटी—यह किसी भी जाम के शौकीन का सपना होता है. लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह एक 'ट्रेड डील' है. इसमें सिर्फ शराब ही नहीं, बल्कि डेयरी प्रोडक्ट्स, गाड़ियां और डेटा प्रोटेक्शन जैसे गंभीर मुद्दे भी शामिल हैं. हो सकता है कि आने वाले समय में आपको अपनी पसंदीदा फ्रेंच वाइन पर कुछ सौ रुपये कम देने पड़ें, लेकिन इसके साथ ही भारतीय कंपनियों को भी अपनी कमर कसनी होगी. तब तक के लिए, बस यही कहा जा सकता है: (फ़ना बुलंदशहरी से माफ़ी के साथ)
'बोतल खुली है डील में जाम-ए-शराब है
ऐ 'आशिक़ो तुम्हारी दुआ कामयाब है'