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G20: जब शेफ कुणाल कपूर के खाने का स्वाद चखकर ऋषि सुनक की पत्नी को आई घर की याद...कही ये बात

G20 शिखर सम्मेलन में भारतीय शेफ कुणाल कपूर ने ऋषि सुनक की पत्नी अक्षिता समेत विदेशों से आए मेहमानों को मिलेट से बनी डिशेज़ चखाईं. कुणाल कपूर ने आजतक से खास बातचीत में अपना एक्सपीरियंस शेयर किया और कई किस्से भी साझा किए. आइए जानते हैं...

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Chef Kunal Kapoor Interview
Chef Kunal Kapoor Interview

भारत ने 18वें जी-20 शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की है. राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के प्रगति मैदान के भारत मंडपम में जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल हुए विदेशी मेहमानों के लिए लंच और डिनर का खास आयोजन किया गया. इस दौरान मिलेट्स फूड चर्चा में रहे. दुनिया के दिग्गजों ने भारतीय शेफ कुणाल कुमार के हाथ से बने खाने का स्वाद चखा. कुणाल कपूर ने aajtak.in से खास बातचीत में जी-20 में भारतीय खाने के जादू के कई राज खोले. अपना एक्सपीरियंस शेयर करने के साथ ही उन्होंने अपने करियर से जुड़ी कई अहम बातें भी साझा कीं. आइए जानते हैं...


सवाल: भारत इस साल G20 की अध्यक्षता कर रहा है यहा एक प्राउंड मूमेंट और आप भी इसका हिस्सा हैं, तो आपको कैसा फील हो रहा है?

जवाब: मुझे लगता है जहां पर बड़े-बड़े देश हिंदुस्तान आए हैं, बड़े-बड़े मुद्दों पर बातें हो रही हैं तो एक आम आदमी और एक शेफ के तौर पर हम भी अपना दायित्व निभा सकते हैं. अपने कल्चर को प्रमोट करते हुए, जैसे मुझे अवसर मिला. मेरी एक हंबल अप्रोच रही है कि हिंदुस्तानी शाकाहारी खाना, अपने तौर तरीके, खासकर हमारे खाने की जो सभ्यता रही है, मिलेट्स को हम प्रमोट करें. 

सवाल: आपने जी-20 में दो स्टॉल लगाई थीं वो लंच के लिए थी या डिनर के लिए? क्या लंच सिर्फ लेडी गेस्ट के लिए था? आपको कैसे अप्रोच किया था, किसने कॉल किया था?

जवाब: लंच सिर्फ लेडी गेस्ट के लिए था. मुझे लगता है सारा कॉ़र्डिनेशन मिनिस्ट्री के थ्रू हुआ था और वो ऐसे शेफ की तलाश में थे जिन्होंने पहले मिलेट्स के साथ काम किया है. तो काफी समय से मैं मिलेट्स पर काम कर रहा हूं. आप मेरा यूट्यूब चैनल भी देखेंगे तो आपको मिलेट्स की, खासकर रागी के ऊपर खेत में जाकर बताया है कि यह कैसा होता है, कैसे इसको पकाया जाता है कैसे इसकी रोटी बनती है. पिछले कुछ समय से मिलेट्स के साथ में काम कर रहा था और अभी आने वाले जो वीडियोज़ हैं मेरे चैनल पर उसमें मिलेटस् का अलग-अलग तरीके से यूज होगा. मुझे लगता है यह एक मैच है कि कोई शेफ मिलेट्स को पका रहा है प्रमोट कर रहा है क्योंकि यह इंटरनेशल ईयर ऑफ मिलेट्स भी है. जब हमारा देश भी हेल्दी ईटिंग और मिलेट्स को प्रमोट कर रहा है.

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सवाल: हम आम लोग मिलेट्स से बाजरा रोटी या सिंपल कोई डिश बनाकर खाते हैं. आप जब वहां पर गए तो आपने मिलेट्स के साथ कुछ स्पेशल किया होगा. आपने वहां ऐसा क्या बनाया लोगों को पसंद आया?

जवाब:  देखिए, एक तो अगर आप इंटरनेट पर जाकर सर्च भी करेंगे मिलेट्स और उसकी वैरायटी तो आपको 9-10 वैरायटी तक मिल जाएंगी लेकिन आपको यह जानकर बहुत ताज्जुब होगा कि हिंदुस्तान में इससे भी कई ज्यादा मिलेट्स की वैरायटी हैं जो छोटे-छोटे जगह, गावों में खाई जाती हैं और कई ऐसी हैं जिनका नाम अभी तक इंटरनेट पर भी नहीं आया होगा. मिलेट्स की खासियत यह होती है कि इसको आप कम पानी में, कम उपजाऊ भूमि में आराम ले लगा सकते हैं. तो यह किसानों को बहुत हेल्प करती है. 

ज्वार, बाजरा, बार्नयार्ड मिलेट, कुटकी, कोडो मिलेट, फॉक्सटेल मिलेट, रागी, यह सारी जितनी भी मिलेट्स हैं, यह सारी बहुत ही कम पानी में और कम उपजाऊ जमीन में भी आराम से उग जाते हैं. तो यह मिट्टी को भी न्यूट्रीशियस रखती हैं उसको ज्यादा ड्रेन नहीं करतीं. किसान को भी ज्यादा देखरेख या समय नहीं लगाना पड़ता और यह हेल्दी भी है. हम लोग गेंहू और चावल पर पूरी तरह निर्भर ना होकर, पहले हिंदुस्तान के लिए और फिर पूरे विश्व के लिए एक्सपोर्ट भी कर सकते हैं. इकॉनोमी के लिहाज से भी यह एक ऑप्शन है. 

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सवाल: आपका पसंदीदा मिलेट कौन-सा है? आपको सबसे ज्यादा क्या पसंद है?

मुझे ज्वार बहुत पसंद है क्योंकि ज्वार बिल्कुल पकने के बाद मोतियों की तरह हो जाता है और अगर आप उसको एक सही समय तक पकाते हैं तो वो सॉफ्ट हो जाता है और थोड़ी सी अपनी शेप को बदलता है. ज्वार भी साबूदाना का तरह मोती जैसा बन जाता है. मुझे रागी भी बहुत अच्छी लगती है. 

सवाल: आपने G20 में मेहमानों के लिए कौन-सी डिशेज़ बनाईं?

जवाब: देखिए, मैंने जो सर्व किया था वो था ज्वार, बाजरा और मशरूम का खिचड़ा. यह एक पुरानी क्लासिक इंडियन डिश है जो बनती है अलग-अलग मिलेट्स से और उसके अंदर कुछ दालें और मीट भी डाला जाता है. इसको अच्छे से पकाते थे खिचड़ी की तरह. खिचड़ी के नॉनवेज वर्जन को खिचड़ा कहते हैं. लेकिन मैंने जो सर्व किया वो 100 प्रतिशत वेजिटेरियन था. उसमें मीट नहीं डाला. मशरूम का इस्तेमाल किया. मैंने इसका वेजिटेरियन वर्जन बनाया और जो मशरूम की अलग-अलग वैरायटी होती हैं, जो हम आमतौर पर खाते हैं वो बटर मशरूम, इनका टेस्ट बहुत माइल्ड होता है कई लोगों को पसंद है, कई लोगों को नहीं पसंद है.

लेकिन और बहुत ऐसी वैरायटी हैं जैसे पिंक ओयेस्टर, ओयेस्टर मशरूम, शैंकरल्स, शिडाकी, पुर्तबेलो, इन सभी मशरूम का मैंने इस्तेमाल किया. कहा था कि आप एक ऐसी डिश बनाइए जो देसी है लेकिन इसमें थोड़ा सा इंटरनेशल टच भी है. जहां पर आप अलग-अलग मशरूम का इस्तेमाल कर रहे हैं और हर मशरूम का अपना-अलग फ्लेवर होता है. अगर आप सोचें कि कॉमन मशरूम से ऐसा होगा तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. आपको स्वाद समझने के लिए इसे चखना जरूरी है.

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सवाल: आपकी डिश सभी को बहुत पसंद आई, ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक की पत्नी अक्षिता भी दिल्ली से हैं और आप भी दिल्ली से तो उनसे आपकी क्या बातचीत हुई?

जवाब: मुझे लगते है जब उन्होंने पहली बाइट खाई, वो कहते हैं ना जब कोई खाता है तो जरूरी नहीं है कि कोई बोलकर बताए आपको फेशियल एक्सप्रेशन से पता चल जाता है. तो उन्होंने खाया, 2 सेकंड लिए, अपनी आंखें घुमाई और कहा नाइस और फिर उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए घर वापसी की तरह है कि मैं वापस आकर ऑथेंटिक हिंदुस्तानी खाना खा रही हूं.


अगर आपका खाना आपको अपने घर की याद दिलाए तो वो खाना वाकई मैं आपको बहुत पसंद आया. खाने के इर्द-गिर्द हमारी खूब बातें होती रहीं. उनसे यह बातचीत हुई कि उनको क्या पसंद है जैसे यूके में इंडियन खाना कैसा है. हिंदुस्तान आकर उनको खाना कैसा लगता है. वो बहुत ही सादा सिंपल खाना पसंद करती हैं और वह अपनी फिटनेस का भी काफी ख्याल रखती हैं. 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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सवाल: आपके पापा एक बैंकर थे तो आप शेफ कैसे बने? आपको घर में किसी ने मना नहीं किया?

जवाब: मैं पापा और दादा दोनों ही बैंकर थे. सबने यही सोचा कि बैंकिग या सीए बनाऐंगे कुणाल को लेकिन दिक्कत यह थी कि मुझे मैथ्स में कुछ खास इंटरेस्ट नहीं था. मुझे जो सब्जेक्ट अच्छे लगते थे वो आर्ट्स के थे. साइंस की फिजिक्स मुझे पसंद थी, कैमेस्ट्री नहीं आती थी. मेरा शुरू से ही आर्ट्स की तरफ एक झुकाव रहा है चाहे वो स्कूल के अंदर किएटिव राइटिंग हो. ड्रॉइंग, पेंटिग में मेरी रूचि थी. हालांकि, मैंने बी-कॉन ऑनर्स किया है. वो मुझे इतना इंटरेस्टिंग नहीं लगा तो मैंने अपने पापा से बात की कि मुझे कुछ और करना है. उन्होंने कहा- क्या करना है? मैंने कहा- मुझे नहीं पता तो उन्होंने बोला पता करो लोगों को एडमिशन नहीं मिलता कॉलेज में आपको मिल रहा है तो आप सोचो क्या करना है. तो अफरा तफरी में मैंने होटल मैनेजमेंट जॉइन कर लिया बिना कुछ सोचे समझे. मैंने सोचा चलो कम से कम बैंकर नहीं बनना पड़ेगा. 

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सवाल: आपको कुकिंग में इंटरेस्ट था? कोर्स करने से पहले आपने पहले घर पर कभी कुकिंग की थी?

जवाब: कुकींग की थी लेकिन बहुत ही बेसिक. ऐसा इंटरेस्ट नहीं था कि मुझे सीखना है कुछ बनना है. इतना था कि मैं बहुत अलर्ट रहता था कि घर पर क्या बन रहा है. कौन बना रहा है. कैसे बन रहा है. मम्मी की किचन में हेल्प करना. पापा संडे को कुक करते थे उनके साथ हाथ बंटाना तो वो सब था लेकिन कभी ऐसा नहीं सोचा था कि प्रोफेशनली कुक बनना है. मैंने कॉलेज इसीलिए जॉइन किया कि मुझे थोड़ा समय मिल जाए कि मुझे करना क्या है और जब मैंने कॉलेज शुरू किया तो कुकिंग मुझे बहुत अच्छी लगी. उस वक्त ये था कि कुकिंग ऑप्शन ले रहे हैं तो आप अपने हाथों से करियर का गला घोंट रहे हो. तो सबने बोला कि ये तो बहुत ही गलत राह आपने चुन कर ली है, इसमें तो ना करियर ऑप्शन अच्छा है ना पैसे अच्छे हैं. आप अटक जाओगे, मजदूर की तरह काम करोगे. 

मैंने कहा- कोई बात नहीं देखा जाएगा. अब जो है सो है. मुझे पसंद है ये करना. मैंने भी नहीं सोचा था कि मुझे जीवन में कुछ करना है. मुझे था कि मैं कुकिंग को एंजॉय कर रहा था. बड़ा क्रिएटिव है, टफ है लेकिन इंटरेस्टिंग भी बहुत है. मुझे लगता है कभी-कभी आप फ्लो के साथ चलते हैं आपको तकलीफ होती भी है तो आपको कोई फर्क नहीं पड़ता.  मैंने सबसे पहले अपनी जॉब ताज में की थी.

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सवाल: आपको इंडियन डिशेज़ में खाने में सबसे ज्यादा क्या पंसद है? जब आप कुकिंग सीख रहे थे तो कोई ऐसा इंसीडेंट जो आपको हमेशा याद रहता हो?

जवाब: देखिए मेरा टेस्ट तो काफी सिंपल है. सौंफ, अजवाइन के पराठे के साथ चीनी वाली दही और अचार. मुझे कोई ये दे दे तो मैं बहुत खुश हूं. ऐसे काफी इंसीडेंट रहे हैं. एक बार जब मैं सीख रहा था तो काम में गलतियां की तो सुनने को बहुत मिला. जब ठीक किया तब भी सुनने को मिला कि तुम सही तरह से नहीं कर रहे, तुम शेफ नहीं बन पाओगे, ऐसा नहीं होता, ये क्या है ऐसा थोड़ी ना होता है वैसा थोड़ी ना होता है. कई बार बहुत डिप्रेसिंग लगा कि मतलब मैं जितनी मेहनत कर लूं, मैं जितना एफर्ट कर लूं, मैं तो कोई काम सही कर ही नहीं पाऊंगा. मैं सब कुछ ही गलत कर रहा हूं. ऐसा भी एक वक्त था कि मैं सोचने लगा ये करने का मेरा फैसला सही है भी या नहीं. 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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सवाल: आपको कब लगा कि नहीं मैं सही कर रहा हूं और मुझे यह करते रहना चाहिए?

जवाब: मुझे साढ़े तीन-चार साल हो गए थे जॉब करते हुए. रोजाना मैं 13-14 घंटे काम करता था. बहुत प्रेशर होता था तो एक दिन मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि मुझे सबसे सामने बहुत डांट पड़ी. मेरे बॉस ने बोला कि यह ठीक नहीं हुआ वो ठीक नहीं हुआ. तो अब मैं उनको बोल भी नहीं सकता कि मुझे 2 दिन रेस्ट मिल जाएगा तो नॉर्मल काम कर पाऊंगा. मैं एक दिन ऐसे ही अपने दोस्त के साथ बैठा हुआ था उससे मैंने डिस्कस किया कि शायद मैंने कोई गलती तो नहीं कर दी. मुझे अभी भी याद है वह मेरा करीबी दोस्त है, उसने मुझे समझाया कि अगर अंदर कोई भी नेगेटिविटी आ रही है तो उसे निकाल दें. तुझे पंसद है ये तभी तो जॉइन किया है तू एंजॉय करता है, तुझे माहौल ठीक नहीं लगता तो तू उसे नहीं बदल सकता लेकिन अपनी सोच जरूर बदल सकता है. दोस्त की पॉजिटिव सोच ने काफी कुछ बदल दिया, यह बात मेरे दिमाग को ट्रिगर की और मेरे लिए मैं हमेशा पॉजिटिव साइड ही देखता हूं.

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सवाल: आपकी सिग्नेचर डिश क्या है? बहुत सारी होंगी लेकिन फिर भी अगर एक पूछी जाए तो आप किसे कहेंगे?

जवाब: मुझे लगता है कि अपनी सिग्नेचर कहना थोड़ा मुश्किल है. बहुत सारी हैं लेकिन इन दिनों मेरा दिल मिलेट्स के साथ लगा हुआ है. इनके साथ अलग-अलग एक्सपेरिमेंट, अलग-अलग चीजें ट्राई कर रहा हूं. हाल ही में मैंने मिलेट्स और उड़द दाल का एक अच्छा पैन केक तैयार किया है. इसे आप चटनी के साथ नाश्ते में खा सकते हैं. 


 

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