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Dhamaal 4 Review: खराब VFX ने बिगाड़ा मूड, कॉमेडी बर्दाश्त करना मुश्किल

धमाल फ्रेंचायजी की चौथी फिल्म थिएटर्स में रिलीज हो गई है. इसके ट्रेलर ने काफी उम्मीदें जगाई थीं. इस पार्ट में कास्ट भी देखने में दमदार लग रही थी. लेकिन फिल्म बिल्कुल मजेदार नहीं निकली. आखिर कहां हुई धमाल 4 से चूक? पढ़िए हमारा रिव्यू...

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कैसी है धमाल 4 फिल्म? (Photo: IMDb)
कैसी है धमाल 4 फिल्म? (Photo: IMDb)
फिल्म:धमाल 4
1/5
  • कलाकार : अजय देवगन, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, रितेश देशमुख, रवि किशन
  • निर्देशक :इंद्र कुमार

बॉलीवुड में कॉमेडी फ्रेंचायजी बड़ी सारी हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही का जादू ऑडियंस पर चलता है. हाल ही में अक्षय की वेलकम टू द जंगल ने वो चीज दोहराने की कोशिश की. अब अजय देवगन भी 'धमाल 4' लाए हैं, जो एक और जबरदस्त फ्रेंचायजी का हिस्सा है. साल 2007 से इसकी शुरुआत हुई थी और पिछले 19 सालों में इसके तीन पार्ट्स आ चुके हैं. खास बात ये है कि तीनों पार्ट्स लोगों को पसंद आए.

धमाल 4 को लेकर उम्मीदें तभी से बंधने लगी थीं जब इसका ट्रेलर रिलीज हुआ था. उसे काफी पसंद किया गया था. ट्रेलर में जो कॉमेडी पंच थे, वो सही से लैंड भी हो रहे थे. लेकिन वो कहावत हैं ना कि किसी चीज से ज्यादा उम्मीदें लगा लो, तो उसके टूट जाने पर बहुत ज्यादा दुख पहुंचता है. अजय देवगन स्टारर इस फिल्म धमाल 4 के साथ भी कुछ वैसा ही हुआ है. आइए, आपको विस्तार से समझाते हैं कि आखिर मैंने ऐसा क्यों कहा. 

धमाल 4 की वही पुरानी कहानी

धमाल फ्रेंचायजी एक एडवेंचर कॉमेडी फिल्म है, जिसमें कई सारी अनोखी सिचुएशन्स के अंदर ह्यूमर डाला जाता है. पहले पार्ट से शुरू हुई ये प्रथा चौथे पार्ट तक चली आ रही है. इस बार भी कुछ लोगों को खूब सारे पैसे (खजाने) के बारे में पता चलता है, जिसे ढूंढने के लिए सब अलग-अलग निकल जाते हैं. उनके मन में लालच नाम का बीज है, जो खूब सारी शौहरत पाना चाहता है.

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धमाल 4 में गुड्डू (अजय देवगन)- जॉनी (संजय मिश्रा), आदी (अरशद वारसी)-मानव (जावेद जाफरी) और लल्लन (रितेश देशमुख)- ये तीन टीम है जिन्हें पृथ्वी (उपेंद्र लिमये) के जरिए डाकू शैतान सिंह के 100 साल पुराने खजाने के बारे में पता चलता है. इस खजाने के पीछे एक समुद्री डाकू अधूरा (रवि किशन) भी पड़ा है. सभी उस खजाने को ढूंढने के लिए निकल पड़ते हैं, जिसमें उन्हें कई सारी कठिनाइयों से भी गुजरना पड़ता है. ऐसे में क्या सबको खजाने का बराबर हिस्सा मिलेगा या कोई चालाक उनसे पहले ही खजाना लूटकर निकल लेगा? यही इस फिल्म की स्टोरी है. 

कैसी है राइटिंग-डायकरेक्शन?

धमाल 4 एक स्लैपस्टिक-कॉमेडी फिल्म जरूर है, मगर इसकी कॉमेडी बिल्कुल इंप्रेस नहीं करती है. शुरुआत से लेकर अंत तक इसमें अपनी ही पुरानी फिल्मों के रेफरेंस भरे हुए हैं. धमाल फ्रेंचायजी की खासियत इसकी सिचुएशनल कॉमेडी थी, जिसकी इस फिल्म में कमी महसूस हुई. ऐसा लगा कि मानो स्क्रीन पर जो कुछ चल रहा है, उससे आपको कोई मतलब रखने की जरूरत नहीं.

अगर आप इसे बिना दिमाग लगाए भी देखने की कोशिश करेंगे, तो भी इसके जोक्स नहीं हंसाते हैं. एक पूरी फिल्म की बात करें, तो इसकी राइटिंग काफी निराशाजनक है. हालांकि फिल्म में जिन इमोशन्स को पेश किया गया है, वो अंत में आकर आपको अच्छे लग सकते हैं. डायरेक्टर इंद्र कुमार ऑडियंस को सीट पर बांधे रखने के काम में पास नहीं हुए. उनकी फिल्म मजा कम दिलाती है, बोर ज्यादा करती है. 

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निराशाजनक है VFX

धमाल 4 का सबसे कमजोर पक्ष मानें या ना मानें, लेकिन इसका VFX है. अगर एक नजरिए से देखा जाए तो इसकी स्टोरी की डिमांड के मुताबिक, जो विजुअल्स इसमें डाले गए हैं वो प्रैक्टिकली शूट या बनाना संभव नहीं है. मगर इसका ये भी मतलब भी नहीं होता है कि पूरी फिल्म सिर्फ VFX के भरोसे टिकी हो.

अरशद वारसी ने अपने कई सारे इंटरव्यूज में धमाल 4 से जुड़ी एक दिलचस्प स्टोरी शेयर की थी. उन्होंने बताया कि फिल्म में एक सीन के अंदर सभी एक्टर्स पहाड़ के कोने पर लटके हुए हैं. ये पूरा सीक्वेंस काफी खतरनाक है और इसे सचमुच रियल लोकेशन पर शूट किया गया है. सच कहें तो फिल्म देखते वक्त वो सीन आपकी चिंता बढ़ाता जरूर है.  

लेकिन एक पूरी फिल्म को देखते हुए इसमें जिस लेवल का VFX इस्तेमाल किया गया है, वो एक ठीक-ठाक लगने वाली कॉमेडी फिल्म को भी बर्बाद करने का काम कर जाता है. पिक्चर का लगभग हर सीन पर्दे पर नकली लगता है, जिससे इसे देखते वक्त आप इरिटेट होने लगते हैं. आपका मूड ना चाहते हुए भी खराब होने लगता है और आप ये सोचने लग जाते हैं कि फिल्म कब खत्म होगी. 

एक्टर्स भी रहे नाकाम

आदी-मानव के आइकॉनिक रोल में अरशद वारसी और जावेद जाफरी अपना काम बढ़िया कर जाते हैं. उनके साथ संजीदा शेख भी हैं, जिन्हें जितना रोल मिला है उसे उन्होंने सही से परफॉर्म किया. लेकिन रितेश देशमुख निराश कर जाते हैं. वो कई सीन्स में जबरदस्ती की कॉमेडी करते दिखते हैं, जो उनपर बिल्कुल अच्छा नहीं लगा. उनकी जोड़ी अंजलि आनंद के साथ बनी, जो देखने में उतनी मजेदार नहीं थी. 

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वहीं संजय मिश्रा और अजय देवगन की जुगलबंदी ठीक-ठाक रही. अजय ने अपना स्टार पावर दिखाते हुए सीन्स को उठाने की कोशिश की. इनके अलावा रवि किशन और उपेंद्र लिमये भी अच्छी कॉमेडी कर गए. मगर ये सभी लोग मिलकर कोई कमाल नहीं दिखा पाए, जिससे बड़े पर्दे पर 'धमाल' हो सके. धमाल 4 के गाने भी कुछ खास यादगार या मजेदार नहीं हैं.

कुल मिलाकर अगर आप इस फ्रेंचायजी के भरोसे इस फिल्म को देखने का प्लान बना रहे हो तो आप इसे एक मौका दे सकते हैं. वैसे भी मेकर्स इसका पांचवा पार्ट लाने ही वाले हैं, जिसकी अनाउंसमेंट इसी फिल्म के अंत में कर दी गई है. 

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