फिटनेस को लेकर लोग काफी लोग अवेयर हो चुके हैं और उनमें से कई लोग रोजाना एक्सरसाइज करते हैं. कुछ लोग जिम जाते हैं तो कुछ लोग घर पर ही या ग्राउंड में जाकर बॉडीवेट और लाइट एक्सरसाइज करना पसंद करते हैं. जो लोग जिम नहीं जाते उनके रूटीन में रोप जंप (रस्सी कूदना) एक्सरसाइज जरूर शामिल होती है. इस एक्सरसाइज में एक्सरसाइज रोप की मदद से जंप की जाती है. ये काफी अच्छी एक्सरसाइज है लेकिन क्या आप जानते हैं आपकी फिटनेस, स्टैमिना और स्ट्रेंथ के लिए यह बेहतरीन ऑपशन हो सकती है. बशर्ते इसे सही तरीके से किया जाए. तो आइए जानते हैं यदि कोई रोजाना 30 दिन तक 100 बार रस्सी कूदता है तो उसकी बॉडी में क्या असर हो सकता है.
बॉडी पर होगा ऐसा असर?
रोप जंपिंग एक वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज है जो एक साथ आपके पैरों, कोर और दिल पर काम करती है. अगर आप इसे लंबे समय तक करते हैं तो यह आपकी बॉडी की स्टैमिना, कोऑर्डिनेशन, बैलेंस और निचले हिस्से की मजबूती को बढ़ाने में काफी हेल्पफुल साबित होती है.
फिटनेस के नजरिए से देखें तो यह एक अच्छा वर्कआउट हो सकता है लेकिन हमेशा याद रखें कि सिर्फ नंबर पूरा करने के लिए इसे न करें बल्कि क्वालिटी वाली एक्सरसाइज पर फोकस करें.
हड्डियों और जोड़ों की मजबूती
अमेरिकन काउंसिल ऑन एक्सरसाइज (ACE) का कहना है, रोप जंपिंग जैसी मॉडरेट-इंपैक्ट एक्सरसाइज आपकी बोन हेल्थ के लिए काफी अच्छी मानी जाती है क्योंकि ये बोन डेंसिटी बनाए रखने में मदद करती है.
हेल्थलाइन के एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह घुटनों और एंकल्स के आसपास की मसल्स को मजबूत करती है जिससे जॉइंट स्टेबिलिटी बेहतर होती है. हालांकि, ये फायदे तभी मिलते हैं जब आप सही फॉर्म और पर्याप्त रिकवरी टाइम का ध्यान रखते हैं. जंपिंग जैसी एक्सरसाइज बोन डेंसिटी को बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत करने में मददगार होती हैं.
इन बातों का रखें खास ख्याल
30 दिन तक लगातार जंप करने का मतलब यह नहीं है कि आप बिना सोचे-समझे शुरू हो जाएं. यदि आपकी तकनीक गलत है, हार्ड जूते पहन रहे हैं, हार्ड सरफेस पर कर रहे हैं तो यह एक्सरसाइज घुटने, एंकल्स और लोअर बैक पर भी बुरा असर डाल सकती है.
गलत तरीके से रोप जंप करने पर शिन पेन, टेंडन इरिटेशन या मसल्स में खिंचाव जैसी परेशानियां हो सकती हैं. हमेशा अपनी बॉडी की लिमिट्स को समझना और सही जूते पहनना बहुत जरूरी है ताकि इंजरी का रिस्क कम हो सके.
ऐसे लोग रहें सावधान
अगर आपको घुटनों में दर्द, एंकल इंजरी, ऑस्टियोपोरोसिस, बैलेंस की समस्या या पुरानी चोट जैसी कोई दिक्कत है तो यह चैलेंज शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें. फिटनेस का मतलब सिर्फ चैलेंज पूरा करना नहीं है बल्कि अपनी बॉडी की जरूरतों को समझना है.
हमेशा धीमी शुरुआत करें, लैंडिंग सॉफ्ट रखें और रिकवरी के लिए टाइम जरूर दें. अगर आपको बॉडी में कहीं भी दर्द महसूस हो तो इसे जबरदस्ती करने के बजाय ब्रेक लेना ज्यादा सही है.