जब कोई व्यक्ति अपना मकान किराए पर देता है, तो उसे उम्मीद रहती है कि किराएदार घर को ठीक से रखेगा. लेकिन कई बार किराएदार घर छोड़ते समय दीवारों पर गहरे निशान, टूटे हुए प्लास्टर, उखड़ा हुआ पेंट और सीलन जैसी समस्याएं छोड़ जाते हैं. ऐसे में मकान मालिक के सामने सवाल खड़ा हो जाता है कि घर की मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा? क्या मकान मालिक किराएदार की सिक्योरिटी डिपॉजिट से मरम्मत का पैसा काट सकता है या फिर किराएदार को अपनी जेब से पैसे देने होंगे? इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि घर को कितना नुकसान हुआ है और वह नुकसान किस वजह से हुआ है.
दीवारों पर पेंट खराब होने पर कौन देगा पैसा?
अगर किराएदार लंबे समय तक घर में रहा है, तो समय के साथ दीवारों का पेंट हल्का पड़ना, रंग उड़ना या सामान्य रूप से गंदा होना आम बात है. इसे सामान्य टूट-फूट (Normal Wear and Tear) माना जाता है. ऐसी स्थिति में दीवारों पर दोबारा पेंट कराने का खर्च आमतौर पर मकान मालिक को उठाना पड़ता है. लेकिन अगर किराएदार ने दीवारों पर जगह-जगह बड़े छेद कर दिए, बच्चों ने दीवारों पर पेन या पेंट से लिख दिया या लापरवाही के कारण दीवारों को ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, तो मरम्मत का खर्च किराएदार से मांगा जा सकता है.
दीवार में दरार या प्लास्टर टूटने पर क्या होगा?
अगर घर की दीवार में अपने आप दरार आ गई है या पुरानी इमारत होने की वजह से प्लास्टर उखड़ रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी आमतौर पर मकान मालिक की होगी. वहीं, अगर किराएदार ने दीवार में गलत तरीके से ड्रिलिंग कराई, भारी सामान टांगने के लिए बड़े छेद किए या किसी दूसरे काम से दीवार को नुकसान पहुंचाया है, तो उसे मरम्मत का खर्च देना पड़ सकता है. यानी यह देखना जरूरी है कि दीवार खराब होने की वजह क्या है.
मकान मालिक सिक्योरिटी डिपॉजिट से पैसे काट सकता है?
अक्सर मकान मालिक घर किराए पर देते समय किराएदार से सिक्योरिटी डिपॉजिट लेते हैं. यह पैसा घर खाली करते समय वापस किया जाता है. अगर किराएदार ने घर को सामान्य इस्तेमाल से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, तो मकान मालिक मरम्मत का उचित खर्च सिक्योरिटी डिपॉजिट से काट सकता है. हालांकि, वह सामान्य टूट-फूट के नाम पर मनमाने तरीके से पैसे नहीं काट सकता. मरम्मत का खर्च कितना आया है, इसका बिल या दूसरा उचित सबूत रखना बेहतर होता है.
किराएदार घर खाली करने से पहले क्या ध्यान रखे?
घर छोड़ने से पहले किराएदार को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.
- घर में पहले से मौजूद खराबियों की तस्वीरें रखें.
- मकान मालिक के साथ हुए रेंट एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें.
- घर खाली करने से पहले दीवारों और दूसरे हिस्सों की तस्वीरें ले लें.
- अगर कोई नुकसान हुआ है, तो उसकी मरम्मत को लेकर मकान मालिक से बात करें.
- सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस लेते समय पैसे की कटौती का हिसाब जरूर मांगें.
कानून क्या कहता है?
भारत में मकान मालिक और किराएदार के बीच जिम्मेदारियां रेंट एग्रीमेंट और लागू किराया कानूनों के आधार पर तय होती हैं. ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 108 में मकान मालिक और किराएदार के अधिकारों और जिम्मेदारियों का जिक्र है. इसलिए घर की मरम्मत का खर्च तय करते समय रेंट एग्रीमेंट की शर्तें, नुकसान की वजह और उसकी स्थिति देखना जरूरी है.
सीधी बात यह है कि अगर दीवारें पुराने होने या सामान्य इस्तेमाल से खराब हुई हैं, तो खर्च आमतौर पर मकान मालिक देगा. लेकिन अगर किराएदार की लापरवाही या गलत इस्तेमाल से दीवारों को नुकसान पहुंचा है, तो मरम्मत का खर्च किराएदार को उठाना पड़ सकता है.