
Frequent Urination: शरीर पेशाब या यूरिन के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है. इंसान की यूरिन में पानी, यूरिक एसिड, यूरिया और विषाक्त पदार्थ होते हैं. अधिकतर लोग दिन में 6-7 बार पेशाब करते हैं. लेकिन कई लोगों को दिन में बार-बार पेशाब आती है इसके कारण उन्हें बार-बार यूरिनेशन के लिए जाना होता है.
कुछ लोगों का मानना है कि बार-बार यूरिन आना सेहत के लिए सही होता है लेकिन ऐसा नहीं है. अगर किसी को बार-बार यूरिन आती है तो उसे कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा भी हो सकता है. इस बारे में जानने के लिए हमने बीएलके-मैक्स सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में यूरोलॉजी एंड यूरो ऑन्कोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. यजवेंद्र प्रताप सिंह राणा (Dr. Yajvender Pratap Singh Rana) से बात की और इस बारे में जाना कि बार-बार यूरिन सही है या नहीं?
बार-बार यूरिनेशन क्या है और इससे किन बीमारियों का खतरा है?
डॉ. यजवेंद्र प्रताप सिंह राणा ने बताया, ‘अगर कोई कोई दिन में लगभग तीन से साढ़े तीन लीटर पानी पीता है और अगर दिन में हर चार घंटे में यूरिनेशन के लिए जा रहा है तो वह सही है. ऐसा व्यक्ति रात में एक बार यूरिनेशन के लिए भी उठ सकता है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति रात में बार-बार यूरिनेशन के लिए उठता है तो वह सामान्य नहीं है.'
डॉ. यजवेंद्र आगे बताते हैं, ‘अगर कोई इंसान की यूरिन की क्वांटिटी तो कम (100-300 मिली लीटर) है लेकिन वह बार-बार यूरिनेशन के लिए जा रहा है तो वह ओवर एक्टिव ब्लैडर के कारण हो सकता है. वहीं अगर किसी की यूरिन की मात्रा अधिक (400-500 मिली लीटर) है और वह हर 1-2 घंटे में यूरिनेशन के लिए रहा है तो उसे पॉलीयूरिया नाम की बीमारी हो सकती है.'
बार-बार पेशाब आने के कारण (Reason for frequent urination)

डॉ. यजवेंद्र कहते हैं, 'वास्तव में कई अलग-अलग स्थितियां हैं जो बार-बार यूरिनेशन का कारण बन सकती हैं. इनमें से कई कारण आपकी उम्र, लिंग या संभवतः दोनों पर आधारित हैं. अलग-अलग कारणों से सभी को बार-बार यूरिनेशन की समस्या हो सकती है. जैसे,
ओवरएक्टिव ब्लैडर (Overactive bladder):
ओवरएक्टिव ब्लैडर को ओएबी (OAB) भी कहा जाता है. इसके कारण बार-बार और अचानक पेशाब करने की इच्छा पैदा होती है जिसे नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है. आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आपको 24 घंटे में कई बार यूरिनेशन के लिए जाना होगा.
ओवरएक्टिव ब्लैडर की समस्या को पेल्विक फ्लोर की मसल्स का उपयोग करके ब्लैडर होल्डिंग टेक्नीक से दूर किया जा सकता है. साथ ही साथ लाइफस्टाइल और खाने-पीने की आदत में बदलाव करके भी ओवरएक्टिव ब्लैडर की समस्या को दूर किया जा सकता है. लेकिन किसी भी चीज को फॉलो करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
यूरिनरी ट्रैक और ब्लैडर कंडिशन (Urinary tract and bladder conditions):
यूरिनरी ट्रैक और ब्लैडर कंडिशन भी बार-बार यूरिनेशन के कारणों में से एक है. कुछ यूरिनरी ट्रैक संक्रमण (यूटीआई) विशेष रूप से बार-बार यूरिनेशन का सबसे आम कारण है. यूटीआई के दौरान एक बाहरी संक्रमण शरीर में प्रवेश करता है और आपके यूरिनरी सिस्टम में सूजन का कारण बनता है. यह सिस्टम किडनी, किडनी को मूत्राशय से जोड़ने वाली नलियां, ब्लैडर और शरीर से मूत्र को बाहर निकालने वाली नली से बना होती है. इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस और ओवर एक्टिव सिंड्रोम भी बार-बार यूरिनेशन का कारण बन सकते हैं. कुछ दुर्लभ मामलों में बार-बार यूरिनेशन ब्लैडर कैंसर का लक्षण भी हो सकता है.
डायबिटीज (Diabetes):
बार-बार यूरिनेशन वास्तव में डायबिटीज का एक बहुत ही सामान्य लक्षण है. यदि आपको टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज है तो आपको इसकी शिकायत हो सकती है. दरअसल, डायबिटीज में आपकी किडनी ब्लड को फिल्टर करने के लिए ओवरटाइम करती हैं और इस कारण आपको अधिक लिक्विड रिलीज करना होता है. जितना अधिक आप यूरिनेशन करेंगे उतना ही लिक्विड आपके शरीर से बाहर निकलता है.
प्रेग्नेंसी (Pregnancy):
प्रेग्नेंसी के दौरान भ्रूण आपके शरीर के अंदर अधिक से अधिक जगह घेर लेता है इसलिए उस समय ब्लैडर सिकुड़ जाता है. जिससे बार-बार यूरिनेशन के लिए जाना होता है. यह प्रेग्नेंसी में बहुत ही सामान्य लक्षण है. दिलचस्प बात यह है कि आप इस लक्षण को अपने पहले और तीसरे तिमाही के दौरान अधिक अनुभव करेंगे और फिर दूसरी तिमाही थोड़ी राहत मिलती है. बच्चे के जन्म के बाद के कुछ हफ्तों या महीनों में यह समस्या दूर हो जाती है. यूरिन रिलीज की समस्याओं से बचने के लिए महिलाओं को कीगल एक्सरसाइज करनी चाहिए.
प्रोस्टेट (Prostate):
पुरुषों में प्रोस्टेट एक गोल्फ-बॉल के आकार की ग्रंथि है जो इजेक्युलेशन (स्खलन) के दौरान निकलने वाले कुछ लिक्विड को बनाती है. जैसे-जैसे आप बढ़ते हैं आपका प्रोस्टेट बढ़ता है लेकिन अगर यह बहुत बड़ा हो जाता है तो यह समस्या पैदा कर सकता है. बड़े प्रोस्टेट आपके यूरिनरी सिस्टम पर दबाव डाल सकता है जिससे बार-बार यूरिन आती है.
बार-बार पेशाब आने के अन्य कारण:
- स्ट्रोक आना
- पेल्विक ट्यूमर
- मूत्रवर्धक दवाओं का उपयोग
- वजाइना (योनि की सूजन) होना
- पेल्विक एरिया में रेडिएशन थैरेपी
- शराब का अधिक सेवन
- कैफीन का अधिक सेवन
कितना यूरिनेशन सुरक्षित? (How much urination is safe)

डॉ. यजवेंद्र के मुताबिक, 'स्वस्थ पुरुष और महिलाओं में यूरिन आउटकम रोजाना लगभग 2 से 2.2 लीटर होना चाहिए. हालांकि, बार-बार पेशाब आना कुछ बीमारियों का संकेत भी हो सकता है. इनमें से कुछ में किडनी, ब्लैडर इंफेक्शन, डायबिटीज, यूटीआई या प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ी हो सकती हैं.”
रोजाना कितना पानी पीना सुरक्षित? (How much water is safe to drink daily)

डॉ. यजवेंद्र बताते हैं, 'आजकल के लोगों का मानना है कि पानी अधिक पीने से शरीर को फायदा मिलता है लेकिन उन्हें इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि अति हर चीज की बुरी होती है. एक इंसान अगर सामान्य दिनों में 3 लीटर और गर्मियों में 3.5 लीटर पानी पीता है तो वह सुरक्षित माना जाता है. बार-बार पेशाब आने के कारण नींद में खलल पैदा होगा और वहीं भरा हुआ ब्लैडर रात में बार-बार नींद से जगाता रहेगा. डॉक्टर्स इस स्थिति को नॉक्ट्युरिया (Nocturia) कहते हैं.'
बार-बार यूरिनेशन की समस्या किसे होती है? (Who has the problem of frequent urination)
एक्सपर्ट कहते हैं कि बार-बार यूरिनेशवन की जरूरत किसी को को भी हो सकती है. पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सभी में यह लक्षण हो सकते हैं. हालांकि मध्यम वर्ग के लोग, वृद्ध, गर्भवती महिलाएं और प्रोस्टेट की समस्या वाले लोगों को इसकी अधिक समस्या होती है.