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'मध्यस्थता से सुलझाएं विवाद', वरदराज पेरुमल पूजा विवाद में सुप्रीम आदेश, संजय कौल मध्यस्थ नियुक्त

सुप्रीम कोर्ट ने कांचीपुरम के वरदराज पेरुमल मंदिर में पूजा पद्धति विवाद पर मध्यस्थता के आदेश दिए हैं. थेंगलाई और वडगलाई संप्रदाय अनुष्ठानों की पद्धति को लेकर आमने-सामने हैं. कोर्ट ने जस्टिस एसके कौल को मध्यस्थ नियुक्त किया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत से विवाद सुलझाने को कहा (Photo: PTI)
सुप्रीम कोर्ट ने बातचीत से विवाद सुलझाने को कहा (Photo: PTI)

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में स्थित प्राचीन वरदराज पेरुमल मंदिर की सेवा और पूजा पद्धति को लेकर विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता कराने का आदेश दिया है. सर्वोच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस संजय किशन कौल की अगुवाई में मध्यस्थता का आदेश दिया है. इस मंदिर की सेवा-पूजा को लेकर दो संप्रदायों के बीच विवाद चल रहा है.

थेंगलाई संप्रदाय और वडगलाई संप्रदाय के बीच विवाद इस बात को लेकर चल रहा है कि मंदिर में प्रतिदिन की सेवा पूजा और पर्व त्योहारों पर किए जाने वाले अनुष्ठान रामानुज सम्प्रदाय के मत से हों या रामानंदाचार्य के अनुसार. इस मुद्दे पर मद्रास हाईकोर्ट का फैसला भी आया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. अब सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का आदेश दिया है.

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्य बागची की पीठ ने दोनों पक्षों से कहा कि वो मध्यस्थता से इसका हल क्यों नहीं निकालते? देवता के सामने आप दोनों पूजा कर रहे हैं. विवाद का विषय दो भाषाओं में की जाने वाली प्रार्थना है. कितनी खूबसूरत और विशद विरासत इस देश के पास है. तमिलनाडु में इतनी समृद्ध विरासत है. ये भारतीय संस्कृति की उत्कृष्टता का प्रदर्शन है.

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सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि अगर आप इष्टदेव की दो बार पूजा अर्चना करते हैं तो इष्टदेव अधिक ही प्रसन्न होंगे. अगर कोई अलग भाषा में एक अलग मंत्र करना चाहता है, तो क्या समस्या है? वकील गुरु कृष्ण कुमार ने कहा कि भाषा तो एक ही है. बस शब्द और उच्चारण विधि अलग है. सीजेआई ने पूछा कि क्या आप दोनों पक्षकार रामानुज आचार्य के अनुयायी हैं?

इस पर सी आर्यमा सुंदरम में कहा कि इस मंदिर की रस्में 700 से अधिक वर्षों से चली आ रही हैं. अब वे अनुष्ठानों की पद्धति बदलना चाहते हैं. इस मामले में कोर्ट के 1915 में आए निर्णय में कहा गया था कि थेंगलाई संप्रदाय की पद्धति ही जारी रहेगी. सीजेआई ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज को मध्यस्थ बनाने का सुझाव देते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल को मध्यस्थ नियुक्त किया.

वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दोनों संप्रदायों के बीच विवाद और हाथापाई भी हुई थी. कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों संप्रदाय- थेंगलाई और वडाकलाई श्री रामानुजाचार्य के अनुयायी हैं और वरदराज पेरुमल मंदिर कांचीपुरम के साथ ही तमिलनाडु के वैष्णव मंदिरों में प्रार्थना करने की विधि और तरीके के बारे में इस विवाद में पक्षकार हैं. प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हमने वकीलों से मध्यस्थता की संभावना तलाशने को कहा है ताकि दिन-प्रतिदिन के अनुष्ठानों को सौहार्दपूर्ण तरीके से किया जा सके.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में हम इस अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसके कौल से अनुरोध करते हैं कि वे प्रमुख मध्यस्थ के रूप में कार्य करें. वह अपनी पसंद के दो व्यक्तियों को शामिल कर सकते हैं, जो तमिल और संस्कृत भाषा, मंदिर के अनुष्ठानों और तमिलनाडु के धार्मिक इतिहास और उपासना पद्धति के जानकार हों.

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दोनों पक्षों ने इस आदेश की प्रति के साथ कल गुरुवार तक जस्टिस कौल से संपर्क करने पर सहमति व्यक्त की. सीजेआई की बेंच ने कहा कि वो जस्टिस कौल से अनुरोध करते हैं कि वह नाजुक और गंभीर संवेदनशील प्रकृति की ये जिम्मेदारी स्वीकार करें. अगली सुनवाई गुरुवार के बाद होगी.

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