आपने अक्सर लोगों को ये कहते सुना होगा कि अपोजिट जेंडर एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं पर हकीकत ये है कि हमारा दिल उसी को स्वीकार करता है, जो हमारे जैसा होता है. जिसकी सोच से हमारी सोच मिलती है, जिसकी भावनाएं हमारी भावनाओं जैसी होती हैं. ये समानता वक्त के साथ बढ़ती जाती है और इसी के साथ दो लोगों के बीच का तालमेल भी.
यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में इस तथ्य को परखने के लिए एक प्रयोग भी किया गया है. साइकोलॉजिस्ट रॉबर्ट जाजोंक की निगरानी में हुए इस प्रयोग में कुछ जोड़ों से उनकी शादी के तुरंत बाद की और शादी के 25 साल बाद की तस्वीरें मांगी गईं.
प्रयोग में पाया गया कि शादी के ठीक बाद की तस्वीरों में जहां जोड़े एक-दूसरे से काफी अलग नजर आ रहे थे वहीं उनमें काफी समानता आ चुकी थी. जिन तस्वीरों में ज्यादा समानता दिखी, उन जोड़ों से बातचीत में पता चला कि वे अपने वैवाहिक जीवन से बहुत खुश हैं और अपने पार्टनर के व्यवहार से पूरी तरह संतुष्ट भी.
जाजोंक का कहना है कि लंबे समय तक एक साथ रहने वाले जोड़े काफी हद तक एक जैसे नजर आने लगते हैं क्योंकि वे एक-दूसरे के हाव-भाव को बेहद करीब से देखते हैं और धीरे-धीरे उसे कॉपी करने लग जाते हैं. मसलन, अगर बहुत मजाकिया है और खुश रहता है तो आप भी उसके साथ खुश रहते हैं. हंसते हैं. ऐसे में जैसी लकीरें उसके चेहरे पर बनती हैं, आपके चेहरे पर भी वैसी ही लकीरें बनती हैं.
प्रयोग में ये भी पाया गया है कि कोई भी शख्स अपनी जैसी पर्सनैलिटी वाले शख्स की ओर ज्यादा आकर्षित होता है. प्रयोग में निष्कर्ष के तौर पर कहा गया है कि एक लंबे वक्त तक साथ रहने के बाद जोड़े एक जैसे शायद इसलिए दिखने लगते हैं क्योंकि वे पहले से ही किसी न किसी रूप में एक जैसे होते हैं.