scorecardresearch
 

उड़ान से पहले प्लेन पर पानी क्यों छिड़कते हैं? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

एयरपोर्ट पर फ्लाइट पर पानी की बौछार दो अलग-अलग कारणों से की जा सकती है. सर्दियों में उड़ान से पहले डी-आइसिंग प्रक्रिया के तहत बर्फ हटाने के लिए विशेष लिक्विड का छिड़काव किया जाता है, जबकि किसी खास अवसर पर फ्लाइट के आगमन या विदाई पर वाटर कैनन सलामी दी जाती है.

Advertisement
X
प्लेन के विंग्स एक खास आकार में बनाए जाते हैं ताकि वे हवा में सही तरीके से लिफ्ट पैदा कर सकें. ( Phone: ITG)
प्लेन के विंग्स एक खास आकार में बनाए जाते हैं ताकि वे हवा में सही तरीके से लिफ्ट पैदा कर सकें. ( Phone: ITG)

कई बार आपने सोशल मीडिया या एयरपोर्ट पर देखा होगा कि किसी फ्लाइट के लैंडिंग के बाद उस पर पानी की तेज धारें छोड़ी जाती हैं. बहुत से लोगों को लगता है कि यह फ्लाइट को साफ करने के लिए किया जाता है, लेकिन असल वजह कुछ और ही होती है. वहीं सर्दियों में उड़ान भरने से पहले भी विमानों पर एक खास तरह का लिक्विड पदार्थ छिड़का जाता है, जिसे डी-आइसिंग कहा जाता है.

डी-आइसिंग क्या होती है?
सर्दियों के मौसम में जब तापमान बहुत कम हो जाता है, तो प्लेन के विंग्स और बॉडी पर बर्फ जम सकता है. यह बर्फ फ्लाइट के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. इसलिए उड़ान भरने से पहले प्लेन पर एक विशेष लिक्विड पदार्थ का छिड़काव किया जाता है, जिसे डी-आइसिंग कहा जाता है. यह लिक्विड पदार्थ आमतौर पर प्रोपिलीन ग्लाइकोल और पानी का मिश्रण होता है. इसे गर्म करके प्लेन के विंग्स और अन्य हिस्सों पर स्प्रे जाता है ताकि जमी हुई बर्फ और बर्फीली परत हट सके.

डी-आइसिंग की जरूरत क्यों पड़ती है?
प्लेन के विंग्स एक खास आकार में बनाए जाते हैं ताकि वे हवा में सही तरीके से लिफ्ट पैदा कर सकें. यदि पंखों पर बर्फ जम जाए, तो उनका आकार बदल जाता है. इससे कई समस्याएं हो सकती हैं. फ्लाइट को उड़ान भरने में कठिनाई हो सकती है. ईंधन की खपत बढ़ सकती है. फ्लाइट की स्थिरता प्रभावित हो सकती है. सुरक्षा को खतरा हो सकता है. यही कारण है कि उड़ान से पहले बर्फ हटाना बेहद जरूरी माना जाता है.

Advertisement

एंटी-आइसिंग क्या होती है?
डी-आइसिंग बर्फ हटाने का काम करती है, लेकिन अगर बाहर लगातार बर्फबारी हो रही हो तो बर्फ फिर से जम सकती है. ऐसी स्थिति में एंटी-आइसिंग की जाती है. इसमें एक गाढ़ा तरल पदार्थ विमान पर लगाया जाता है, जो कुछ समय तक नई बर्फ जमने से रोकता है. यह तरल हरे या लाल रंग का भी हो सकता है ताकि पायलट इसकी स्थिति आसानी से देख सकें.

पहली बार कब दिया गया था एयरलाइंस का वाटर सैल्यूट?
वाटर सैल्यूट की शुरुआत 1990 के दशक में मानी जाती है. बताया जाता है कि अमेरिका के साल्ट लेक सिटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक रिटायर हो रहे डेल्टा एयरलाइंस के पायलट को सम्मान देने के लिए पहली बार विमान पर पानी की बौछार की गई थी. इस खास सम्मान को लोगों ने काफी पसंद किया और बाद में यह कई एयरपोर्ट्स पर एक परंपरा बन गया.

आज के समय में वाटर सैल्यूट का इस्तेमाल नई एयरलाइन के स्वागत, किसी विमान की आखिरी उड़ान, विशेष उपलब्धि या किसी पायलट के रिटायरमेंट जैसे खास मौकों पर किया जाता है. हालांकि, वाटर सैल्यूट और डी-आइसिंग को एक जैसा नहीं समझना चाहिए. डी-आइसिंग एक सुरक्षा प्रक्रिया है, जिसमें ठंड के मौसम में विमान पर जमी बर्फ को हटाने या बर्फ जमने से रोकने के लिए विशेष तरल पदार्थ का छिड़काव किया जाता है. वहीं वाटर सैल्यूट केवल सम्मान और समारोह के लिए किया जाता है और इसका विमान की सुरक्षा प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं होता.

Advertisement

इस प्रक्रिया में कितना समय लगता है?
अगर फ्लाइट पर सिर्फ हल्की बर्फ जमी है, तो डी-आइसिंग में लगभग 5 से 10 मिनट लग सकते हैं. लेकिन यदि भारी बर्फबारी हो रही हो, तो यह प्रक्रिया 10 से 30 मिनट या उससे अधिक समय भी ले सकती है. इसी वजह से सर्दियों में उड़ानों में देरी होना आम बात है.

प्लेन पर पानी की बौछार क्यों की जाती है?
अब बात करते हैं उस समय की, जब किसी फ्लाइट के उतरने के बाद उस पर पानी की बौछार की जाती है, इसे वाटर कैनन सैल्यूट कहा जाता है. यह विमान को सम्मान देने की एक विशेष परंपरा है. आमतौर पर ऐसा तब किया जाता है जब कोई नई एयरलाइन पहली बार किसी एयरपोर्ट पर पहुंचती है. किसी विमान की आखिरी उड़ान होती है. किसी पायलट की रिटायरमेंट होती है. कोई विशेष उपलब्धि या समारोह होता है. इसका विमान की सफाई या डी-आइसिंग से कोई संबंध नहीं होता.

एयरपोर्ट इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि डी-आइसिंग के दौरान इस्तेमाल होने वाले लिक्विड को विशेष ड्रेनेज सिस्टम के जरिए इकट्ठा किया जाता है ताकि पर्यावरण पर कम से कम असर पड़े. फ्लाइट पर सर्दियों में किया जाने वाला स्प्रे डी-आइसिंग और एंटी-आइसिंग प्रक्रिया का हिस्सा होता है, जो फ्लाइट की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. वहीं फ्लाइट के उतरने के बाद पानी की बौछार अक्सर सम्मान देने वाली वाटर कैनन सलामी होती है. दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग उद्देश्यों के लिए की जाती हैं, लेकिन इनका मुख्य लक्ष्य सुरक्षित और सफल एविएशन ऑपरेशन सुनिश्चित करना होता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement